मुक्तक/दोहा

समाधान के दोहे

उलझन को सुलझाइए,लेकर सुलझे भाव। जिसके सँग है सादगी,रखता प्रखर प्रभाव।। उलझन है मन की दशा,नहीं समस्या मान। यह है दुर्बलता-दशा,आज हक़ीक़त जान।। मन को रख तू नित प्रबल,उलझन होगी दूर। जो रखता ईमान वह,नहीं खो सके नूर। उलझन उसको ही डसे,जो सच में डरपोक। कौन लगा सकता यहाँ,साहस पर तो रोक।। उलझन को ना […]

गीत/नवगीत

लक्ष्य का गीत

ज़िद पर आओ,तभी विजय है,नित उजियार वरो। करना है जो,कर ही डालो,प्रिय तुम लक्ष्य वरो।। साहस लेकर,संग आत्मबल बढ़ना ही होगा जो भी बाधाएँ राहों में,लड़ना ही होगा काँटे ही तो फूलों का नित मोल बताते हैं जो योद्धा हैं वे तूफ़ाँ से नित भिड़ जाते हैं मन का आशाओं से प्रियवर अब श्रंगार करो। […]

गीत/नवगीत

श्रमिकों का गीत

श्रम करने वालों के आगे,गहन तिमिर हारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। खेत और खलिहानों में जो, राष्ट्रप्रगति के वाहक हैं अन्न उगाते,स्वेद बहाते, जो सचमुच फलदायक हैं श्रम के आगे सभी पराजित,श्रम का जयकारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। सड़कों,पाँतों,जलयानों को, जिन ने नित्य सँवारा यंत्रों […]

गीत/नवगीत

गीत

गिर रही है रोज़ ही,क़ीमत यहाँ इंसान की बढ़ रही है रोज़ ही,आफ़त यहाँ इंसान की न सत्य है,न नीति है, बस झूठ का बाज़ार है न रीति है,न प्रीति है, बस मौत का व्यापार है श्मशान में भी लूट है,दुर्गति यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही,क़ीमत यहाँ इंसान की।। बिक रहीं नकली […]

समाचार

प्रो.शरद नारायण खरे को सम्मान

प्रो.शरद नारायण खरे को “गोस्वामी तुलसीदास साहित्य रत्न सम्मान मंडला-कलम की ताक़त साहित्य समूह ने भक्ति संतों के सृजन व संदेशों पर केंद्रित आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान माला में इतिहास के प्रोफेसर(वर्तमान प्राचार्य) व सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे ने गोस्वामी तुलसीदास जी  के रचनाधर्म व दर्शन पर एक घंटे का प्रभावशाली शोधात्मक  व्याख्यान देकर श्रोताओं […]

गीत/नवगीत

जलता है देश हमारा

जलता जाता देश,चुप्प हैं देखो सारे। नौजवान को समझाकर के,सब ही हारे।। नीति,नियति की बातें होतीं,हिंसा फैली। देखो तो सबकी ही चादर दिखती मैली।। शासक दोषी,नौजवान भी,कुछ तो देख तमाशे। दूर बैठकर चुप हो खाते,शक्कर पगे बताशे।। देशभक्ति की बातें करते,पर लाते अँधियारे। जलता जाता देश,चुप्प हैं देखो सारे।। आग बुझेगी कैसे अब यह,कोई तो […]

गीत/नवगीत

दर्द का गीत

रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं । अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं ।। बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो अब शेष रही ना,बादल भी ठहरे हैं । अपनों ने जो सौंपे वो,घाव बहुत गहरे हैं ।। मायूसी है,बढ़ी […]

मुक्तक/दोहा

योग और व्यायाम

(1) करना नित व्यायाम,ज़िन्दगी मंगल गाती। कहता चोखी बात,मान यदि मन को भाती। जीवन में उत्थान,यही तो सब ही चाहें, करता जो है योग,जिंन्दगी सदा सुहाती।। (2) जीवन है संग्राम ,तनावों ने घेरा है। काया रहे स्वस्थ,खुशी का तब डेरा है। कहते वेद -पुराण,निरोगी रहना हरदम, जो योगों से दूर,हर्ष ने मुँह फेरा है।। (3) […]

समाचार

प्रो.शरद नारायण खरे को “कबीर सम्मान”

मंडला– विगत चार दशकों से अधिक समय से निस्वार्थ भाव से समाज हित में सांस्कृतिक व मानवीय मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्तापूर्ण साहित्य साधना करने वाले अनेक श्रेष्ठ कृतियों के सृजक व साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अखिल भारतीय अवार्ड से पुरस्कृत साहित्य साधक,इतिहास-प्रोफेसर व वर्तमान महाविद्यालयीन प्राचार्य प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे को गत दिवस कबीर जयंती […]

कुण्डली/छंद

प्रभुवंदना की कुंडलियाँ

(1) अंतर में शुचिता पले,तो हो प्रभु का भान। वरना मानव मूर्ख है,कर ले निज अवसान।। कर ले निज अवसान,विधाता को नहिं जाने। चिंतन का उत्थान,तभी विधि को पहचाने।। सच का हो संसार,यही सद्गति का मंतर। सपने हों साकार,चेतना है यदि अंतर।। (2) खिलता है जीवन तभी,जब है उर निष्पाप। कर्म अगर होते बुरे,तो जीवन […]