लघुकथा

लघुकथा – नालायक कपूत

” शर्मा जी तुम्हारे घर में जब देखो तब लड़ाई-झगड़ा होता रहता है ज़ोर- ज़ोर से चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें आती रहती हैं आख़िर यह है क्या ?” पड़ोसी कछवाहा जी ने सवाल किया ! ” अरे भाई , मेरी बीवी और माँ की आपस में नहीं बनती ,तो मैं क्या करूं ? ” शर्मा जी […]

गीत/नवगीत

गीत

सच्चाई की बात निराली,जीवन-सुमन खिलें अपनेपन से कर्म सँवारो,मंगलगीत मिलें करुणा का सागर छलकाओ,उर आनंदित होगा हर इक पल में खुशी मिलेगी,मन उल्लासित होगा पीर हरोगे यदि औरों की,धन्य करोगे जीवन चहक उठेगें तन-मन दोनों,महकेगा घर-आँगन मानव-सेवा,माधव-सेवा,यही धर्म सच्चा है कर्मकांड में जो है खोया,वह मानव कच्चा है भौतिकता का मोह त्यागकर,आध्यात्म अपनाओ झूठ,कपट तज,अंतर्मन […]

मुक्तक/दोहा

संवेदना

जीवन में संवेदना,लाती है मधुमास। अपनाकर संवेदना,मानव बनता ख़ास।। संवेदित आचार तो,है करुणा का रूप।। जिससे खिलती चाँदनी,बिखरे उजली धूप।। संवेदित सुविचार से,मानव बने उदार। द्वेष,कपट सब दूर हों,बिखरे नित उपकार।। अंतर्मन में नम्रता,अधरों पर मृदु बोल। करती है संवेदना,जीवन को अनमोल।। रीति,नीति हमसे कहें,बनना सद् इनसान। आएगी संवेदना,पाए जीवन मान।। हो संवेदित पौंछ दो,आँसू,दो […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

कैसा कलियुग आ गया,बदल गया इंसान। दौलत के पीछे लगा,तजकर सब सम्मान।। बदल गया इंसान अब,भूल गया ईमान पाकर दौलत बन गया,मानो ख़ुद भगवान।। नैतिकता को तज करे,पोषित वो अँधियार। इंसां अब इंसान ना,बना हुआ अख़बार।। प्यार,वफ़ा और सत्य अब,ना इंसां के पास। भावों का खोया हुआ,देखो अब अहसास।। रिश्ते सारे टूटते,स्वारथ का बाज़ार। बदला […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – स्कूल की यादें

शाला की यादें सुखद,दें मीठे अहसास। शाला के दिन थे भले,थे बेहद ही ख़ास।। दोस्त-यार सब थे भले,जिनकी अब तक याद। कुछ ऊँचे अफ़सर बने,वे अब भी आबाद।। कुछ पढ़ने में तेज थे,कुछ बेहद कमज़ोर। शिक्षक थे सच्चे गुरू,रखा काम पर ज़ोर।। शाला प्यारी थी बहुत,सुंदर थे सब कक्ष। मेरी शाला भव्य थी,नालंदा-समकक्ष।। दिन शाला […]

मुक्तक/दोहा

सौंदर्य के दोहे

रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक। प्रिये आज तू चाँद है,देखे सारा लोक।। गालों पर आभा खिली,लुभा रहा है नूर। दाता ने तुझको दिया,सच यौवन भरपूर।। चंचल चितवन से चलें,जाने कितने तीर। दिल थामे सब घूमते,कौन बताए पीर।। बतला दे ऐ रूपसी,तू किसका वरदान। तेरा मोहक रूप ये,है किसका अरमान।। रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक। प्रिये […]

मुक्तक/दोहा

लेखनी

आग उगलती लेखनी,ही लाती परिणाम। जो बदले युग को सदा,लाये नव आयाम।। लेखन में जब सत्य हो,परिवर्तन का भाव। वही लेखनी पूज्य है,जिसमें जनहित-ताव।। गाये जो बस दर्द,ग़म,पीड़ाओं के गीत। बने झोंपड़ी,भूख की,जो सच्ची मनमीत।। वही लेखनी धन्य है,जो असत्य से दूर। जो रखती संवेदना,वही कलम मशहूर।। कलम बिके ना,दृढ़ रहे,हों कैसे हालात। तभी बनेगी […]

मुक्तक/दोहा

कैमरे के मुक्तक

होते जो भी सुखद-दुखद पल,सबका चित्रण करता जीवन के बीते लम्हों को अंक में निज के भरता जिसका प्रियवर नाम कैमरा,वह इक यंत्र है न्यारा, तस्वीरों में विगत सजाकर,मायूसी को हरता। यादों को भरकर निज गृह में,इतिहासों को रचता था कैसा उज्ज्वल अतीत,इन विश्वासों को सृजता रिश्ते-नाते,प्रेम-नेह सब,रहें गर्भ में जिसके, उस अलबेले यंत्र कैमरे […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – सुबह की सैर

करो सुबह की सैर नित,दूर रहेंगे रोग। जीवन हो खुशहाल तब,दीर्घ आयु का योग।। सुबह मिले ताज़ी हवा,जो सचमुच वरदान। हर्ष मिले,आनंद भी,सांसें पायें मान।। रक्तचाप का संतुलन,सुगर नियंत्रित होय। काया फुर्तीली रहे,जीवन सुख को बोय।। सैर सुबह की कह रही,निद्रा त्यागो नित्य। पैदल चलना है भला,साथ देय आदित्य।। अंतर के आनंद से,जीवन गाये गीत। […]

समाचार

ऑनलाइन लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न

मंडला-साहित्यिक संस्था भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में,  फेसबुक के “अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका” के पेज पर, ऑनलाइन  अखिल भारतीय” हेलो फेसबुक लघुकथा सम्मेलन ” एवं  विचार गोष्ठी “समकालीन लघुकथाओं  में सांप्रदायिक सद्भावना ” का संचालन करते हुए, संयोजक सिद्धेश्वर ने कहा कि – ” देश की एकता और सांप्रदायिक सद्भावना को बनाए रखने में […]