कविता

पार होती हदें

जिसका खाना खाने में   कलेज़ा दुख रहा हो सोचो वो अन्दर ही अन्दर    कितना रोया होगा,  जिस पुत्र को उसका ही      पिता मर जाने की सलाह दे चुका हो और वो    अभी तक जी रहा हो सोचो उसका हाल कैसा होगा, जो पुत्र पिता की तेल मालिश करते-करते पसीने से […]

कविता

ये मुझे क्या पता

कोई चल रहा है ये मुझे क्या पता मैं भी चल रहा हूँ ये मुझे क्या पता जिन्दगी भी वसंत बनकर खिलखिला रही है ये मुझे क्या पता ओह जिन्दगी तेरे पास आ रहा हूँ मेरा भी साथ देना बता कर आ रहा हूँ अब तुम न कहना ये मुझे क्या पता कुछ हाल सही […]

कविता

चन्द्रयान -2

टूटा है सम्पर्क अभी विक्रम और प्रज्ञान का टूटा नहीं भरोसा है अभी मेरे हिन्दुस्तान का इसरो मैं हूँ साथ खड़ा किए भरोसा तेरे काम का सदियों तक गीत गाया जायेगा भारत के विज्ञान का जीत-हार होती रहती है हारे न मेरा हौसला चन्द्रयान की बात करें क्या एक दिन सूरज पर भी लहराएगा मेरा […]

कविता

झोंझ

कितना सुन्दर घर है जिसको कहते झोंझ हैं तिनका-तिनका चुनकरके खूब सजाती झोंझ है जरा सहारा डाल का ईंट गारा सूखे-साखे खरपतवार का बड़ी लगन और मेहनत से कर डाला निर्माण है झोंझ का कितना सुन्दर कितना मनमोहक है बनता जाता झोंझ है जुगनूँ की मिट्टी से देखो चमक भी उठता झोंझ है रंग बिरंगे […]

कविता

सबकुछ हैं वो

क्या होती है माँ वो माँ से पूछो क्या होता है पिता वो एक पिता से पूछो | खुद के सपनों को चकनाचूर करके तुमको क्या क्या दिया जरा मुङकर तो देखो || तुम अपने ही ख्वाबों में डूबे हो अपनी शौक के खातिर ही जिद् करते हो जरा उनके अरमानों को उनके दिल पर […]