गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जाने वाले कब लौटे हैं क्यूँ करते हैं वादे लोग नासमझी में मर जाते हैं हम से सीधे सादे लोग पूछा बच्चों ने नानी से – हमको ये बतलाओ ना क्या सचमुच होती थी परियां, होते थे शहज़ादे लोग? टूटे सपने, बिखरे अरमां, दाग़ ए दिल और ख़ामोशी कैसे जीते हैं जीवन भर इतना बोझा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल : वो लम्हा ठहर गया होगा

जब मिटा कर नगर गया होगा क्या वो लम्हा ठहर गया होगा आइने की उसे न थी आदत खुद से मिलते ही डर गया होगा वह जो बस जिस्म का सवाली था उसका दामन तो भर गया होगा अब न ढूंढो कि सुबह का भूला शाम होते ही घर गया होगा खिल उठी फिर से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपने हर दर्द को अशआर में ढाला मैंने ऐसे रोते हुए लोगों को संभाला मैंने शाम कुछ देर ही बस सुर्ख़ रही, हालांकि खून अपना तो बहुत देर उबाला मैंने बच्चे कहते हैं कि एहसान नहीं फ़र्ज़ था वो अपनी ममता का दिया जब भी हवाला मैंने कभी सरकार पे, किस्मत पे, कभी दुनिया पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : जीवन नैया डांवांडोल

जीवन नैया डांवांडोल बाबा अब तो आँखें खोल खुल जायेगी तेरी पोल खुद को इतना भी न टटोल प्यार में बिक जाये अनमोल इक गुड़िया है गोल-मटोल कौन यहाँ किसको क्या दे सबके हाथों में कशकोल आज हादसा नहीं हुआ जश्न मनाओ, पीटो ढोल जो बिछुड़ा वो फिर न मिला हम समझे थे दुनिया गोल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : अजनबी खुद को लगे हम

अजनबी खुद को लगे हम इस कदर तन्हा हुए हम उम्र भर इस सोच में थे क्या कभी सोचे गए हम खूबसूरत ज़िंदगी थी तुम से मिलकर जब बने हम चाँद दरिया में खड़ा था आसमाँ तकते रहे हम सुबह को आँखों में रख कर रात भर पल – पल जले हम खो गए हम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : जब हमारी बेबसी पर मुस्करायीं हसरतें

जब हमारी बेबसी पर मुस्करायीं हसरतें हमने ख़ुद अपने ही हाथों से जलाईं हसरतें ये कहीं खुद्दार के क़दमों तले रौंदी गईं और कहीं खुद्दरियों को बेच आईं हसरतें सबकी आँखों में तलब के जुगनू लहराने लगे इस तरह से क्या किसी ने भी बताईं हसरतें तीरगी, खामोशियाँ, बैचेनियाँ, बेताबियाँ मेरी तन्हाई में अक्सर जगमगायीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : पेड़ के फलदार बनने की कहानी रस भरी है

पेड़ के फलदार बनने की कहानी रस भरी है शाख़ लेकिन मौसमों के हर सितम को झेलती है सैकड़ों बातें इधर हैं उस तरफ बस खामुशी है कैसे सपने देखती हूँ मैं ये क्या दीवानगी है गर तुम्हारी बात पर हँसता है अब तक ये ज़माना फिर समझ लेना अधूरी आज भी दीवानगी है हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : क्यूँ करते हैं वादे लोग

जाने वाले कब लौटे हैं क्यूँ करते हैं वादे लोग नासमझी में मर जाते हैं हम से सीधे सादे लोग पूछा बच्चों ने नानी से – हमको ये बतलाओ ना क्या सचमुच होती थी परियां, होते थे शहज़ादे लोग ? टूटे सपने, बिखरे अरमां, दाग़ ए दिल और ख़ामोशी कैसे जीते हैं जीवन भर इतना बोझा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बात दिल की कह दी जब अशआर में ख़त किताबत क्यूँ करूँ बेकार में मरने वाले तो बहुत मिल जाएंगे सिर्फ़ हमने जी के देखा प्यार में कैसे मिटती बदगुमानी बोलिये कोई दरवाज़ा न था दीवार में आज तक हम क़ैद हैं इस खौफ से दाग़ लग जाए न इस किरदार में दोस्ती, रिश्ते, ग़ज़ल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

है छाई बेसबब दिल पर उदासी तो क्या हमको मोहब्बत हो गई जी ? कभी हो, राह मैं भी भूल जाऊं बुलाये चीख कर अंदर से कोई कभी रोशन, कभी तारीक़ दुनिया तुम्हें भी क्या कभी लगती है ऐसी ? ज़ज़ीरे की तरह है ज़िंदगी अब उभरती डूबती रहती है ये भी मेरे सर पर है साया […]