सामाजिक

हर समस्या समाधान भी साथ लाती

सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यंतु; मा कश्चिद्दु:ख भाग्भवेद्।। आज अचानक “कोरोना” नामक महामारी ने जिस प्रकार से विश्व की साढ़े सात अरब जनसंख्या को जीवन सुरक्षित बनाये रखने की भयावह चुनौती दे डाली है, निश्चित ही इससे इस संकट के कारण मानवीय जीवन अस्तित्व का एक ऐसा प्रश्न सम्मुख खड़ा हो […]

पुस्तक समीक्षा

उपन्यास ‘शान्तिदूत’, प्राप्ति एवं संक्षिप्त अभिमत

विद्वान् संपादक आदरणीय डॉ सिंहल साहब द्वारा लिखित पुस्तक “शान्तिदूत” साहित्यिक आत्मीयता के सद्प्रभाव से प्राप्त करने का पावन सुअवसर मिला। अवलोकन करने पर पुस्तकीय विषयवस्तु से विज्ञ हुआ। पुस्तक द्वापरकालीन ऐतिहासिक कथानक पर केन्द्रित है। पुस्तक इतिहास की एक ऐसी घटना पर आधारित है, जो युगों-युगों तक एक ऐसे घटनाक्रम के लिए सदैव याद […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भारतीय संस्कृति में प्रेम विवाह की सार्थकता या निरर्थकता

भारतीय संस्कृति का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि भारत में विवाह की आठ पद्धतियां/रीतियां प्राचीन काल से प्रचलित रही हैं, इनमें मुख्यतः चार प्रकार के विवाह परंपरायें अधिक प्रभाव में हैं, जो इस प्रकार हैं:- 01-ब्रह्म विवाह, 02-दैव विवाह, 03-प्रेम (गान्धर्व) विवाह और 04-राक्षस विवाह। वैदिक काल में अधिकांशतः विवाह वैदिक रीति-रिवाज से […]

कविता

मेरा गाँव

मेरा गाँव मेरा सारा जहान् है क्योंकि••• गाँव की संस्कृति सबसे महान् है। गाँव ही मेरी माँ है तो••• गाँव ही मेरे पिता हैं। गाँव में ही मेरे भाई-बहन हैं गाँव में ही मेरे अपनों का रहन-सहन है। गाँव ही मुझे सबसे अधिक भाता है क्योंकि••• गाँव से ही मेरा सच्चा रिश्ता-नाता है। गाँव है […]

कविता

किस्मत के खेल

जिन्दगी में ये किस्मत भी क्या-क्या गुल खिला देती है, पल-पल में खुशियों का गुलदस्ता तो••• पल-पल में दुःखों का पहाड़ खड़ा कर देती है। न जाने कब किसके जीवन को खुशियों से भर दे, और••• कब किसको दुःख-दर्द के कुएँ में धकेल दे। ऐ इन्सान! मत कर तू इतना अभिमान, कि••• कहीं किस्मत की […]

गीत/नवगीत

होली है

फाल्गुन प्यारा आया रे, कि खेलते होली हैं वृज की। क्योंकि बसंत बहार है।।••• वृज की जो होली कृष्ण ने खेली, रास रची लीला सभी गोपी चेली। मथुरा के वासी भी, कि प्यार से खेलते होली; क्योंकि बसंत बहार है।।••• देवदूत प्रह्लाद नाम है जिसका, मारने के बहाने से जल गई होलिका। धरम की जै […]

कविता

दहेज : एक सामाजिक अभिशाप

दहेज जो पहले माना जाता था एक उपहार, लेकिन… उसी के कारण आज नारी हो रही है लाचार। दहेज के धन से भरते जो आज अपने घर के भण्डार, माने जाते हैं वही अब सबसे ज्यादा समझदार। आज अक्सर सम्मान के रूप में करते हैं जो दहेज से लड़की की पहचान, उसी के न मिलने […]

कविता

भारतीयता की पहिचान हिन्दी

भारतीयता की पहिचान, हिन्दी बिना अधूरी है। इसीलिए हिन्दी की शिक्षा; सबके लिए जरूरी है।। भारतीयता की पहिचान… हिन्दु हों या जैन बौद्ध हों, सिक्ख पारसी भाई हों। ब्राह्मण हों या अन्य वर्ण हों; मुमलमान ईसाई हों।। भारतीयता की पहिचान… आस्तिक हों या नास्तिक हों, भारत देश निवासी हैं। राष्ट्र के सत्य हितैषी; निष्ठावान् विश्वासी […]

कविता

जनान्दोलन बनाम आश्वासन

देशकाल परिस्थिति के साथ ही बढ़ जाती हैं आवश्यकताऐं। पूर्ण हुई यदि न आवश्यकता तो बन जाती हैं समस्याऐं।। ले हाथ झण्डा बढ़ जाती हैं राहें। बजा बिगुल आन्दोलन का तो तन जाती हैं बाहें।। लंबे अंतराल से खुलती नींद शासन की। करते मंत्रणा तब समस्याओं के समाधान की।। बनाकर प्रतिनिधि अपना भेजता तब शासन। […]

कविता

हमारा वनस्पति-जीव जगत

पर्यावरण के ये वन प्रहरी, सुंदर धरती है यह देन। हरा-भरा जीवन ये देते; दृश्य सुहाने देखते नैन।। वन हमारे खुले खजाने, दुःख न देना इन्हें अन्जाने। यदि न जाने अब भी इनको; तो••• दुःख भोगेंगे सभी सयाने।। वास जहां है नर-नारायण का, मेल-मिलन है प्रकृति-पुरुष का। ऐसे वनस्पति जीव-जगत् का; क्षेत्र वन यह नाम […]