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  • अपनी अपनी जड़ें

    अपनी अपनी जड़ें

    जड़ें तो सबकी होती हैं पुकारती भी हैं कभी कभी दे जाती हैं टीस सी रीढ़ की हड्डी पूरे में कहीं सिहर सी जाती है खिंचाव भी लगता है और बहुत मन करने लगता है दौड़कर...