भजन/भावगीत

हे! भोलेभंडारी

हे त्रिपुरारी,औघड़दानी,सदा आपकी जय हो। करो कृपा,करता हूँ वंदन,यश मेरा अक्षय हो।। तुम तो हो भोले भंडारी, हो सचमुच वरदानी भक्त तुम्हारे असुर और सुर, हैं सँग मातु भवानी यही कामना करता हूँ शिव,मम् जीवन में लय हो। करो कृपा,करता हूँ वंदन,यश मेरा अक्षय हो।। लिपटे गले भुजंग अनेकों, माथ मातु गंगा है जिसने भी […]

गीत/नवगीत

दर्द भरा गीत

दिल छोटे,पर मक़ां हैं बड़े,सारे भाई न्यारे ! अपने तक सारे हैं सीमित,नहीं परस्पर प्यारे !! दद्दा-अम्मां हो गये बोझा, कौन रखे अब उनको टूटे छप्पर रात गुज़ारें परछी में हैं दिन को हर मुश्किल से दद्दा जीते,पर अपनों से हारे ! अपने तक सीमित हैं सारे,नहीं परस्पर प्यारे !! मीठा बचपन भूल चुके सब, […]

कविता

प्लास्टिक त्यागें

अपनी ही करनी का फल तू,भुगत रहा इनसान तूने आज स्वयं का देखो कर डाला अवसान तूने खोजित किया प्लास्टिक,हर कामों में साधा इसीलिए यह फैल रही है शुद्ध हवा में बाधा आज करोना लेकर आया,मौत की काली छाया लिपटी हुई आज प्लास्टिक में,मानव की तो काया। मानव तू सचमुच अविवेकी,पैर कुल्हाड़ी मारी तेरी करनी […]

मुक्तक/दोहा

दोहे : नारी-महिमा

नारी सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो नार है,आन,बान औ’ शान !! नारी तो है श्रेष्ठ नित ,हैं ऊँचे आयाम ! इसीलिये उसको “शरद”, बारम्बार प्रणाम !! नारी ने नर को जना,इसीलिये वह ख़ास ! नारी […]

मुक्तक/दोहा

श्रीमद्भगवद्गीता के मुक्तक

(1) है दुनिया में जो व्यापक ज्ञान और अध्यात्म की वाहक सदा जो पथ दिखाती है,बनाती नर को जो लायक उसे कहतें हैं सारे दिव्यता का इक महासागर, कहाती है जो गीता,कृष्ण थे,जिसके अमर गायक। (2) मुझे गीता ने सिखलाया,जिऊँ मैं कैसे यह जीवन सुवासित कैसे कर पाऊँ,मैं अपनी देह और यह मन मैं चलकर […]

मुक्तक/दोहा

नीर की महत्ता के दोहे

नीर ईश का रूप है,पंचतत्व का सार। नीर नहीं तो व्यर्थ है,यह सारा संसार।। नीर लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास । नीर से सांसें चल रही,देवों का आभास ।।अमृत जैसा है “शरद”, कहते जिसको नीर । एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर ।। नीर बिना जीवन नहीं,अकुला जाता जीव । नीर फसल औ’ […]

मुक्तक/दोहा

अहिंसा के दोहे

सत्य-अहिंसा रोशनी,हैं जीवन के सार। लाते हैं जो हर घड़ी,अंतहीन उजियार।। नीति अहिंसा की बड़ी,सचमुच बहुत महान । जीवन की जिससे बढ़े,सच में नित ही शान ।। जियो सदा तुम ज्ञान से,सदाचार का भाव। सतत् अहिंसा-भाव से,चोखा रहे प्रभाव।। जीवन में नित हर्ष हो,बिखरे नित आनंद । भाव अहिंसा उच्चतम,प्रभु भी करें पसंद।। अपनाना तुम […]

सामाजिक

मन के हारे हार है

“मन को कर तू शक्तिमय, ले हर मुश्किल जीत। काँटों पर गाना सदा, तू फूलों के गीत।” मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख- दु:ख,आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं । वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित […]

मुक्तक/दोहा

मिलन के दोहे

मिलन ईश वरदान है,है इक पावन भाव। जिसका मनचाहा मिलन,उसको नहीं अभाव।। मिलन नहीं तो,है विरह,जो लगता अभिशाप। मिलन एक अहसास है,मिलन लिए नित ताप।। मिलन बदल दे ज़िंदगी,मिलन प्रेम के नाम। मिलन खुशी है,वेग है,मिलन राधिका-श्याम।। मिलन सदा है वंदगी,मिलन एक उत्कर्ष। मिलन मेलकर दो हृदय,जीते हर संघर्ष।। मिलन कामना नेक है,मिलन रचे मधुमास। […]

गीत/नवगीत

गीत – आलोक-अभिवंदना

अँधियारे से लड़कर हमको,उजियारे को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीड़ा,ग़म है,व्यथा-वेदना, दर्द नित्य मुस्काता जो सच्चा है,जो अच्छा है, वह अब नित दुख पाता किंचित भी ना शेष कलुषता,शुचिता को अब वरना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! […]