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  • खिलौना

    खिलौना

    गांव की माटी वाली का खर्च चल ही जाता है रोज कनस्तर भर कर माटी बेचने से पर- वारिश के न रुकने से एक दिन उसकी रसोई में जब बचा एक मुट्ठी आटा उससे- रोटी न...

  • दीवाली गजल

    दीवाली गजल

    दीप दीपावली का हमने है जलाया, क्या विश्वास का दीपक भी जला पाएंगे, समय ने जिनके चेहरे पे उदासी ला दी क्या मुस्कराना उनको हम सिखा पाएंगे, सभी ने जलाया हमने भी जगमगाया क्या मन की...

  • नवरात्रि के हाइकु

    नवरात्रि के हाइकु

    नवरात्रि के हाइकु   01 दक्ष नाशिनी बहुवर्णी देवि मां भव मोचनी। 02 ऐन्द्री कौमारी वाराही माहेश्वरी विशाला ग्राही। 03 मां उत्कर्षिणी चण्डमुण्ड मारिणी सर्वास्त्रधरिणी। 04 शंकर वरी कुमारी कन्या शैवा ज्वालदंशिनी। 05 रौद्र रूप हो...


  • पांच क्षणिकाएं

    पांच क्षणिकाएं

    01- वे- राष्ट्र भाषा के सच्चे प्रचारक हैं इसीलिए अपने बच्चों को कान्वेंट से लेकर आ रहे हैं। 02- उनका प्रतिपल साया सा साथ रहा इसीलिए हिन्दी के प्रचार -प्रसार में कागजों तक हाथ रहा। 03-...

  • कुछ हाइकु

    कुछ हाइकु

    कुछ हाइकु 01 – पाक हंसता अपनों की वृद्धि से पराये घर। 02- आजादी पर्व जुड़कर जन्मते हमको गर्व। 03- तिगड़मबाज शत्रु को रिझाते कल या आज। 04 – भारत देश कुछ से है अजूबा गीदड़ी...


  • सावन है आया

    सावन है आया

    सावन है आया बम बम भोले कोई शिव बोले सावन है आया, सिर पे जटा है चंदा की छटा है गंगा को समाया, शिव की शक्ति है मन में भक्ति है सावन जो लाया, हे ओंकारेश्वर...