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  • स्वाभिमान

    स्वाभिमान

    स्वाभिमान शशांक मिश्र भारती         आज जिधर देखो राजनीति और राजनेता दोनों का स्तर ऐसे गिर रहा है जैसाकि किसान की फसल आने पर बाजार का भाव।स्वाभिमान की तो बात ही छोड़ दीजिए।         एक शास्त्री...

  • मनुष्यों की श्रेणी

    मनुष्यों की श्रेणी

    मनुष्यों की श्रेणी           एक दिन रामकृष्ण परमहंस शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक नदी के तट पर पहुंचे।वहां कुछ मछुए जाल फेंककर मछलियां पकड़ रहे थे।एक मछुए के समीप जाकर स्वामी जी खड़े हो...




  • लाइन

    लाइन

    लाइन कल उत्तम प्रदेश में जो खटिया लाये थे अब किसान यात्रा लायेंगे एक परिवर्तन यात्रा पर हैं दूसरे रथ लेकर पारिवारिक वरतन यात्रा निकाल रहे हैं बचे हुए साब फिलहाल हाथी को हजार पांच सौ...

  • बुरा करो किसने समझाया

    बुरा करो किसने समझाया

    एक बार जंगल में स्थित झरबेरी बड़ी मगन थी देवदार भी खड़ा प्रेम से उसको जीवन से लगन थी झरबेरी करती  झर-झर देवदार सायं-सायं करता एक में कांटों का साम्राज्य दूसरे से सौन्दर्य था झरता सौन्दर्यशाली...

  • गड़रिया और सिंह

    गड़रिया और सिंह

    शीघ्र प्रकाश्य पद्यकथा कृति बिना विचारे का फल से प्रकाशन हेतु गड़रिया और सिंह नदी किनारे हरा- भरा जंगल एक स्थित था अनेक पशु-पक्षी वहां थे रोज जंगल में मंगल था   सारी दुनिया उपकार की...

  • अटल जी पर

    अटल जी पर

    अपनी गरिमा अपने ही सिद्धांतों से, अटल थे अटल हैं और अटल रहेंगे। सशरीर भले न हो साथ हम सबके- सभी के दिलों में सदा अमर वो रहेंगे।।   परिचय - शशांक मिश्र भारती नामः-शशांक मिश्र...