मुक्तक/दोहा

दोहे – शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के लिये,देता हूं संदेश । तुम हो तो हम हैं ‘शरद’,तुम हो तो यह देश।। पुलवामा के वीर तुम,रहो सदा आबाद। करे वतन सजदा सदा, तुम हो ज़िन्दाबाद।। क़ुरबानी बेकार ना,जायेगी यह सांच। शौर्य तुम्हारा है अमर,आयेगी नाआंच।। तुम सूरज,तुम चांद हो,तुम ठंडक, तुम ताप। तेज तुम्हारे संग जो,कौन सकेगा माप।। वतनपरस्ती का […]

गीत/नवगीत

सारस्वत-अभिवंदना

मातु शारदे,नमन् कर रहा, तेरा नित अभिनंदन है ! ज्ञान की देवी, हंसवाहिनी, तू माथे का चंदन है !! अक्षर जन्मा है तुझसे ही, तुझसे ही सुर बिखरे हैं वाणी तूने ही दी सबको, चेतन-जड़ सब निखरे हैं दो विवेक और नवल चेतना,तेरा तो अभिनंदन है ! ज्ञान की देवी,हंसवाहिनी,तू माथे का चंदन है !! […]

गीत/नवगीत

समकालीन गीत

रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं !! बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो अब शेष रही ना,बादल भी ठहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे वो,घाव बहुत गहरे हैं !! मायूसी है,बढ़ी […]

गीत/नवगीत

अभिनंदन

मस्तक पर खुशियों का चंदन करें कर्म औ’ श्रम का वंदन आशाओं को करें बलवती, कुंठाओं का रोकें क्रंदन आगत का नित है अभिनंदन । कटुताओं को याद करें ना आंसू बनकर और झरें ना मायूसी का घड़ा रखा जो, उसको हम अब और भरें ना करें वक्त का हम अभिवंदन आगत का नित है […]

मुक्तक/दोहा

घुटती साँसें

बिगड़ा है पर्यावरण,बढ़ता जाता ताप ! ज़हरीली सारी हवा,कैसा यह अभिशाप !! पेट्रोल,डीजल जले,बिजली जलती ख़ूब ! हरियाली नित रो रही,सूख गई सब दूब !! यंत्रों ने दूषित किया,मौसम और समाज ! हमने की है मूर्खता,हम ही भुगतें आज !! नगर घिर गये धुंध में,धूमिल सारे गांव ! धुंआ-धुंआ जीवन हुआ,गायब सारी छांव !! दिखती […]

गीत/नवगीत

चेतना का गीत

सकल दुखों को परे हटाकर हमको,अब तो सुख को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीर बढ़ रही,व्यथित हुआ मन, दर्द नित्य मुस्काता अपनाता जो सच्चाई को, वह तो नित दुख पाता किंचित भी ना शेष कलुषता,शुचिता को अब वरना होगा ! डगर भरी हो काँटों से […]

गीत/नवगीत

गीत

हिन्दी तेरी वाणी अमृत, हमको नित सरसाय सदियों से तेरी धारा में,सतत् देश मुस्काय हिन्दी तेरी——– तुझने ही तो धर्म को पाला,संस्कार को बोया तुझने ही तो हमें गती दी,और ज्ञान से धोया तूने ही तो हमें संवारा,हम मानव बन पाय हिन्दी तेरी—- हिन्दी तू तो देव की भाषा,कबिरा का है गायन तुलसी,मीरा,सूरदास का,तुझसे महका […]

इतिहास

अमर बलिदानी : शंकर शाह व रघुनाथ शाह (बलिदान दिवस १८ सितंबर पर विशेष)

इतिहास के पन्नों पर दर्ज़ अमर बलिदानों में गोंड राजाओं का बलिदान भी बहुत महत्व रखता है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन गोंडवाना (अब जबलपुर) साम्राज्य के राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह का बलिदान 18 सितम्बर, 1857 को हुआ था। 1857 के विद्रोह की ज्वाला सम्पूर्ण देश में धधक रही थी। असंख्य क्रांतिकारियों […]

मुक्तक/दोहा

चंद्रयान अभियान के संदर्भ में – हम होंगे कामयाब

किंचित नहीं पराजय अपनी,हम पहुंचे आकाश । जीतेंगे हम इक दिन पूरे,है मन में विश्वास ।। नहीं निराशा,केवल आशा,साहस का है साथ । हम तो मक़सद पा ही लेंगे,होगी मंज़िल हाथ ।। हम में दृढ़ता,मौलिकता है,आर्यभट्ट के लाल । कामयाब होना तो तय है,बस थोड़ा -सा काल ।। इसरो में सचमुच में दम है,देख रहा […]

मुक्तक/दोहा

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर शिक्षक-वंदना

शिक्षक तेरी वंदना,करता मैं दिन-रात । तुमने ही सौंपी मुझे,उजली यह सौगात ।। तुम से ही सद् सोच है,तुम से ही है ज्ञान । तुमने ही जीना दिया,जीने का सम्मान ।। शिक्षक तुम तो सूर्य हो,तुम में है अति ताप । तुम में है जो तेज वह,कौन सकेगा माप ।। शिक्षक तुम शीतल पवन,तुम हो […]