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  • गीत – नीली खाल

    गीत – नीली खाल

    रंग बदलते चेहरे देखे, और बदलती देखी चाल नाखूनों में लहू लगा है, पर सबकी नीली है खाल। कहीं गरीबी की बिसात पर, प्यादे दौड़ लगाते हैं राष्ट्रवाद की बलिवेदी पर, शेर कहीं कट जाते हैं...

  • गीत – शर्वरी! धीरे चलो!

    गीत – शर्वरी! धीरे चलो!

    कल्पना कुछ ऐसी है- देर रात थक कर लौटे पति को पत्नी नहीं चाहती कि वह जल्दी उठे ऐसे में वह ‘तारों भरी रात(शर्वरी)’से जल्दी ना ढलने का निवेदन कर रही है- शर्वरी! धीरे चलो कि...

  • व्यंग्य – शुरुवात मुझसे

    व्यंग्य – शुरुवात मुझसे

    मैंने हाईस्कूल में पढ़ा था कि भारत मानसूनी जलवायु का देश है। गलत है। मैं सुधारता हूँ- भारत चुनावी जलवायु का देश है। मानसून कभी-कभी रूठ जाता है। भटक जाता है। चुनाव कभी नहीं रूठते। हर...

  • नया महाभारत

    नया महाभारत

    अर्जुन और शिखंडी में मन, भेद नहीं कर पाता है राजनीति के हाट में बगुला, भगत बना मुसकाता है शब्द बाण के आघातों से, भीष्म तड़पते शैय्या पर चक्रव्यूह के द्वार के बाहर, अभिमन्यु मर जाता...

  • चक्रव्यूह

    चक्रव्यूह

    विजयी होकर भी अभिमन्यु शकुनि की चालों से हारा। चक्रव्यूह तोड़ा दुश्मन का पर अपनों में फँसा बेचारा! धृतराष्ट्रों की सेना पूछे- कहाँ गए आँखों के तारे? ज़रा बताओ हमको गिन-गिन, तुमने कितने सारे मारे? एक...

  • हींग लगे न फिटकरी

    हींग लगे न फिटकरी

    पाकिस्तानियों ! इमरान ख़ान को गालियाँ मत दो। हिन्दी में कहावत है-“हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा आए” अर्थात् बिना कोई प्रयास के काम संपन्न हो गया। बेचारा पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के कारण आतंकवादियों...

  • भक्त-चम्मच-युद्ध (व्यंग्य)

    भक्त-चम्मच-युद्ध (व्यंग्य)

    इन दिनों देश में ‘भक्त-चम्मच- युद्ध’ छिड़ा हुआ है। भक्त अपने को सर्वश्रेष्ठ ‘भक्त-राज ‘सिद्ध करना चाह रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ चमचों ने कमर कस ली हैं वे ही ‘चम्मच-शिरोमणि’ के पद को सुशोभित...

  • है तुम्हें नमन ओ वीर!

    है तुम्हें नमन ओ वीर!

    है तुम्हें नमन ओ वीर धरा के जाओ तुम परदेस आँखों में आँसू भर-भर के विदा करे ये देश। गाएगी केसर की वादी हरदम तेरी कहानी जहाँ गिरा है लहू तुम्हारा होगी वही निशानी नहीं जाएगी...

  • एक युद्ध-गीत

    एक युद्ध-गीत

    रोको ना रणभेरी के स्वर, एक बार बज जाने दो होता है गर आज युद्ध तो, एक बार हो जाने दो। सहना अच्छी बात है पर, सहने की सीमा होती है हद से ज़्यादा सहना भी,...

  • अंगार सुनाता हूँ!!

    अंगार सुनाता हूँ!!

    मैंने भी श्यामल ज़ुल्फों में, अपनी शाम गुजारी है मैंने भी रस भरे लबों पर, अपनी ग़ज़लें वारी हैं मैं भी तो गोदी में रखकर, सिर को अपने सोया हूँ झीलों-से गहरे नैनों में, मीठी नींदें...