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  • अपनी अपनी जड़ें

    अपनी अपनी जड़ें

    जड़ें तो सबकी होती हैं पुकारती भी हैं कभी कभी दे जाती हैं टीस सी रीढ़ की हड्डी पूरे में कहीं सिहर सी जाती है खिंचाव भी लगता है और बहुत मन करने लगता है दौड़कर...



  • देश को हैशटैग मत करो !!

    देश को हैशटैग मत करो !!

    इस समय देश में सुलगाए गए मुद्दे मानवीय भावनाओं के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील हैं, लेकिन इन पर संवेदनाएं जताने वालों की भावनात्मक शुद्धता का प्रतिशत कितना परिशुद्ध है, इसे स्वयं उनसे बेहतर कोई नहीं समझता।...


  • दो बातें कविताएं

    दो बातें कविताएं

    क्यों बदल रहे लोग वैमनस्य की कड़वाहट का अभ्यस्त हुआ व्यक्ति स्वयं व अन्य के प्रति कितना असंवेदनशील हो जाता है। ये अलग है कि उसकी असंवेदना कितनों की संवेदनाओं को चोट पहुंचाती है, अलावा उसके,...