कविता

उत्सव मनाना तुम !!!!

स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाना तुम तिरंगा भी फहराना पर शपथ मत लेना उसके नीचे आन बान शान की तुम्हारे शब्दों की ये गुलामी वो सह नहीं पायेगा साये में उसके छल होता तो है पर वो किसी से कह नहीं पायेगा !!! … जहाँ बेटी को जन्म देने से माँ घबराती मौत हो जाती […]

हाइकु/सेदोका

श्रृंगार धरती का !!!!

हरियाली ये श्रृंगार धरती का उजाड़ो मत ! …. हैं वरदान धरा में पेड़ पौधे बचा लो इन्हें ! … बो देना बीज धरा की गोद सूनी प्रकृति कहे ! …. खुद तपते शीतल छाँव देते हमें वृक्ष ये! … कड़वी नीम मीठी निम्बोली देती शीतल छाँव ! …. कुल्हाड़ी मार गिराया जो पेड़ को […]

कविता

रुको मत !

ये खटपट वाले रिश्ते भी जब मौन होते हैं तो मन को छटपटाहट होती है जाने क्या हुआ इनका लड़ना-झगड़ना ही साबित करता है जिंदगी में बाकी है अभी बहुत कुछ करना किसी को मनाना है तो किसी को सोते से जगाना है ! … सीधी लाईन होती है न जब ईसीजी में तो उसका […]

कविता

जब माँ साथ होती है !!!!

जाने कहाँ छिप जाती है उदासी, ख़ामोशी, और तन्हाई जब माँ साथ होती है !!! … सारी मुस्कराहटों को पता होता है माँ की धड़कनों से हर कोना हँसता है और दीवारें जगमगाती हैं !!!

कविता

मरहम के साये में !!!

कड़वे शब्द कठिन समय में बस मरहम होते हैं जख्मो की ज़बान होती तो वो चीखते शोर मचाते आक्रमण करते मरहम के साये में दर्द नम होकर यूँ पसीज हिचकियाँ ना लेते!!!! … छलनी होती रूह पे घड़ी दो घड़ी की तसल्ली वाले शब्दों से कुछ हुआ है ना कभी होगा गुनाहों की शक्ल बदलने […]

कविता

मन भी सिक्का हो जाता है !!

मौन मेरा आज कुछ बातों को सिक्के की तरह उछाल रहा है गगन की ओर चित्त और पट अब मन की मुट्ठी में है किस बात को कैसे कब और कहाँ इस्तेमाल करना है। … जब बातें कड़क और स्प्ष्ट हों तो मन भी सिक्का हो जाता है क्या लेना है और क्या छोड़ना निर्णय […]

कविता

ख्वाब में देखा करती थी माँ :)

जुनून की जड़ों में मैने डाली थी खाद उत्साह की दिया था पानी त्याग का तब कहीं जाकर लगा था पौधा उम्मीदों का जिस पर खिले थे वही फूल कल्पनाओं के जिसे तुम हर रात ख्वाब में देखा करती थी माँ ! — सीमा सिंघल ‘सदा’

हाइकु/सेदोका

होली है होली !!

प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. रंग गुलाल चले भंग के संग मचाते शोर ! .. प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. धरा ने खेला अम्बर संग रंग मचा धमाल ! … होली के रंग अपनों के संग हैं कहे फागुन ! … होली के रंग पिचकारी […]