कहानी

कहानी- जंगल के दावेदार

तुमूल बाबू की सुबह घूमने की आदत बंद नहीं हुई थी। तीस साल पहले जो आदत बनी थी, वो आज भी बरकरार थी । कल ही गांव लौटे थे । और सुबह सुबह घूमने जंगल की ओर निकल गये थे । जंगल पहले से आधा रह गया था । यह देख उसे धक्का सा लगा, […]

लघुकथा

लघुकथा – नेता जी कहां हैं

शमीम साहब हैरान-परेशान है,सप्ताह दिन से नेता जी को खोजते फिर रहे है,पर नेता जी है कि अपना टेबल कुर्सी छोड़ न जाने कहां गायब हो गए हैं । नेता जी से शमीम साहब का भेंट हो भी तो कैसे हो! किसी से पुछे तब न कोई कुछ बताये उन्हें। वो तो मन ही मन […]

कहानी

कहानी रूम हीटर

शीत लहरी से पूरा क्षेत्र कांप रहा था । ठंड ने समस्त प्राणियों में अपना दबदबा कायम कर लिया था । किसान बड़ी मुश्किल से खलिहान तक पहुंच रहे थे और मजदूर  हिलते डुलते काम पर जाने को मजबूर थे ।  जिस पर नजरें उठती वही कपड़ों में लिपटे नजर आ रहे थे । शरद […]

कहानी

कहानी – तबादले के बाद

अभी अभी खबर मिली है कि लालजी साहू ने सम्प एरिया में काम ज्वाइंन कर लिया है। सुनकर मुझे विश्वास नहीं हुआ ! सम्प एरिया में काम और लालजी साहू !नेवर-कभी नहीं ! वो ऐसी जगह न कभी काम किया है न करेगा-कर ही नहीं सकता। शेर भूखा रह जाएगा पर घास नहीं खाएगा-असंभव ! […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य कथा – नेतागिरी का पंचनामा

शहर से बाहर, पक्की सड़क के किनारे पीपल पेड़ के सामने, एक अधपक्का ब्लीडिंग के बाहर एक बड़ी सी होल्डिंग लगी हुई थी। जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था” नेता बनने का हुनर सीखें!” मोदी जी भी अपने भाषणों में अक्सर कहा करते है” पकौड़ा तलना सीखें। पंचर बनाना सीखें। आंचार बनाना सीखें, […]

हास्य व्यंग्य

राशनकार्ड का पंचनामा

गांव के लालजी साहू को डी सी जनता दरबार में उपस्थित होने को कहा गया था । आज ही सुबह दस बजे ! परसों ग्राम सेवक ने गाजोडीह के जिन पांच लोगों को डी सी के जनता दरबार में शामिल होने के लिए पत्र दे गया था उनमें लालजी साहू भी एक था ।किस कारण […]

लघुकथा

लघुकथा – ऑफिस का रावण

रावण दहन के दूसरे दिन ऑफिस के दूसरे कमरे में अचानक से ” गदध ! गदध ! ” दो बार आवाज सुनाई पडी । मैं कुछ समझ न सका । हो सकता है वो मेरा केवल एक भ्रम था । तब मैं अपने कमरे में बैठा एक विधवा पेंशन के मामले को समझने का प्रयास […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग लेख – नेता पुत्रों का राजनीतिकरण

बचपन में किसी क्लास में पढ़ा था ” पढ़ लिख कर मैं एक किसान बनूंगा ” शायद तब देश में लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे । उनका नारा ” जय जवान जय किसान ” का उस पर असर रहा होगा । गांव चौपालों में भी यह बात खूब कही जाती थी कि किसान का बेटा किसान […]

कहानी

कहानी – औलादों वाली मां

आज फिर उनकी उपस्थिति पर उसने आपत्ति जताई थी-” ये यहां भी पहुंच गया है। आखिर यह है किस मर्ज की दवा…?” उस वक्त मैंने उससे विशेष कुछ नहीं कह कर-केवल इतना ही कहा था-” उनके बारे में जानोगे तो तेरे पांव तले की जमीन खिसक जायेगी, फिर भी बताऊंगा,पर कार्यक्रम के बाद-रूकना कहीं जाना […]

कहानी

कहानी — तबादले के बाद

अभी अभी खबर मिली है कि लालजी साहू ने सम्प एरिया में काम ज्वाइंन कर लिया है । सुनकर मुझे विश्वास नहीं हुआ ! सम्प एरिया में काम और लालजी साहू !नेवर-कभी नहीं ! वो ऐसी जगह न कभी काम किया है न करेगा-कर ही नहीं सकता । शेर भूखा रह जाएगा पर घास नहीं […]