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  • दीपक का अहंकार

    दीपक का अहंकार

    अकड़ दीप की देख के मैंने, प्रश्न एक जब उससे पूछा- “किस कारण तू झूम रहा है, किए हुए सिर अपना ऊँचा?” मस्त पावन के झोंकों के संग, उसने अपना अंतस खोला कुछ मुसकाया, कुछ इठलाया,...

  • हास्य व्यंग्य : मैं विदेशी नहीं

    हास्य व्यंग्य : मैं विदेशी नहीं

    एक शिक्षक होने के नाते कहता हूँ कि मुझे अपने प्रजातांत्रिक देश की शिक्षाप्रणाली का वह अंग सबसे अधिक पसंद आता है जब विद्यार्थियों को हाईस्कूल की परीक्षा में निबंध लिखने दिया जाता था-‘यदि मैं प्रधानमंत्री...



  • बूचड़खाना (व्यंग्य)

    बूचड़खाना (व्यंग्य)

    गाय, एक पालतु प्राणी है। इसका उपयोग भारत में समय-समय पर हिन्दू और ‘मुसलमान के बीच दंगे करवाने के लिए होता आया है। कट्टर हिन्दू, गाय को अपनी माता मानते हैं। उसकी पूजा-अर्चना करते हैं, उसे...

  • शुभ स्वागतम् प्रधानमंत्री जी!

    शुभ स्वागतम् प्रधानमंत्री जी!

    आइए प्रधानमंत्री जी! आपका स्वागत है। शुभस्वागतम्!! आज आपका आगमन मेरे शहर की सड़कों का चित्र और चरित्र बदलने जा रहा है। किसी कुरूप गणिका की तरह उत्छृंखल- सी दिखनेवाली ये सड़कें, आज किसी पतिव्रता की...

  • अच्छे दिन कब आएँगे?

    अच्छे दिन कब आएँगे?

    भारत माँ को लूट रहे थे, जो सत्ता के हाथों सेनोंच रहे थे खूनी पंजों, काट रहे थे दाँतों सेकामचोर-कमज़र्फ-कमीने, जो रूपयों में बिकते थेजिनको अपने दाम न के ना, दाग कभी-भी दिखता थेकर्तव्यों को भुला...

  • कबीर के साथ एक सुबह

    कबीर के साथ एक सुबह

    पुराण कहते हैं कि काशी गये बिना मुक्ति नहीं मिलती। किसे पता कि मरने के बाद बेटा अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित करता है या समय और धन के अभाव में बगल में बहनेवाली नाग नदी को...

  • वेलेण्टाइन-डे से बर्थ-डे तक

    वेलेण्टाइन-डे से बर्थ-डे तक

    कबीर बाबा बड़े दूरदर्शी थे। वे जानते थे कि आनेवाले ज़माने में भारत वर्ष का यौवन कुछ करे या करे, प्रेम अवश्य करेगा। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में ‘प्यार’ का कारोबार खूब फलेगा, फूलेगा, फैलेगा और...