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  • लघुकथा – फर्क़

    लघुकथा – फर्क़

    ” मेरे लिए एक अच्छा-सा लेडीज सूट दिखाओ ” लड़के ने दुकान में पहुंचकर कहा ! ” जी साब, दिखाता हूं ! दुकानदार ने स्मार्टनेस दिखाई ! कुछ देर बात वह  लड़का  अपने घर पहुंचा, और एकांत का...


  • समकालीन  कविताएँ

    समकालीन कविताएँ

    (1) क्षुधा ——- जो कभी भूखा न रहा वह क्या जाने ऐंठती आँतों का दर्द बंद होती आँखों का अंधेरा और क़दमों की लड़खड़ाहट …और वैसे भी वातानुकूलित में बैठकर क्षुधा का अर्थ नहीं समझा जा...

  • उजियारे का गीत

    उजियारे का गीत

    अँधियारे से लड़कर हमको,उजियारे को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीड़ा,ग़म है,व्यथा-वेदना, दर्द नित्य मुस्काता जो सच्चा है,जो अच्छा है, वह अब नित दुख पाता किंचित भी...

  • माता का देवत्व

    माता का देवत्व

    माता सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो मातु है,आन,बान औ’ शान !! माता तो है श्रेष्ठ नित...

  • सौन्दर्य के दोहे

    सौन्दर्य के दोहे

    दर्पण ने नग़मे रचे,महक उठा है रूप ! वन-उपवन को मिल रही,सचमुच मोहक धूप !! इठलाता यौवन फिरे,काया है भरपूर ! लगता नदिया में ‘शरद’,आया जैसे पूर !! उजियारा दिखने लगा,चकाचौंध है आंख ! मन-पंछी उड़ने...


  • स्वच्छता के दोहे

    स्वच्छता के दोहे

    बिखरी हो जब गंदगी, तब विकास अवरुध्द घट जाती संपन्नता, बरकत होती क्रुध्द वे मानुष तो मूर्ख हैं, करें शौच मैदान जो अंचल गंदा करें, पकड़ो उनके कान पाठक जी तो कर रहे, सचमुच पावन काम...

  • प्रणय गान

    प्रणय गान

    जीवन में वरदान प्रेम है,है उजली इक आशा ! अंतर्मन में नेह समाया,नही देह की भाषा !! लिये समर्पण,त्याग औ’ निष्ठा, भाव सुहाने प्रमुदित हैं प्रेम को जिसने पूजा,समझा, वह तो हर पल हर्षित है दमकेगा...

  • होली के दोहे

    होली के दोहे

    रंगों के सँग खेलती, एक नवल- सी आस। मन में पलने लग गया, फिर नेहिल विश्वास।। लगे गुलाबी ठंड पर, आतपमय जज़्बात। प्रिये-मिलन के काल में, यादें सारी रात।। कुंजन, क्यारिन खेलता, मोहक रूप बसंत। अनुरागी...