गीत/नवगीत

गीत

दिनकर ने शोले बरसाये,पर अब तो राहत है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है ।। ताल-तलैयां रीत गये थे नदियां भी थीं सूखी बुझा-बुझा मन रहता था और काया भी थी रूखी बारिश की बूंदों से पर अब,हर उर आनंदित है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है […]

लघुकथा

लघुकथा – विरोध

“पापाजी,मेरे स्कूल से नोटिस आया है।” ‘उसमें क्या लिखा है ।” “उसमें लिखा है कि यदि आपने तीन दिन में अप्रैल,मई,जून माह की फीस जमा नहीं की,तो आपका नाम काट दिया जाएगा ।” अंश ने अपने पिता से कहा । “पर,तीन माह से तो स्कूल बंद है।” पिता ने कहा । “पर,उससे क्या ? स्कूल […]

लघुकथा

लघुकथा – सिपाही

“अनिल भाई, आजकल दिखते नहीं हो ।कहां बिजी रहते हो ?” “राकेश जी, नौकरी की ड्युटी में लगा रहता हूं ।” “अरे, तो इसका मतलब, क्या हम नौकरी नहीं कर रहे ?” “ऐसी बात नहीं,आप भी कर रहे हैं, पर ऑफिस की बाबूगिरी और पुलिस के सिपाही की नौकरी में बहुत अंतर है ?” “क्या […]

गीतिका/ग़ज़ल

पिता

अहसासों का सार पिता हैं, विश्वासों से प्यार पिता हैं । परम पिता की संतानों को, सचमुच में उपहार पिता हैं । गहन तिमिर को परे हटाकर, फैलाते उजियार पिता हैं । सूरज,चंदा,धरती,तारे, पूरा इक संसार पिता हैं । दुख,पीड़ा,ग़म,व्यथा,वेदना, में हरदम हथियार पिता हैं । जब भी कोई विपदा आई, तब-तब तो हथियार पिता […]

समाचार

दीपशिखा सागर का सृजन भाव व शिल्प की दृष्टि से श्रेष्ठ—प्रो.शरद नारायण खरे

मंडला-लोकप्रिय वॉट्सएप ग्रुप काव्यांगन ने बुधवार को एकल काव्यपाठ का आयोजन किया, जिसमें देश की जानी-मानी कवयित्री दीपशिखा सागर, छिंदवाड़ा ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से अतिथियों और श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। सभी ने दीपशिखा सागर की रचनाओं की भूरि-भूरि सराहना की। कार्यक्रम के मुख्य-अतिथि प्रो. शरद नारायण खरे, मण्डला ने कहा कि दीपशिखा सागर […]

कविता

घुटती साँसें

बिगड़ा है पर्यावरण,बढ़ता जाता ताप ! ज़हरीली सारी हवा,कैसा यह अभिशाप !! डीजल,गैसें खप रहे,बिजली जलती ख़ूब ! हरियाली नित रो रही,सूख गई सब दूब !! यंत्रों ने दूषित किया,मौसम और समाज ! हमने की है मूर्खता,हम ही भुगतें आज !! नगर घिर गये धुंध में,धूमिल सारे गांव ! धुंआ-धुंआ जीवन हुआ,गायब सारी छांव !! […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक चेतना के

(1) सदा सच्चों को रहता ईश का ही तो सहारा है जो झूठा है,जो कपटी है,वो बंदा नित्य हारा है, जो नैतिकता,धरम को मानता,विजय उसको ही मिलती है, जो खो देता है ईमां को,रहे हरदम बेचारा है ।। (2) बुरे पल आते-जाते हैं,बुरा है इनसे घबराना मनाना ईश को निशदिन,अहितकर होता डर जाना है भीतर […]

मुक्तक/दोहा

मदर्स डे (10 मई)पर – मां के दोहे

मां होती करुणामयी, मां सूरज का रूप। देती जो संतान को, सुख की मोहक धूप।। मां ईश्वर जैसी लगे, होती पालनहार। मां में पूरा है भरा, यह सारा संसार।। हरदम वंदन में रहे, मां का अनुपम त्याग। मां-महिमा गायन करें, सातों सुर औ’ राग।। मां धरती जैसी लगे, मां होती आकाश। मां से बढ़कर सृष्टि […]

लघुकथा

लघुकथा : रणनीति

“यह अपने राजा को क्या सूझा कि पूरे देश में महीने भर को सारी चीज़ों को बंद करा दिया,लोगों के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी । सारी गतिविधियों को लॉक करा दिया ।” रस्तोगी जी ने मेहरा जी से कहा । “भाई,यह सब बहुत ज़रूरी था । इससे कोरोना की बीमारी फैलने पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

सामयिक ग़ज़ल

जीवन घर तक ,पर सुखकर है । कितना प्यारा लगता दर है । अब विराम में भी गति लगती, हर्ष भरा यह आज सफ़र है । जीवन लगता एक ग़ज़ल-सा, खुशियों से लबरेज बहर है । शांत रहो,खामोश रहो सब, अंधकार के बाद सहर है । ऊंचा उड़ना नहीं रुकेगा, कायम मेरा हर इक पर […]