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  • कुंडलियां छंद

    कुंडलियां छंद

    आजादी को देश की, बीते कितने साल वीरों के बलिदान से, हुई धरा ये लाल हुई धरा ये लाल, दर्द में डूबी जाए खोया जो सुख चैन, कौन वो फिर से लाए गौरों का था खेल,...

  • कविता

    कविता

    हे मनुज अब जाग जाओ तुम सफ़ल जीवन बनाओ प्रेम का दीपक जलाकर अब तिमिर को तुम मिटाओ हिम्मतों से काम लो तुम ये कदम आगे बढ़ाओ त्याग कर अवसाद आलस अब ज़रा कुछ कर दिखाओ...

  • नारी है धरती की शान

    नारी है धरती की शान

    नारी को यूँ ही मत समझो, नारी है धरती की शान पढ़ लिखकर अब खूब बनाए, खुद ही यह अपनी पहचान। बेटी को तुम कम मत जानो, बेटे सम है बेटी आज बेटे जैसा हक दो...

  • गीतिका

    गीतिका

    अंध मिटाकर दिया जलायें दर्द भुलाकर ख़ुशी दिलायें ! आज अगर सो गया जमाना क्यूँ न चलो हम उसे जगायें ! राह बड़ी मुश्किलों भरी है सोच समझ कर कदम बढायें ! छोड़ परे जो लिखा...

  • ग़ज़ल – मन

    ग़ज़ल – मन

    चंचल नदिया जैसा ये मन बह जाता भावों में ये मन उलझन में है हर पल रहता बुनता ताने बाने ये मन कभी रेत के टीले चढ़ता कभी बर्फ़ से खेले ये मन कभी गगन को...

  • लघुकथा- बिखरते सपने

    लघुकथा- बिखरते सपने

    बड़ा शौक था संध्या को नई नई किताबें लेकर स्कूल जाने का। पढ़ लिखकर खूब नाम कमाने का। बचपन से ही उसमें निष्ठा और लगन भरी हुई थी। माँ बाबू ने हर इच्छा पूरी की उसकी,...

  • गीतिका

    गीतिका

    ईश्वर का तुम ध्यान करो हर पल प्रभु गुणगान करो घर में बड़े जो वृद्धजन उनका तुम सम्मान करो रिश्ते होते हैं अपने उनको मत अनजान करो करना ही जो दान अगर निज पापों का दान...

  • गीतिका- मधु बेला

    गीतिका- मधु बेला

    नयीं किरणें ….दिवाकर मुस्कुराया है अरे देखो ज़रा …….ये कौन आया है खिले से फूल, महकी हैं, सभी कलियाँ धरा पर स्वर्ग, देखो……आज छाया है सुहानी भोर …….पल्लव हैं नये लहरें फ़िजा ने, गीत प्यारा ….आज...

  • बदलता मौसम

    बदलता मौसम

    शीत शीघ्र आ रही पास है बुला रही गर्म वस्त्र धूप में मात है सुखा रही बर्फ की चोटियाँ खूब कँपकँपा रही मंद सी ठिरी पवन आज सनसना रही बूँद ओस की यहाँ घास में समा...

  • भगवती वंदन

    भगवती वंदन

    धरा आज फिर मुस्कुराने लगी कदम भगवती घर बढ़ाने लगी ! चहल औ पहल हो रही हर तरफ खुशी चेहरों पर खिलाने लगी ! दयावान है इस जगत की ये माँ कृपा आज सब पर दिखाने...