मुक्तक/दोहा

अनुशासन के दोहे

अनुशासन को मानकर,मानव बने महान । अनुशासन संकल्प है,जो लाता सम्मान।। अनुशासन है चेतना,अनुशासन उत्थान। अनुशासन को थामकर,जीना हो आसान।। अनुशासन संदेश है,अनुशासन शुभकर्म। अनुशासन है बंदगी,अनुशासन है धर्म।। अनुशासन है प्रेरणा,अनुशासन शुभगान। अनुशासन है सादगी,अनुशासन जयगान।। अनुशासन है साधना अनुशासन है ध्यान । अनुशासन है जागरण, ,मानव पाये शान ।। अनुशासन है दिव्यता,अनुशासन आवेश […]

लघुकथा

लघुकथा – इकतीस दिन का महीना

ह सुबह से ही मंदिर के अहाते में आकर बड़ी देर से बेहद उदास होकर बैठी थी ।लगता था कि वह भूखी भी है ।पुजारी जी ने उसे देखते ही पूछा-  “माई,लगता है आज इकतीख तारीख है ।” “हाँ,पंडित जी ।” “तो तू,उदास क्यों होती है,आज का दिन यहीं गुज़ार,और यहीं खाना खा ।” इतना […]

मुक्तक/दोहा

गाँव के दोहे

कितना मोहक,नेहमय, लगता प्यारा गाँव । हनमत-मंदिर सिद्ध है,बरगद की है छाँव।। रज़िया-राधा हैं सखी,मित्र राम-रहमान। सारे मिलकर पूजते,गीता और कुरान ।। जुम्मन-अलगू शेख हैं,बने अभी भी यार । संस्कार तो दे रहे,ख़ूब वहाँ उजियार।। ताल,तलैयां,बावड़ी,हैं अब भी आबाद। गाँवों में सद्भाव तो,अब भी ज़िदाबाद।। हमें हमारा गाँव नित,देता है अति प्यार। हमको वह प्यारा […]

गीत/नवगीत

सैनिक,फौज़ी,जवान,

ऐे सैनिक,फौज़ी,जवान, है तेरा नितअभिनंदन। अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन।। गर्मी,जाड़े,बारिश में भी,तू सच्चा सेनानी अपनी माटी की रक्षा को,तेरी अमर जवानी तेरी देशभक्ति लखकर के,माथे तेरे चंदन। अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन।। आँधी-तूफाँ खाते हैं भय,हरदम माथ झुकाते रिपु तो तुझको देख सिहरता,घुसपैठी थर्राते सीमाओं के प्रहरी तू तो,वीर शिवा का नंदन। […]

मुक्तक/दोहा

गीताज्ञान के मुक्तक

(1) मुझे गीता ने सिखलाया,जिऊँ मैं कैसे यह जीवन सुवासित कैसे कर पाऊँ,मैं अपनी देह और यह मन मैं चलकर कर्म के पथ पर,करूँ हर पल का नित वंदन, महकता मेरा गीता-ज्ञान से,जीवन औ’ घर-आँगन । (2) कर्म को मानकर पूजा,ही मन को तुम प्रबल रखना बनो तुम निष्कपट मानव,यही आदर्श फल चखना नहीं करना […]

गीत/नवगीत

नारी जीवन

शम्मा-सा जलता है पल-पल,और पिघलता नारी जीवन। देकर घर भर को उजियारा,आँखें मलता नारी जीवन ।। कर्म निभाती है वो तत्पर,हर मुश्किल से लड़ जाती गहन निराशा का मौसम हो,तो भी आगे बढ़ जाती पत्नी,माँ के रूप में सेवा,तो क्यों खलता नारी जीवन। देकर घर भर को उजियारा,आँखें मलता नारी जीवन।। संस्कार सब उससे चलते,धर्म […]

गीत/नवगीत

शिक्षक-वंदना

वंदन है,नित अभिनंदन है, हे शिक्षक जी तेरा । फूल बिछाये पथ में मेरे,सौंपा नया सबेरा ।। भटक रहा था भ्रम के पथ पर, राह दिखाई मुझको गहन तिमिर को परे हटाया, नमन् करूं मैं तुझको आशाओं के सावन में है अरमानों का डेरा । शीश झुकाऊं हे परमेश्वर,भाग्य मिरा यूं फेरा ।। मायूसी से […]

समाचार

निराला साहित्य समिति की ऑनलाइन गोष्ठी

मंडला-गत दिवस निराला साहित्य जन कल्याण समिति बरेली- म.प्र. के ऑनलाइन कवि-सम्मेलन का आयोजन  डॉ. लता “स्वरांजलि”(भोपाल) के संचालन में किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रो. शरद नारायण खरे (मंडला) ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा- तीज त्योहार हमारी आध्यात्मिक चेतना का ही अंश हैं, जो हमारी सामाजिक व सांस्कृतिक नींव सुदृढ़ करते हैं। […]

गीत/नवगीत

गीत – भारत मां के अभिनंदन में

भारत मां के अभिनंदन में,आओ हम जयगान करें । नित्य चुनौती का प्रत्युत्तर दे,रक्षित मां की आन करें ।। हमने रच डाली नव गाथा, लेकर खडग हाथ अपने नहीं हटाये बढ़े हुये पग, पूर्ण किये सारे सपने माटी को निज माथ लगाकर,आओ मंगलगान करें । नित्य चुनौती का प्रत्युत्तर दे,रक्षित मां की आन करें ।। […]

गीत/नवगीत

गीत

दिनकर ने शोले बरसाये,पर अब तो राहत है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है ।। ताल-तलैयां रीत गये थे नदियां भी थीं सूखी बुझा-बुझा मन रहता था और काया भी थी रूखी बारिश की बूंदों से पर अब,हर उर आनंदित है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है […]