पुस्तक समीक्षा

समीक्षा – जीना इसी का नाम है (आलेख-संग्रह)

समीक्ष्य कृति:- जीना इसी का नाम है (आलेख-संग्रह) कृतिकार:- राजकुमार जैन ’’राजन’’ प्रथम संस्करण – 2020 ई0 मूल्य:- 200 रूपये प्रकाशक:- अयन प्रकाशन, नई दिल्ली समीक्षक:- प्रो. शरद नारायण खरे वैचारिकता से ही उत्कृष्ट समाज की संरचना होती है, तथा इसी से समाज को चेतना प्राप्त होती है। जीवन मूल्यों का प्रवाह जब दु्रतगति से […]

कविता

तेरे होने से

सुनहरा संसार है खुशियों का आसार है जीवन में सार है खेलती बहार है —तेरे होने से नूतन संसार है हर पल अभिसार है सौरभमय बयार है हर दिन त्यौहार है —–तेरे होने से थिरकता प्यार है हर दिन उपहार है ढाई आखर स्वीकार है हर शै पर ऐतबार है —–तेरे होने से — प्रो.शरद […]

गीत/नवगीत

अनुराग का तराना

मिला कोय तो जीवन बदला,नेह-मेघ घिर आये हैं । फूलों में खुशबू फिर लौटी,नव संदेशे आये हैं ।। मन गाता है परभाती अब, भजन-आरती भाते हैं संध्यावंदन से नाता अब, पंछी ख़ूब सुहाते हैं दिल है उपवन,महके हर पल,आकर्षण घिर आये हैं ! फूलों में खुशबू फिर लौटी,नव संदेशे आये हैं ।। कोई भी अब […]

लघुकथा

लघुकथा – उम्मीद अभी ज़िन्दा है

“देखो मिस्टर राजेश हमें अपनी कंपनी के लिए एक अनुभवी आदमी की ज़रूरत है ।” “वो तो मैं हूं ।” “पर हमें मेहनती आदमी की रिक्वायरमेंट है ।” “डेफीनिटली मैं वैसा ही हूं ।” “पर आदमी पूरी तरह से ईमानदार भी होना चाहिए ।” “वो भी मैं हूं ।” “आदमी पूरी तरह से सच्चा भी […]

लघुकथा

लघुकथा – फर्क

“रमा बहन,आजकल आप दिखाई नहीं देतीं, कहां व्यस्त रहती हैं ?” “अरे उमा बहन ,बात यह है कि मेरी बेटी एक माह के लिए मायके आई हुई है, तो उसी के साथ कंपनी बनी रहती है ।” “पूरे एक माह के लिए ?” “हां, बिलकुल” “अरे बेटियां ससुराल में पिसती रहती हैं, तो उन्हें आराम […]

लघुकथा

लघुकथा – “खरी बात”

“वह देखो शर्मा जी कितने खुश रहते हैं ।” “कितने संतुष्ट रहते हैं ।” ” आनंद से कितने लबालब रहते हैं ।” “पति-पत्नी में आपस में कितना अधिक प्रेम है ।” “उनके बच्चे भी उनकी कितनी अधिक बात मानते हैं ।” “बिलकुल सही है ।” ” हम दोनों उनसे कितने ऊंचे ओहदों पर हैं,हमारे पास […]

गीत/नवगीत

गतिशीलता का गीत

सकल दुखों को परे हटाकर,अब तो सुख को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीर बढ़ रही,व्यथित हुआ मन, दर्द नित्य मुस्काता अपनाता जो सच्चाई को, वह तो नित दुख पाता किंचित भी ना शेष कलुषता,शुचिता को अब वरना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे […]

गीत/नवगीत

गीत नया है अधरों पर

नया काल है,नया साल है,गीत नया हम गाएंगे । करना है कुछ नवल-प्रबल अब,मंज़िल को हम पाएंगे ।। बीत गया जो,विस्मृत करके नव उत्साह जगाएंगे सुखद पलों को स्मृति में रख कटुता को बिसराएंगे नई ऊर्जा,नई दिशाएं,नव संकल्प सजाएंगे । करना है कुछ नवल-प्रबल अब,मंज़िल को हम पाएंगे ।। अंतर्मन में शुचिता लेकर, नव परिवेश […]

मुक्तक/दोहा

जाड़े के दोहे

जाड़ा बनकर के कहर,लगता लेगा जान । बना हुआ है काल यह,इसको लो पहचान। कहीं बर्फ,कहीं जल गिरे,गीला हर इनसान । तेगों सी लगती हवा,जाड़ा है हैवान ।। सूरज भी घबरा गया,ओढ़े पड़ा लिहाफ । सिकुड़ा इंसां हो गया,पूरा-पूरा हाफ ।। नया वर्ष है शीतमय,सर्दी से भयभीत । शीत करे षड़यंत्र अब,दुश्मन की बन मीत […]

मुक्तक/दोहा

नव वर्ष के दोहे

सूरज आया इक नया,गाने मंगल गीत ! प्रियवर अब दिल में सजे,केवल नूतन जीत !! उसकी ही बस हार है,जो माना है हार ! साहस वाले का सदा,विजय करे श्रंगार !! बीते के सँग छोड़ दो,मायूसी-अवसाद ! नवल बनेगा अब धवल,देगा मधुरिम याद !! खट्टी-मीठी लोरियां,देकर गया अतीत ! वह भी था अपना कभी ,था […]