लेख सामाजिक

अधिगम सम्बन्धी समस्यायें और उनका समाधान

अधिगम सम्बन्धी समस्यायें और उनका समाधान                    [ बदलते परिवेश निरन्तर नये- नये परिवर्तनों घर-परिवार एवं विद्यालय के दृष्टिकोण में नूतन आयामों के स्पर्श से और भी समस्याओं के रूप हो सकते हैं। बालक से सम्बन्धित समस्यायें कोई भी हों उनके समाधान हेतु विद्यालय एवं माता-पिता के आपसी सहयोग से सफलता पायी जा सकती है।] […]

कविता पद्य साहित्य

वायरस कोरोना आया है

हम सबको बतलायें कैसे कोरोना कहां से आया है चीन देश में जन्म हुआ है यात्रा ने विश्व में पहुंचाया है। आमजन तक सब त्रस्त है जुकाम खांसी बन छाया है सौ से अधिक देश जूझते आतंकी सा कहर ढाया है। मेले ठेले दुकानें पार्क बन्द हर सांस में डर समाया है कोई छुपा कोई […]

पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

दो मुक्तक

दो मुक्तक एक होली में सालों से रंगों में रंग मिलते हैं सालों के टूटे रिश्ते होली में खिलते हैं। मिलन पर्व यह घृणा में प्रेम भर देता आश्चर्य हो गया जो विधायक मिलते है।। दो होली में छोरी अब छोरी न रह गई बदलाव हुआ गोरी गोरी न रह गई। कहने सुनने मनाने के […]

पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

होली के पांच मुक्तक

होली के पांच मुक्तक 1- होली के रंग मिले जब हृदय खिलने लगे फाग का छिड़ा राग बाल युवा मचलने लगे। विविध रंगों से सजा मिलन पर्व ज्यों आया मस्ती से झूंम-झूंम कर होलियारे निकलने लगे।। 02ः- आया बसन्त फूल खिल गए होली का त्यौहार आया है मधुर तान मिलन की छिड़ती लगो गले ब्यौहार […]

कथा साहित्य लघुकथा

विरोध के लिए विरोध

विरोध के लिए विरोध   पिछले दो माह से प्रदर्शन बन्द हड़ताल धरना से राजधानी का जन जीवन अस्तव्यस्त रहा।लोग परेशान तो हुए ही।बीमार अस्पताल और बच्चे स्कूलों को नहीं जासके। सूचना समाचार की बात करें तो कुछ ही पहुंच रहे हैं।कुछ के साथ तो जाने पर मारपीट हो जाती है।उनके कैमरे तोड़ दिये जाते […]

पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

तीन मुक्तक

तीन मुक्तक एक गणतंत्र दिवस राजपथ पर पृथ्वी अर्जुन ब्रह्मोस आदि दिखलाते हैं देश की आत्मा पर हो रहे हमलों में प्रयोग इनका क्या कर पाते हैं। जब तक यह मेला उत्सव का शव सैनिकों के हम गिनते हैं जा रहे घातक से घातक हथियार क्या जब सबक न शत्रु को सिखलाते हैं।।   दो […]

कविता पद्य साहित्य

बेटी

बेटी बेटी हूं नादान नहीं हूं पल जाऊंगी बढ़जाऊंगी मैं भी हूं इंसान ही तुमसा कोई शैतान हैवान नहीं हूं। मत जांचों मत परखों मुझको कोई बिकाऊ सामान नहीं हूं बेटी बहन पत्नी और मां हूं सदा से पालनहार रही हूं। मैं वत्सला केवल सुमाता बच जाती हूं बढ़ जाती हूं बोझ किसी पर न […]

पुस्तक समीक्षा

पत्र तुम्हारे लिए : लुप्त प्राय विधा के लिए एक सशक्त प्रयास

आकर्षक आवरण वह भी विषयवस्तु के अनुसार पत्र तुम्हारे लिए पुस्तक मेरे समक्ष है ।साहित्य जगत उसमें समाज के सन्देश के आदान प्रदान वाली कभी लोकप्रिय रहने वाली विधा जोकि आज लुप्तप्राय है पत्र साहित्य  पर केन्द्रित इस कृति का संपादन डा. विमला भंडारी जी ने किया है।कभी दूर देश से आने वाले पत्रों की […]

कविता

खिलौना

गांव की माटी वाली का खर्च चल ही जाता है रोज कनस्तर भर कर माटी बेचने से पर- वारिश के न रुकने से एक दिन उसकी रसोई में जब बचा एक मुट्ठी आटा उससे- रोटी न बन पाती होता भी भला किसका उस आधी – अधूरी सी रोटी से। उधर भूख से विलख रहा रहा […]

गीतिका/ग़ज़ल

दीवाली गजल

दीप दीपावली का हमने है जलाया, क्या विश्वास का दीपक भी जला पाएंगे, समय ने जिनके चेहरे पे उदासी ला दी क्या मुस्कराना उनको हम सिखा पाएंगे, सभी ने जलाया हमने भी जगमगाया क्या मन की कटुता भी मिटा पाएंगे, पतंगे का अर्पण देखा हमने दीप पर उससे भी सीख हम कुछ ले पाएंगे, कहते […]