लेख

कविता सम्वेदना है..हृदय का प्रस्फुटन है”

कविता सम्वेदना है..हृदय का प्रस्फुटन है” कविता क्या है? इसे समझना भी आवश्यक है,। मुझसे जुड़े हुए कई लोग ख़ासकर मेरे विद्यार्थी अक्सर पूछते हैं कि सर मुझे कविता लिखना सीखना है। मैं उनके सवालों का एक ही उत्तर देता हूं कि कविता कोई सीखने या समझाने की चीज नहीं है, यह तो उतरने की […]

लेख

“महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के अद्भुत रहस्य और प्रयोग”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून विशेष “महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के अद्भुत रहस्य और प्रयोग” भारत आध्यात्मिक मूल्यों से सम्पन्न देश है। भारत की संस्कृति अध्यात्म जनित है। अध्यात्म में इक प्रत्यय लगने से ही आध्यात्मिक शब्द बना है, जिसका अर्थ है आत्मा का अध्ययन। आत्मा ,मनुष्य की ऐसी चेतना शक्ति है जो मनुष्य […]

कहानी

दूध की भगौनी (कहानी)

  दूध की भगौनी (कहानी) ———  लॉक डाउन में ऑफिस  बन्द होने के कारण मोना घर पर फुर्सत में  ही थी । टीवी देखने में , सोशल मीडिया से ही वक्त गुजर रहा था। हसबैंड का दूसरे शहर के थाने में  ट्रासंफर हुआ तो उसे  छुट्टी तो क्या मोबाइल से बात करने की भी फुर्सत […]

कविता

काल बनी वो काली थी (काव्यांजलि)

महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस 18 जून *************************************** काल बनी वो काली थी (काव्यांजलि) झांसी रानी की कविता को आज पुनः दोहराता हूँ, चौहान सुभद्रा की रचना को आगे और बढ़ता हूँ। हिंदी वाली पुस्तक में हम सबने पढ़ी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी। महादेव शिव की नगरी में सुंदर […]

लेख

आत्महत्या देश के युवाओं को नकारात्मक सन्देश

आत्महत्या देश के युवाओं को नकारात्मक सन्देश एक स्त्री की कोख में जब एक भ्रूण बनता है तब से वह स्त्री नौ महीने तक प्रशन्नता के भाव से, एक – एक पल से आशाओं के महल बनाती है। एक स्त्री जाति के लिए चाहे वह किसी भी योनि में हो, माँ बनने का सुख अद्भुत […]

लेख

दिव्य महामंत्र: अनाहद ओमकार

दिव्य महामंत्र: अनाहद ओमकार —————————————————— एक साधारण मनुष्य जिसके बल पर दिव्य शक्तियों को प्राप्त कर लेता हो, जिसकी अल्प साधना मात्र से ईश्वरीय शक्तियाँ जिसके समक्ष उपस्थित हो जाती हों, तन के तार जिसकी नाद से झंकृत होने लगते हों, ब्रह्माण्ड की शक्तियाँ अष्ट सिद्धियों प्राप्त होने लगती हों, तब संसार उस दिव्यता के समक्ष नतमस्तक […]

मुक्तक/दोहा

खूबसरत आँखें

खूबसूरत झुकी पलकें तुम्हारी सीप लगती हैं किसी नीले समंदर की छोटी सी झील लगती है, न जाने क्यों तमन्ना है इनमे डूब जाने की बनारस के शिवालय का महकता दीप लगती हैं।। डॉ. शशिवल्लभ शर्मा

हाइकु/सेदोका

पलायन

पलायन  ( सेदोका विधा) ये मजदूर रहते थे शहर कोरोना के आते ही बेकाम हुए बैठे बिना काम के भूखे बच्चे शाम के। है आटा कम दाल का डिब्बा खाली चार पैसे थे पास आज नहीं हैं ये कैसे खाएँ रोटी नमक भी नहीं हैं। हाँ ! बच्चे रोते बिलखते रहते कैसे समझाएंगे खाना नहीं […]

लेख

महात्मा कबीर को अवतारी मानना ही साहित्योचित

महात्मा कबीर को अवतारी मानना ही साहित्योचित (कबीर जयंती पर विशेष) हिन्दी सहित्य के इतिहास के आधार पर कबीर को मात्र निर्गुण काव्य धारा का कवि मान लेना कबीर को सीमा में बाँध देना है। कबीर को युगवादी, क्षेत्रवादी और जातिवादी की संज्ञा दे देना भी कबीर के संपूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन नहीं है। यदि […]

कहानी

बल्लू की गाँव वापसी (कहानी)

“भूरी सुनो!! रसोई में जितने भी डिब्बे हैं, सभी ठीक से देखलो, जहाँ -जहाँ भी तुम पैसे छुपा कर रखती हो। कहीं और भी रखें हों तो वहाँ भी देखलो। पिछले पंद्रह दिन बीत गए मेरे पास तो अब एक फूटी कौड़ी भी नहीं बची”। शाम को बल्लू ने अपने सवा साल के बेटे को […]