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  • लघुकथा – बड़प्पन

    लघुकथा – बड़प्पन

    नगर के सिध्द स्थल हनुमान मंदिर में लक्ष्मण प्रसाद पहुंचे और प्रार्थना करने लगे -” हे भगवान कल का केस मैं ही जीतूं, इतनी दया ज़रूर करना। नहीं तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा। मेरी सारी...

  • समीक्षा – अहसास के पल

    समीक्षा – अहसास के पल

    कृति—-अहसास के पल कृतिकार——सरिता गुप्ता प्रथम संस्करण-2018 मूल्य—– ₹ 400 प्रकाशक- साहित्य भूमि, नई दिल्ली समीक्षक-प्रोफेसर शरद नारायण खरे, विभागाध्यक्ष इतिहास, शासकीय जे.एम. सी महिला महाविद्यालय मंडला( मध्य प्रदेश) फोन नंबर 9425 484 382 ‘अहसास के...

  • दोहे – शहीदों के प्रति

    दोहे – शहीदों के प्रति

    अमर शहीदों के लिये,देता हूं संदेश । तुम हो तो हम हैं ‘शरद’,तुम हो तो यह देश।। पुलवामा के वीर तुम,रहो सदा आबाद। करे वतन सजदा सदा, तुम हो ज़िन्दाबाद।। क़ुरबानी बेकार ना,जायेगी यह सांच। शौर्य...

  • सारस्वत-अभिवंदना

    सारस्वत-अभिवंदना

    मातु शारदे,नमन् कर रहा, तेरा नित अभिनंदन है ! ज्ञान की देवी, हंसवाहिनी, तू माथे का चंदन है !! अक्षर जन्मा है तुझसे ही, तुझसे ही सुर बिखरे हैं वाणी तूने ही दी सबको, चेतन-जड़ सब...

  • समकालीन गीत

    समकालीन गीत

    रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं !! बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो...

  • अभिनंदन

    अभिनंदन

    मस्तक पर खुशियों का चंदन करें कर्म औ’ श्रम का वंदन आशाओं को करें बलवती, कुंठाओं का रोकें क्रंदन आगत का नित है अभिनंदन । कटुताओं को याद करें ना आंसू बनकर और झरें ना मायूसी...

  • घुटती साँसें

    घुटती साँसें

    बिगड़ा है पर्यावरण,बढ़ता जाता ताप ! ज़हरीली सारी हवा,कैसा यह अभिशाप !! पेट्रोल,डीजल जले,बिजली जलती ख़ूब ! हरियाली नित रो रही,सूख गई सब दूब !! यंत्रों ने दूषित किया,मौसम और समाज ! हमने की है मूर्खता,हम...

  • चेतना का गीत

    चेतना का गीत

    सकल दुखों को परे हटाकर हमको,अब तो सुख को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीर बढ़ रही,व्यथित हुआ मन, दर्द नित्य मुस्काता अपनाता जो सच्चाई को, वह...

  • गीत

    गीत

    हिन्दी तेरी वाणी अमृत, हमको नित सरसाय सदियों से तेरी धारा में,सतत् देश मुस्काय हिन्दी तेरी——– तुझने ही तो धर्म को पाला,संस्कार को बोया तुझने ही तो हमें गती दी,और ज्ञान से धोया तूने ही तो...