कविता पद्य साहित्य

वंदन अभिनंदन कर लूं

आशुकवि नीरज अवस्थी श्रृद्धेय खमरिया पण्डित की पहचान थे अपने कृतित्व व्यक्तित्व चिन्तन से जनपद में साहित्य की शान थे। कवि समीक्षक और संपादक सहज सरल स्वभाव के धनी थे अल्पायु में साहित्याकाश स्पर्श रत्न आभूषणों में मानो मणी थे। काव्य रंगोली के संस्थापक आयोजनों से सबको जोड़े थे जब विस्मृतियां हो रही हावी तन […]

कविता पद्य साहित्य

सामंजस्य की ओर

सृष्टा से आदि उसी से अन्त कभी यात्रा अनंत की, शाश्वत सत्य कि वक्त हमेशा बदलता रहेगा। जिस पत्थर को आज हम देखते हैं वह कल वहां न होगा किस रूप स्थान मान-अपमान से होगा कदाचित कह पाता, यही तो है भौतिकता से सांस्कृतिकता  की यात्रा उगते सूर्य से डूबने की ओर बचपन में सपनों […]

लघुकथा

आज जहां हिमालय है

कैलाश ने अपनी बेटी का विवाह बड़ी धूमधाम से किया।दहेज का आदर्श प्रस्तुत कर दिया।कुछ भी लेन-देन नहीं,समाज व क्षेत्र में अच्छी पहचान बना ली।उसके बाद सैंकड़ो आदर्श विवाह करा दिए। अब इकलौते बेटे का विवाह था,लड़की वाले बडा नाम व आदर्श सुनकर आए।कैलाश मुंह से न बोले पर एक लम्बी चौडी सूची पकडा दी,जिसको […]

कविता पद्य साहित्य

समय परिस्थित उधम सिंह बनाती

कम्बोज सिक्ख परिवार में जन्म लेकर शेरसिंह नाम है पाया अपने कर्म धर्म और सर्वस्व समर्पण से गौरव शहीद का कमाया, वैशाखीपर्व को जलियांवाला के कत्लेआम ने जीवन को बदला ओडायर को मारने में भले इक्कीस साल  लगे, इंग्लैंड जाकर किया। सुनाम गांव संगरूर  की पवित्र माटी उधम सिंह सा लाल मिला पिता टहेल सिंह […]

कविता पद्य साहित्य

देश धर्म सर्वोच्च जीवन से

सम्पूर्ण भारत बडा दिन जिसे कहे दो -दो भारतरत्न का जन्मदिन है, महामना मालवीय अटल बिहारी व्यक्तित्वों का पवित्रस्मरण दिन है, अटल ने राजनीति में योगदान किया है मालवीय काशीविद्यालय साकार किया है, अटल पटुवक्ता ओजस्वी भाषणों से छाए मालवीय ने जीवनधर्म संस्कृतहित जिया है। संपादक पत्रकार दोनों आत्मत्यागी थे कर्म ही उनका जीवन माना […]

कविता

युग पुरुष का वंदन है

गांधी  जयन्ती पर स्मरण स्वंय में  एक  वंदन है, सत्य अहिंसा के बल गौरव मधुस्पर्श  अभिनंदन है। अंगेजों से असहयोग बार बार आंदोलन , जेल यात्राएं ताड़ना महके सो  चंदन  है। आजादी का अहसास आत्मसात का प्रयास, क्षणिक न अशान्ति बिखरे न क्रन्दन है। आत्मबल से पाना चिंता से चिन्तन, दैनिक प्रार्थना सभा जनकल्याण मंथन […]

इतिहास

देश के स्वतंत्रता संग्राम में मेरे गांव की भूमिका

शहीदों की नगरी शाहजहांपुर कभी किसी क्षेत्र में पीछे नहीं रहा।समय-समय पर अनेक प्रतिभाओं में से बहुमुखी प्रतिभा के धनी]साहसी]वीर व कर्मठ व्यक्तित्व पं- हरिप्रसाद मिश्र सत्यप्रेमी की जन्म भूमि पुवायां की धरती रही है।1956-57 के आसपास स्वर्गवासी हुए सत्यप्रेमी जी का मूल निवास स्थान पुवायां से शाहजहांपुर मार्ग पर स्थित बड़ागाँव था।बचपन से लेकर […]

कविता पद्य साहित्य

बादल बरसने लगे

सावन की आहट हो कि बादल आ गए गड़गड़ाहट के साथ चमकने लगी बिजली चौंधियां गईं अंखियां उमड़ उमड़ करके बरसने लगे, बादल बरसने लगे। देर से आए जो कहीं घूम आए वो काम का बोझ बढ़ा शिकायत न किसी को आरक्षण न कहीं पर ओवर टाइम सा मेघ रिमझिम करने लगे, बादल बरसने लगे। […]

पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

पाक अभी भी नापाक है

मुक्तक एक वीर भूमि की सीमा फिर से है जाग उठी, लहू युद्धभूमि में रणबांकुरों से मांग उठी। पैशाचिक ताण्डव जो नित्य पाक करता है उसे फूंक देने को युवकों में आग उठी।। दो सीमा पर क्या इसी भांति हम अपना रक्त बहायेंगे, शान्त बने रणवीरों के शव कब तक गिनते जायेंगे समय कह रहा […]

लेख स्वास्थ्य

भारत में योग की परम्परा और भविष्य

भारत में योग की अवधारणा भारतीय परम्पराओं संस्कृति सभ्यता और प्रचलित मान्यताओं के परिप्रेक्ष्य में सृष्टि के आरम्भ के साथ ही सृष्टि के आदि पुरुष आदि योगी भगवान शिव से योग का आरम्भ होता है।उसके बाद सप्तर्षि आदियोगी से मिले इस ज्ञान को संसार में फैलाते हैं।इसी के साथ आदि ग्रन्थ ऋग्वेद योग का सर्वप्रथम […]