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  • हम ज़िदा कब थे?

    हम ज़िदा कब थे?

    हम ज़िंदा कब थे? अगर हम ज़िंदा होते तो किसी औरत को बलात्कार नहीं सहते किसी व्यक्ति की निंदा नहीं करते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते न कि उसमे भागीदारी बनते अगर हम ज़िंदा होते तो...


  • समय देकर तो देखो

    समय देकर तो देखो

    समय देकर तो देखो शायद सब कुछ ठीक हो जाए पुराने-कडवे रिश्तों में शायद थोड़ी-सी मिठास भर आए दुश्मनी की मशाल शायद थोड़ी कम हो जाए भटके हुए को उसका मार्ग मिल जाए समय देकर तो...

  • सरहद कोई लकीर नहीं

    सरहद कोई लकीर नहीं

    सरहद कोई लकीर नहीं है हर दुश्मनी का आगाज़। जहाँ खिंच जाती है यह बन जाती है वहाँ दीवार। दो मुल्कों की दोस्ती को बना देती है बेजान। खून के मीठे रिश्तों को भी चखा देती...

  • किसान

    किसान

    अपने पारस हाथों से जब वो सुखी धरती को सींच देता है और वहां सोने-सी अनमोल फसल उगा देता है। तब उसके घर पर त्यौहार का सा माहौल हो जाता है और उसका घर  खुशी के...

  • हम ज़िंदा कब थे?

    हम ज़िंदा कब थे?

    हम ज़िंदा कब थे? अगर हम ज़िंदा होते तो किसी औरत को बलात्कार नहीं सहते किसी व्यक्ति की निंदा नहीं करते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते न कि उसमे भागीदारी बनते अगर हम ज़िंदा होते तो...


  • मन नहीं करता

    मन नहीं करता

    उठने का मन नहीं करता बिस्तर का दामन छोडऩे का मन नहीं करता। क्योंकि जानता यह दिल और दिमाग अगर उठ गया तो होगा वहीं जो आज तक होता आया है। सुननी पडेगी वहीं खबरें जिनमें...

  • चेतावनी : जल की

    चेतावनी : जल की

    जीवन-दाता मै कहलाता। सब लोगों की प्यास बुझाता। पर्वतों से मैं निकालता, फिर सागर से मै मिल जाता। सब पुछते है मुझसे आखिर रंग मेरा कौन सा? मैं कहता हूँ मेरा ढंग है नया-सा। अमृत कहते...

  • श्रापित संपदा

    श्रापित संपदा

    उद्योगीकरण के आँधी में जब बुझने लगती पर्यावरण की बाती तब करने लगती धरती त्राही-त्राही और तब श्राप बनती संपदा किसी स्थान के लिए……. तब मजबूर होकर पलायन करता हर एक आदमी। उद्योगीकरण की मशाल देखकर...