Author :


  • मां फिर भी मां

    मां फिर भी मां

    बचपन कंगाली में बीता। विवाह हुआ। सब कुछ ठीक तीन छोटे छोटे बच्चों  को छोड़कर पति चल बसा। जैसे तैसे मेहनत मजदूरी  कर बच्चों को पाला। समाज के ताने सुने। मेहनत रंग लाई।बच्चे कामयाब हुए। एक...

  • अन्नदाता

    अन्नदाता

    अन्नदाता          देश के अन्नदाता की आंखों को सुख देने वाली फसल और खेत में जब मुस्करायी सरसों इठलाने लगी अलसी आम बौराये गये कि – बैण्ड बाजे के साथ बादल आ गए बारात घरों सी...

  • राजनीति

    राजनीति

    कल के मौसम आज के मौसम में अन्तर है और कल भी होगा जब मांगने वाले की देने वाले की परिभाषा बदल जायेगी नीति और नियत भी यही चुनाव है या कहूं राजनीति। — शशांक मिश्र...

  • सच की होली और उसकी सार्थकता

    सच की होली और उसकी सार्थकता

    सच की होली और उसकी सार्थकता         शरद ऋतु समाप्त हुई।बसन्त ऋतु आ गई।यानी कि अब होली आ गई।चारों ओर का वातावरण त्यौहार का बन गया।गले मिलेंगे।पुराने वैर भाव भुलाएंगे।भाईचारा बनायेंगे।सभी के प्रति समान और सम्मान...


  • मां जयतु वीणा धारिणी

    मां जयतु वीणा धारिणी

    मां जयतु वीणा धारिणी मां सरस्वती वीणा वादिनी जयतु हे मां हंस विराजनी, जय हो शारदे ज्ञानदायिनी मां पद्म हंस की विराजनी मां सरस्वती——–। ऋद्धि-सिद्धि दायिनी मां विवेक शून्य विनाशिनी देवि! सुखद हास देती हृदय में...