सामाजिक

आखिर कब तक प्रियंका रेड्डी जैसी महिलाओं की आबरुह और जान से खेलते रहेंगे दरिंदे?

देश के कुछ अमानवीय कृत्यों को देखकर किस सहृदय व्यक्ति की अश्रुधार प्रवाहित न होगी? हमारा देश एक ऐसे देश के नाम से जाना जाता है जो सदा परस्पर सौहार्द, प्रेम व सहयोग के भावों को जागता रहा है किन्तु देश की वर्तमान दुर्दशा को देखकर अत्यन्त वेदना होती है कि क्या हमारे देश की दिशा व […]

भाषा-साहित्य

कहीं हम हिन्दी से मीलों दूर तो नहीं…?

प्रत्येक वर्ष के समान इस वर्ष भी 14 सितम्बर 2019 को हिन्दी दिवस आ रहा है। जो लोग विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों अथवा सरकारी तन्त्रों से संयुक्त हैं वे लोग ही प्रायः हिन्दी दिवस को मनाते हैं, अन्य लोग प्रायः सामान्यज्ञान से तो जान लेते हैं किन्तु हिन्दी दिवस मानाना नहीं जानते। जो लोग हिन्दी दिवस […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

श्रावणी उपाकर्म विमर्श

भारतवर्ष पर्वों का देश है, नित नूतन पर्वों का उल्लास यहॉं मनाया जाता है। भारतीय पर्व परम्परा में सर्वोत्तम व उत्कृष्ट पर्व का स्थान श्रावणी उपाकर्म को दिया जाता है। क्योंकि यह लोगों को ज्ञान से आलिप्त करने का पर्व है। इस पर्व की परम्परा आज से नहीं अपितु प्राचीन काल से निरन्तर चली आ […]

सामाजिक

स्त्री व शूद्र शिक्षा के सन्दर्भ में सत्यार्थप्रकाश का मत

स्वामी दयानन्द सरस्वती जी अनिवार्य शिक्षा का समर्थन करते हैं और इसके लिए स्वामी जी यह दायित्व माता-पिता को सौंपते हैं। वे चाणक्य के उस प्रसिद्ध श्लोक – ‘माता शत्रुः पिता वैरी…’ को उद्धृत कर यह स्पष्ट कर देते हैं कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को प्रशिक्षित नहीं किया उन्होंने अपने सन्तानों के साथ […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

शिवरात्री बोधरात्री स्यात्

इस नव वर्ष (विक्रमी संवत्) से ठीक एक मास पहले एक  ऐसा पर्व आ रहा है, जिसकी हम सभी जन बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा करते है, वह पर्व है शिवरात्री। शिवरात्री शब्द से स्पष्ट ज्ञात होता है कि ‘‘शिवस्य रात्री शिवरात्री’’ अर्थात् शिव की रात। शिव का अर्थ होता है कल्याण करने वाला। अतः इस […]

सामाजिक

लेख : दंगल की दयनीय सोच

वर्तमान के दृश्य को दृष्टि में अवतरित कर दूसरों को दृश्याकाररूप देना वर्तमान में बहुत कठिन हो गया है। आज युवाओं की पहली पसंद सिनेमाजगत् है। सच्चे गुरु व मार्गदर्शक तो सिनेमा घर ही बनते जा रहे हैं। इसकी छाप छोटे से लेकर अबालवृध्दों पर   दिखायी देती है। यत्र-कुत्र सर्वत्र ही सिनेमा की चर्चायें विस्तृत […]

राजनीति

कृषि विचार मन्थन से अमृत तत्व

किसी भी कार्य की दिशा में बढाया गया प्रथम कदम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्रथम कदम मार्ग को प्रशस्त करता है। समय तथा हमारा जीवन हमसे अपेक्षा करता है कि हम स्वयं का ध्यान रखें तथा ध्यान हम तभी रख सकते हैं जब हमारा आहार शुध्द हो एवं शुध्द आहार के लिए कृषि […]

सामाजिक

संस्कृत का विकास कैसे हो?

संस्कृतभाषा की आजीविका के क्षेत्रों में अध्ययन-अध्यापन एवं प्रशासनिक सेवाओं के अतिरिक्त सामाजिक एवं आध्यात्मिक तथा शारीरिक क्षेत्रों में भी पर्याप्त अवसर हैं। भारतीय संस्कृति का ज्ञान संस्कृत के विना असम्भव है। (भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा) मानवजीवन के सर्वांगीण विकास के लिए विज्ञान, कला एवं अध्यात्मिक ज्ञान अत्यन्त आवश्यक हैं, इन तीनों का समन्वय […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

यम-यमी का वैदिक स्वरूप

प्रत्येक मनुष्य समाज को एक नई दिशा व दशा देने की पूर्णरूपेण योग्यता रखता है।अब दिशा व दशा कैसे हो, यह दिशा व दशा दिखाने वाले पर आश्रित है, वह अपने ज्ञान के आलोक से मार्गप्रशस्त करता है अथवा ज्ञान के आलोक के अभाव में सत्य मार्ग से हटा कर असत्य मार्ग का अनुसरण कराता […]

राजनीति

घर के अन्दर बैठे आतंकियों का क्या होगा?

भारतवर्ष का अपना निराला ही रूप दिखायी देता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि – यह एक मतनिरपेक्ष देश है, जिसको लोग धर्मनिरपेक्ष भी कह देते हैं। जहां धर्मनिरपेक्षता की आड़ में लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बिगाड़ने का हर सम्भव प्रयास किया जाता है। ऐसा ही कुछ 9 फरवरी 2016 को हुआ, शायद आपको यह […]