अन्य संस्मरण

राजनैतिक पराकाष्ठा व सूझबूझ के प्रतीक अटल जी

राजनैतिक पराकाष्ठा व सूझबूझ के प्रतीक अटल जी                 एक प्रखर वक्ता चिन्तक पत्रकार कवि के साथ-साथ देश के विरोधी दल के लम्बे समय तक ख्यातिलब्ध राजनेता  श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का चला जाना भारत के लिए भारत की स्वस्थ राजनीति के लिए भारतीय साहित्य उसमें कविता की प्रखरता प्रभावोत्पादकता के लिए बहुत बड़ी […]

विज्ञान

क्यों बन जाते हैं बच्चे जिद्दी

सामान्यतः हम अपने आस-पास के अभिभावकों को कहते सेनते हैं कि मेरा बच्चा जिद्दी हो गया है। बहुत जिद करता है। किसी चीज के लिए अड़ जाता है तो बिना लिए मानता ही नहीं है। क्यों बन जाते हैं बच्चे जिद्दी क्या कारण हैं कोमल मस्तिष्क वाले सुकुमार बालक जिद क्यों करने लगते हैं।इन सभी […]

बाल साहित्य बालोपयोगी लेख

क्यों होते हैं बच्चे निराश !

लेखक की बालमनोविज्ञान परक कृति क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ से. क्यों होते हैं बच्चे निराश ! सामान्यतः माता-पिता और अध्यापकों को कहते सुना व देखा जाता है कि अमुक बच्चा कमजोर है। उसे कुछ नहीं आता सुस्त रहता है।अकेले गुमसुम बैठा रहता है जबकि वास्तविकता यह होती है कि बालक विभिन्न शरीरिक मानसिक कारणों […]

बाल कविता बाल साहित्य

गेहूं से रोटी तक

गेहूं से रोटी तक दो पाटों के बीच से निकला मैं जब से गेहूं नाम छोड़ा है आटा बना तब से निकल ही पाया कि चलनी में गया डाला कुछ सोचूं बाहर की पानी मुझमें मिलाया थप्पड़- घूंसे अनेक पटा- बेलन ने सताया उठा के पटका तबे पर अंगारों पर सुलाया इधर-उधर घुमाकर गरम चिमटा […]

बाल कविता बाल साहित्य

बड़ा या छोटा सा पेड़

बड़ा या छोटा सा पेड़ अपने घर एक लगाओ सभी प्यार से पेड़ कम अधिक जगह देखकर छोटा या बड़ा सा पेड़। किन्तु सभी के घर में एक अवश्य ही पेड़ यह हमारे जीवन दाता हैं ग्रीष्म-लू के त्राता हैं गरमी से राहत देकर खुशहाली के भ्राता हैं धरा पे हरियाली लाकर उसमें नमी बढ़ाते […]

बाल कविता बाल साहित्य

विश्वगौरैया दिवस पर

छोटी सी चिड़िया का घर मेरे आंगन नीम के ऊपर छोटी सी चिड़िया का सुन्दर घर तिनका-तिनका से है सजाया सजा-संवारकर है बनाया। उसने उसमें अण्डे दे डाले प्रेम पूर्वक उनको पाले, नहीं उसे है जाड़े का डर छोटी सी चिड़िया का सुन्दर घर। हरदम खुश रहती है चिड़िया मन में फूटती हैं फुल झड़ियां, […]

लघुकथा

निर्णय

एक दिन की बात है। घृणा और प्रेम में बहस छिड़ गई। बड़ा कौन है तू या मैं घृणा ने अपना घृणित रूप दिखलाया। जमकर कोसा। गालियां बकीं। प्रत्युत्तर में प्रेम मात्र मुस्कराता रहा। अन्ततः घृणा ने प्रेम का महत्व स्वीकार कर अपनी हार मान ली। निर्णय हो चुका था।

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

होली पर हाइकु

होली पर हाइकु 01ः- रंग होली का जब धोये कटुता सार्थक हो। 02ः- होली के रंग अपनत्व के साथ रंग न भंग। 03ः- गुलाबी रंग गालों पर मलते दाग जो पड़े। 04ः- मिल के बने लाल पीले नीले भी होली में रंग। 05ः- दूसरा कोई अपना सा लगे सच की होली। 06ः- हैवानों में भी […]

सामाजिक

होली में सावधानियाँ

शरद ऋतु समाप्त हुई, वसंत ऋतु आ गई।यानी की अब होली आ गयी।चारों ओर का वातावरण सा बन गया कि त्यौहार आया है गले मिलेंगे, पुराने वैर-भाव भुलाएगें, भाईचारा बनायेंगे तथा सभी के प्रति समान व्यवहार करेंगे। किन्तु जब होली गलत तरीकों से खेली या मनाई जाती है,मानव समाज की जगह बन्दर छाप कपड़ा फाड़ना […]