लेख सामाजिक

विलम्ब से विवाह वरदान या अभिशाप ?

विवाह की अवधारणा: वि+वाह; यानी विशेष उत्तरदायित्व का निर्वहन करना. सनातन धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक अहम् संस्कार माना गया है. पाणिग्रहण संस्कार को ही हम आम बोलचाल की भाषा में विवाह संस्कार के नाम से जानते हैं. वैदिक मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति के समस्त कालखंडों को चार भागों में विभाजित […]

लेख सामाजिक

भारतीय महिलाओं की दिशा एवं दशा

वर्तमान हालात- गौरतलब है कि आजाद भारत में महिलाओं ने दिन-प्रतिदिन अपनी लगन, मेहनत एवं सराहनीय कार्यो द्वारा राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं. मौजूदा दौर में महिलाएँ नए भारत के आगाज़ की अहम कड़ी दिख रही हैं. लम्बे अर्से के अथक परिश्रम के बाद आज भारतीय महिलाएँ समूचे विश्व में […]

इतिहास

हिन्द वतन को लाल सलाम

स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए एक मंगल दिवस और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसकी अमर कहानी इतिहास में स्वर्णिम अच्छरों से दर्ज है. यह वही दिन था, जब समूचा भारत लाल सलाम का जयघोष करते हुए भारत माता को ब्रिटिस हुकूमतों के चंगुल से आजाद कराया था. उनकी कुर्बानियों की वजह से ही आज हम सब […]

सामाजिक

वर्तमान हालात पर नवयुवकों के नाम खुला खत

विषय : बिगड़ते वर्तमान हालात नवयुवकों एवं राष्ट्र के भविष्य के लिए बेहद चिंतनीय है. मेरे प्रिय नवयुवक साथियों, मुझे पता है कि वर्तमान हालात को उजागर करते मेरे इस खत को पढ़कर आप या तो इस पर गौर नहीं करेंगे या इसको पूर्णत: निरर्थक समझेंगे. हाँ, यह भी हो सकता है कि आप मेरे […]

कविता

माँ

शब्द तुम्ही हो, प्राण तुम्ही हो, तन मन की मूल तुम्ही हो, दृश्य तुम्ही हो, अदृश्य तुम्ही हो, भाव विभाव की मूल तुम्ही हो, एक तुम्ही हो, अनेक तुम्ही हो, संयुक्त जगत की मूल तुम्ही हो, ममता तुम हो, श्रद्धा तुम हो, वात्सल्य प्रेम की मूल तुम्ही हो, ज्ञान तुम्ही हो, वैराग्य तुम्ही हो, उद्देश्यों […]

कविता

मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें

झुरमुट में दिखती परछाइयाँ घुँघुरू की मद्दिम आवाज लम्बे अर्से का अन्तराल तुझसे मिलने का इन्तजार चाँद की रोशन रातों में पल हरपल थमता जाए ऐसा लगता है मानो तुम मुझसे आलिंगन कर लोगी पर कुछ छण में परछाइयाँ नयनों से ओझल हो जायें दिन की घड़ी घड़ी में बस बस तेरी ही याद सताये […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर-अल्लाह का दूसरा रूप है : पंचमहाभूत

अल्लाह ( अलइलअह ), यदि हम इसका विश्लेषण करें तो पाएगें कि अ- आब यानी पानी, ल- लब यानी भूमि, इ- इला यानी दिव्य पदार्थ अर्थात् वायु, अ- आसमान यानी गगन, ह- हरक यानी अग्नि. ठीक इसी तरह भगवान भी पंचमहाभूतों का समुच्चय है, भ- भूमि यानी पृथ्वी, ग- गगन यानी आकाश, व- वायु यानी […]

कविता

तुमसे ही सवाल क्यूँ ?

जय जवान जय किसान दोनों आज बेहाल हैं एक सीमा पर खड़ा है दूजा खेत में ड़टा है अन्न और रक्षा से ही देश आज भी खड़ा है देश के जवानों की वेतन इतनी कम है क्यूँ ? अन्नदाता आत्महत्या और भुखमरी का शिकार क्यूँ ? सबका साथ सबका विकास इसका उल्टा दिखता क्यूँ ? […]

लेख

हम सबकी जिम्मेदारी है

जरा समझिए: प्रतिभाशीलता शब्द एक विशेषण है, जिसका तात्पर्य है कि एक ऐसा व्यक्ति जो विशेष रूप से असाधारण योग्यता या बुद्धि से सम्पन्न हो. प्रतिभाशाली व्यक्तियों पर अध्ययन लेविस तरमन के सन् 1925 के कार्य से प्रारम्भ हुआ, जिसमें उन्होने उच्च योग्यता वाले व्यक्तियों की पहचान करने के लिए बुद्धि परीक्षण का प्रारूप तैयार […]

लेख

यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे

यह कोई नई बात नही है कि शब्दों में अथाह ऊर्जा होती है. गर हम गौर करें तो पाएगें कि हमारा सम्पूर्ण जीवन ही उस तरफ प्रवाहित होता है, जिस तरफ की अधिक ऊर्जा हमारे अन्दर सन्चित होती है. हाँ यह जरूर है कि वह सकारात्मक ऊर्जा भी हो सकती है और नकारात्मक ऊर्जा भी. […]