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  • दोहे – बेटियां

    दोहे – बेटियां

    बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे...


  • समसामयिक गीत

    समसामयिक गीत

    दिल छोटे,पर मक़ां हैं बड़े, सारे भाई न्यारे ! अपने तक सारे हैं सीमित,नहीं परस्पर प्यारे !! दद्दा-अम्मां हो गये बोझा, कौन रखे अब उनको टूटे छप्पर रात गुज़ारें परछी में हैं दिन को हर मुश्किल...


  • माता

    माता

    13 मई – – माँ दिवस पर माता सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे, अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो मातु है,...


  • लघुकथा – फर्क़

    लघुकथा – फर्क़

    ” मेरे लिए एक अच्छा-सा लेडीज सूट दिखाओ ” लड़के ने दुकान में पहुंचकर कहा ! ” जी साब, दिखाता हूं ! दुकानदार ने स्मार्टनेस दिखाई ! कुछ देर बात वह  लड़का  अपने घर पहुंचा, और एकांत का...


  • समकालीन  कविताएँ

    समकालीन कविताएँ

    (1) क्षुधा ——- जो कभी भूखा न रहा वह क्या जाने ऐंठती आँतों का दर्द बंद होती आँखों का अंधेरा और क़दमों की लड़खड़ाहट …और वैसे भी वातानुकूलित में बैठकर क्षुधा का अर्थ नहीं समझा जा...

  • उजियारे का गीत

    उजियारे का गीत

    अँधियारे से लड़कर हमको,उजियारे को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीड़ा,ग़म है,व्यथा-वेदना, दर्द नित्य मुस्काता जो सच्चा है,जो अच्छा है, वह अब नित दुख पाता किंचित भी...