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  • भारत माँ की शान बढ़ी

    भारत माँ की शान बढ़ी

    हुई विजय ना आज पराजय, भारत माँ की शान बढ़ी दोनो आँखें चमक उठी हैं, अधरों पर मुसकान बढ़ी। नव भारत का सृजन पर्व है, आओ मिलकर गान करें वंदन-अभिनंदन की भूमि को, मिलकर सभी सलाम...


  • मलय-हिमालय-विंध्य-सतपुड़ा

    मलय-हिमालय-विंध्य-सतपुड़ा

    मलय-हिमालय-विंध्य-सतपुड़ा अंबर धरा पे लाते हैं अरब-हिन्द-बंगाल के मोती, तेरे पग सहलाते हैं जय भारती! हे भारत माँ! हम तेरे ही गुन गाते हैं। आज शहीदों के सपनों को, सच करके दिखलाएँगे माता की चुनर सजाने...

  • प्यार का गीत

    प्यार का गीत

    नहीं कोई सुंदर है तुझ-सा ज़मी पर फलक पर,इधर पर,उधर पर,कहीं पर। कहाँ चाँद ने रूप तुझ-सा है पाया कभी घटता जाए कभी बढ़ता आया कहाँ मेघों में तेरी आँखों-सा काजल हवा भी ना झूमे तेरा...

  • छोड़िए लकीर पीटना

    छोड़िए लकीर पीटना

    कल आसिफा थी। आज ट्विंकल है। आनेवाले दिनों में सिमरन, जूली ….ऐसी कोई भी दूधमुँही हो सकती है। इन पीड़िताओं को किसी धर्म के साँचे में कैद नहीं किया जा सकता। और न ही उन पर...

  • व्यंग्य – पुण्य कमाने का सुख

    व्यंग्य – पुण्य कमाने का सुख

    धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष को मानव जीवन के चार लक्ष्य माना गया है। मोक्ष प्राप्ति की कामना एक भारतीय के मन में तब जागती है जब वह सत्तर पार कर लेता है और औलादें उसका ध्यान नहीं रखतीं। वरना...

  • व्यंग्य – गाली : एक सांस्कृतिक संपति

    व्यंग्य – गाली : एक सांस्कृतिक संपति

    गालियाँ हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यह ऐसी देव विद्या है जिसे जिज्ञासु, बिना किसी गुरुकुल, विद्यालय-विश्वविद्यालय में गए आत्म-प्रेरणा से सीख लेता है, और लेनेवाला ‘खाता’है। हमारे देश में तो कहावत भी है-‘तोरी गारी, मोरे कान...


  • चुनाव की आँधी

    चुनाव की आँधी

    लोकतंत्र की धज्जी उड़ गयी, इस चुनाव की आँधी में शोर ‘चोर का’ चोर मचाए, इस चुनाव की आँधी में। नेताओं ने इतना थूका, इक-दूजे के दामन पर देश धँसा दलदल में अब तो, इस चुनाव...

  • व्यंग्य – थूक का दलदल

    व्यंग्य – थूक का दलदल

    भयंकर गरमी के बाद भी देश में कीचड़ हो गया है जिसके उन्नीस मई तक दलदल बन जाने की पूरी संभावना है क्योंकि हर दल का नेता दूसरे दल के नेता पर थूक रहा है। देश...