गीतिका/ग़ज़ल

है युग का आदमी

नशे  का  सौदागर, है  युग का आदमी। छुपा  हुआ अजगर,है युग का आदमी। काम, क्रोध, लोभ, मोह, हंकार  पालता, हुआ बद से बदतर, है युग का आदमी। नेक   इंसान  से   भी   भरी   है  धरती, करता इन में बसर, है युग का आदमी। भक्ति की लहर में डूबा समाज देखिये, खो देता सब असर है युग […]

कविता

संकल्प भरा विश्वास

चलो एक बार फिर जिंदगी वक्त आज़माते हैं। संकल्प पर टिकी हमारी आशाएं बता देते हैं। हिम्मत से चलना सीखा है हमने आओ कंटक को फूल बना देते हैं। हों किनारे कितने भी दूर होसले की उड़ान से मिला देते हैं। दुख सुमानी बन कहर बरपाएं सुख बहारें बन कर आएं खट्टी मीठी यादें जिंदगी […]

कविता

तृष्णा

आशा तृष्णा लोभ समान हैं बांधे भीतर मन जात दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है पिस जाए यह गात मृग तृष्णा सी बन ठगे चातुरी अदृश्य मन का रोग मर मिट गए इस के बस पड़े देव दानव क्या लोग काम क्रोध लोभ मोह सभी इस के सुंदर रूप बाहर से मन लुभावनें भीतर से हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जुल्फ़ बन कर  बदली  छाने लगी है। तेरी   प्यारी   ख़ुशबू   आने  लगी  है। यह  वादियां, फिजाएं, रंगीन  मौसम, याद  फिर तेरी सनम  सताने लगी है। वो  गिरते  झरने  की  मीठी  रुनझुन, गीत  मल्हार सावन  सुनाने  लगी  है। याद  आती   करवटें  बदल   हैं  लेते, तेरी  ख़ामोश  अदा  सुलाने  लगी  है। तन्हाई  में  मायूसी  जब   लगने  लगे, […]

गीत/नवगीत

मन में बहती प्रेम तरंग

मिलते हैं नसीब में सब को,मस्त भरे खुशीयों के रंग। होठों पर मुस्कान बिखेरे,होते पुलकित भीतर अंग। तज कर बैर विरोध सारे,आओ बन के सब मीत रहें। प्रेम सुधा हृदय की ताल से,गाते मधुर  हम गीत रहें। बाँट लें दर्द आपस में सब,नयनों से सभी दुलार कर। हाथ में हाथ हो अपनों का,बाहों में भर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुहब्बत में  मिलने  का दर  कहाँ है। मिले सकून दिल को वो घर कहाँ है। यादों में   तेरी जो  मर मिट गए हम, मेरी  चाहत की उसे  खबर  कहाँ है। रहती न पल भर आँखों से दूर कहीं, ढूँढती फिरे  मुझे  वो नज़र  कहाँ है। लौट आए मेरी हर खुशी के लिए जी, मेरी सब  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पीठ पीछे करने को चर्चा सजी महफ़िल। रिवाज सा है हो गया लोगों में आजकल। अपने और पराये का कोई भेद कैसे जाने, मासूम चेहरा लिए हैं फिरते यहाँ कातिल। इल्म जिसने सँभाला पहुँच औहदे पर गये, कुसंगती के संग रह कर बन गए जाहिल। हवसी दरिंदे  लुटते  इज्जत नारी की यहाँ हैं तमाशाई लोग […]

गीतिका/ग़ज़ल

पेड़ की अभिलाषा

मत काट मत काट विनती कर जोड़ करूँ। तेरे काम आता हूँ तेरे हर दुख दर्द मैं  हरूँ। तेरे  बुजु़र्गों ने पाला प्यार अपना लुटा कर, घूर घूर  देख रहा  तू नियत तेरी से मैं डरूँ। उजाड़ा दिया क्यों परिवार मेरा दोष बता, देखता हूँ  कुमति  तेरी  मन में आहें भरूँ। स्वच्छ,हवा,पानी,हरियाली मिलती मुझ से, […]

गीत/नवगीत

रोक नही राह कोई सकता

मन होश रहे,तन जोश रहे,रोक नहीं राह कोई सकता। बल तन में, विश्वास मन में,रोक नहीं राह कोई सकता। होश में इतना जोश रहे, कोई बाधा रोक न पाए। बढ़ें कदमों की धूल उड़े,जिसे देख दुश्मन घबराए। आगे बढ़ता ही जा। रास्ता अपना बना। मंजिल ही तेरी है शान रे,रोक नही राह कोई सकता। मन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आरजू है दिल की जरा करीब आओ। लबों में तेरे हंसी मुस्कुरा के दिखाओ। जालिम है जमाना मिलने नहीं है देता, उल्फत में न बहाना कोई तुम बनाओ। हर बार है किया  इंतजार इस तरह से, फुरसत नहीं तुम में  इतना न सताओ। आरजू मेरी दिल की  दफन हो न जाए, गम है मिल सके […]