कविता

आत्मरक्षा करेगी नारी

देखो बहुत सह लिए उसने जुल्मों-सितम, अब आत्मरक्षा की ख़ातिर नारी वीरांगना कहलाएगी। अपने आत्म सम्मान के बचाव में नारी, अस्त्र शस्त्र उठाकर के  अपनी आबरु वो बचा पाएगी। इस कलयुग में दुःशासन से बचने को, द्रोपदी सी लाचार कृष्ण का इंतज़ार ना वो कर पाएगी। उस दिन क्रोधाग्नि की इस ज्वाला में, दहशत मिटाने […]

भजन/भावगीत

माँ की महिमा

नव दुर्गा मात की  महिमा है अपरंपार, नौ रूप है शक्ति तेरे  जग की तू है पालनहार । सुनहरे रंगो की लेकर मन में फुहार, अद्भूत सिंह पे होकर चली है सवार । रिश्तो में जोड़ देती है ऐसी कड़ियां, खुशियो की लगा देती है झड़िया। फूलों की बगिया को बहार से महकाती हो, मन […]

कविता

वो कर ही दिखलाएगा

कोशिश करना मुश्किल​ है नामुमकिन कुछ न हो पाएगा । राह मिले ना भले तुझे पर पथ पे आगे बढ जाएगा। कांटो की परवाह को​ छोड़ फूलों को चुनता​ जाएगा । सागर जैसा आगे बढ़ता​ तू निरंतर ही बहता​ जाएगा । बीज लगाया है जैसा​ तूने वैसा ही फल तू​ पायेगा । जो बीत गया […]

कविता

महिला दिवस विशेष – कौन हो तुम

कमजोर नहीं कोमल हो तुम, शक्ति रूपी निर्मल ज्योत हो तुम। इक पति की बढाती शान हो तुम, इक पिता का अभिमान हो तुम। अपने कुटुम्ब का आधार हो तुम, रिश्ते में विश्वास की डोर हो तुम। मकान को अपने घर बनाती हो तुम, सपनों का संसार बसाती हो तुम। जिम्मेदारियों का बोझ निभाती हो […]

कविता

कविता – मेरी प्यारी भाभी

मुश्किल भरे लम्हों में भी जो हमेशा साथ निभाती है। गलती होने पर भी हल्के से मुस्कुरा के जाती है । नादान भले हो पर मुझको प्यार से समझाती है । मोहब्बत बिखेरे हम सबको वो बहुत लुभाती है। फूलों की वादियों सी बनकर घर को अपने महकाती है । नणद न समझ कर एक […]

कविता

अलविदा 2018

पल पल बीत गया इस वर्ष को सहेज कर यादों में । नव वर्ष का हदय से करे स्वागत महकती सी कल की नई भोर में । बना हौसलों की नई उङान बह चलें समीरमय समय की धारा में । फिर एक बार कालचक्र की अनजानी राह पर थाम नई उम्मीदों की डोर में। शुरू […]

कविता

ये कैसा राम राज्य है

जो सारी धरती का स्वर्ग कहलाता है कश्मीर, दहशत की आग में आज जलता जा रहा है । उद्योगों से सज रहे है देखो अनेको नगर, गंगा का पावन जल अमृत से विष बनता जा रहा है । बेरोजगारी से तंग आ गया है बेरोजगार, यहाँ हर इंसान प्रदूषण से खोखला होता जा रहा है […]

कविता

ऐसी दिवाली बनाओ तुम

राग द्वेष लालच को हटाकर, अहंंकार को जड़ से मिटाकर, नई उमंग से उजियाला लाओ तुम। चहूँ दिशा में फैला है घनघोर अंधेरा, अब ले भी आओ नया सवेरा, जगमग मन के दीप जलाओ तुम । सुख-शांति की हो इच्छा चाहते, फिर आपसी रंजिश को क्यों ने मिटाते, हर्षित स्नेह भरपूर लुटाओ तुम । भूखे […]

कविता

करवाचौथ और प्रियतम

याचक बनकर तुमनें मुझे मांगा था मात पिता से, मन कर्म वचनो से मैनें भी तुम्हारा साथ दिया। चूड़ी बिदिंया मेहंदी से करके सोलह श्रृंगार, प्यार भरी माँग को अरमानो से तुमने सजा दिया । करवा चौथ व्रत की होती हैं हर सुहागन को चाहत, पिया की सलामती की दुआ वो करती जाती हैं। रहके […]

भजन/भावगीत

माँ की महिमा

नव दुर्गा मात की महिमा है अपरंपार, नौ रूप है शक्ति तेरे जग की तू है पालनहार । सुनहरे रंगो की लेकर मन में फुहार, अद्भूत सिंह पे होकर चली है सवार । रिश्तो में जोड़ देती है ऐसी कड़ियां, खुशियो की लगा देती है झड़िया। फूलों की बगिया को बहार से महकाती हो, मन […]