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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जाने वाले कब लौटे हैं क्यूँ करते हैं वादे लोग नासमझी में मर जाते हैं हम से सीधे सादे लोग पूछा बच्चों ने नानी से – हमको ये बतलाओ ना क्या सचमुच होती थी परियां, होते...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अपने हर दर्द को अशआर में ढाला मैंने ऐसे रोते हुए लोगों को संभाला मैंने शाम कुछ देर ही बस सुर्ख़ रही, हालांकि खून अपना तो बहुत देर उबाला मैंने बच्चे कहते हैं कि एहसान नहीं...

  • ग़ज़ल : जीवन नैया डांवांडोल

    ग़ज़ल : जीवन नैया डांवांडोल

    जीवन नैया डांवांडोल बाबा अब तो आँखें खोल खुल जायेगी तेरी पोल खुद को इतना भी न टटोल प्यार में बिक जाये अनमोल इक गुड़िया है गोल-मटोल कौन यहाँ किसको क्या दे सबके हाथों में कशकोल...





  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बात दिल की कह दी जब अशआर में ख़त किताबत क्यूँ करूँ बेकार में मरने वाले तो बहुत मिल जाएंगे सिर्फ़ हमने जी के देखा प्यार में कैसे मिटती बदगुमानी बोलिये कोई दरवाज़ा न था दीवार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    है छाई बेसबब दिल पर उदासी तो क्या हमको मोहब्बत हो गई जी ? कभी हो, राह मैं भी भूल जाऊं बुलाये चीख कर अंदर से कोई कभी रोशन, कभी तारीक़ दुनिया तुम्हें भी क्या कभी लगती...