गीत/नवगीत

गीत – हिन्दी के लिए”

भारत माँ के भाल की बिन्दी,हिन्दी की पहचान रे!बिन हिन्दी के सूना लागे,मेरा हिन्दुस्तान रे, मेरा हिन्दुस्तान। सूर-मीरा-रसखान का कान्हा,नैन नीर बहाता,कैसे कर जशोदा के धरता,कैसे माखन खाता?पुनीत संस्कृति बिन तुलसी के,झुलस-झुलस रह जाती,जनकसुता जब अपने मुख सेराम का नाम बताती,हिन्दी में. रहमान का अल्लाह,हिन्दू का भगवान रे!बिन हिन्दी के सूना लागे… मंदिर-मसजिद के रखवालो,मस्त […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – सुपर स्टार : मौत

पिछले आठ-दस महीनों से यमराज का नृत्य प्रेम अचानक बढ़ गया है। अब वे फुफकारते हुए भैंसे पर बैठकर नंगा नाच नहीं करते। चुपके से आते हैं। नये रूप में। सूक्ष्म नहीं, अतिसूक्ष्म वाहन पर। कुछ दिनों चीन में ड्रैगन, लॉयन,उइगुर,यांगे और मियाओ डांस करने के बाद वे बोर हो गये। फिर अदृश्य होकर इटली, […]

गीत/नवगीत

शिक्षक-धर्म

मैं बाँहों में सृजन, कलम में प्रलय सजाया करता हूँबुझते मन में दीप, दिलों में आग जलाया करता हूँ।कितने अनगढ़ पत्थर मेरे, इन हाथों ने तारे हैं राम-जॉन-करतार-मोहम्मद, मुझको जाँ से प्यारे हैंहूँ पत्थर नीवों का लेकिन, मैं शिखरों की शान सखे! शिलालेख इतिहासों का पर, मैं कल की पहचान सखे! शिखा बाँधकर सम्राटों का, […]

गीत/नवगीत

अपना-अपना धर्म

तुम अपना धर्म निभाओ, मैं अपना धरम निभाऊँदेवों के चरण पखारो तुम, मैं मानव पर मिट जाऊँ। जब शूल भेदते पग तो, आँखें नम हो जाती हैं पीड़ा उठती अंतर में, लेकिन वाणी गाती हैजिनने सींचा सब देकर, कैसे उनको बिसराऊँ? तुम अपना धर्म निभाओ, मैं अपना धरम निभाऊँ जब घर में आग लगी हो, […]

गीत/नवगीत

शहीदों को नमन

कर रहे हैं नमन उन शहीदों को हम जो समर मे अमर हो गये थे कभी हम रहें न रहें तुम रहो ना रहो पर नहीं नाम इनका मिटेगा कभी / कर रहे… गव॔ से सिर सदा हम उठा कर चलें इसलिए फूँक घर अपना ये जल गये व॔श का दीप इनके जलेगा नहीं जानकर […]

गीत/नवगीत

अब ब्रह्मास्त्र उठाओ

सुलग उठा फिर आज हिमालय, सुलग उठी फिर घाटी है सुलग रहा है बच्चा-बच्चा, आग उगलती माटी है दगाबाजियों ने फिर अपना , छुरा पीठ में घोंपा हैईंट, ईंट से आज बजा दो , बड़ा सुनहला मौका है ये विषधर जब करवट लेगा, ऐसे ही फुफकारेगा फन कुचलो इसका वरना, हर बार ये हमको मारेगा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : नाजायज़ औलाद

इन दिनों मुझे हर व्यक्ति में कोरोना दिखता है। लगता है कोरोना ब्रह्म है जिसका वास हर जीव में है। चीनी कोरोनामय सब जग जानी। इसके सम्मान मे लोग गले नहीं मिलते। हाथ नहीं मिलाते। करत प्रनाम जोरि जुग पानी। अजीब रहस्यवाद है भाई। न ब्रह्म जीव से मिलने को व्याकुल है ना जीव ब्रह्म […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – भेद बढ़ाते मंदिर-मस्जिद, प्रीत बढ़ाती मधुशाला

आज मुझे उन लोगों पर तरस आ रहा है जो मेरे मद्यपान से रुष्ठ रहते थे। मूर्ख कहीं के। वे राष्ट्र के प्रति मेरी सत्यनिष्ठा और भक्ति को नहीं समझ सके। उन्हें अब समझ में आ रहा होगा कि एक सैनिक युद्ध में सीने पर गोली झेलकर जो अपना कर्तव्य निभाता था, वही योगदान मेरी […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : थूक-जादे

उनकी गिनती संसार के शूर-वीर जंतुओं की प्रजाति में होती थी। सड़क पर पुलिस के सामने चौराहे के यातायात सिग्नल को तोड़ कर वे ऐसे निकल भागते थे कि अभिमन्यु इस पराक्रम को देखकर दाँतों तले अँगुली दबा लेता और कभी चक्रव्यूह में नहीं फँसता। उन्हें किसी कीटाणु से डर नहीं लगता था। सब कीटाणु […]

गीत/नवगीत

दानवता का नाच!

दानवता का नाच देखिए,आस्तीन में साँप देखिएअपनो का सिर काटनेवाले,जिंदा जिन्न-पिशाच देखिए। ये मजहब की बाँध के पट्टी,आँखों कोअंधा करते हैंनफ़रत का कूड़ा फैलाकर, दुनिया को गंदा करते हैं नंगे होकर घूम रहे है, बिटियों के अब बाप देखिएदानवता का नाच देखिए,आस्तीन में साँप देखिए।1। वक़्त पड़ा है गुलशन पर तो,ये कोई भी काम न […]