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  • गीतिका- मधु बेला

    गीतिका- मधु बेला

    नयीं किरणें ….दिवाकर मुस्कुराया है अरे देखो ज़रा …….ये कौन आया है खिले से फूल, महकी हैं, सभी कलियाँ धरा पर स्वर्ग, देखो……आज छाया है सुहानी भोर …….पल्लव हैं नये लहरें फ़िजा ने, गीत प्यारा ….आज...

  • बदलता मौसम

    बदलता मौसम

    शीत शीघ्र आ रही पास है बुला रही गर्म वस्त्र धूप में मात है सुखा रही बर्फ की चोटियाँ खूब कँपकँपा रही मंद सी ठिरी पवन आज सनसना रही बूँद ओस की यहाँ घास में समा...

  • भगवती वंदन

    भगवती वंदन

    धरा आज फिर मुस्कुराने लगी कदम भगवती घर बढ़ाने लगी ! चहल औ पहल हो रही हर तरफ खुशी चेहरों पर खिलाने लगी ! दयावान है इस जगत की ये माँ कृपा आज सब पर दिखाने...

  • गीतिका

    गीतिका

    गुल खिला देखिए दिल मिला देखिए! अब न मन में रहा इक गिला देखिए ! खत्म अब पाप का सिलसिला देखिए! झूठ का टूटता अब किला देखिए! दंड के नाम से वो हिला देखिए! — डाॅ...

  • कविता

    कविता

    बाधाएँ तो आती रहेंगी राह में कमी मगर न होने देना चाह में उन्नति का पथ मिलता सभी को सीढ़ियाँ सफलता की चढ़ोगे कभी तो चाहे कठिन हो जिंदगी का सफर हो उलझनों से भरी यह...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अरमान जो भी थे मेरे दिल में ठहर गए सब रंजिशे गम भी तब जाने किधर गए रूठा हुआ सहरा भी गुलिदस्ताँ बन गया जब वो मिरे करीब से हँसकर गुजर गए! — डॉ सोनिया गुप्ता...

  • कविता

    कविता

    कविता मात्र एक रचना नहीं एक अक्स होता है किसी दिल का मेल होता है भावों का उमड़कर बादलों की तरह आते हैं जो बरसते हैं फिर स्याही के रूप में लेते हैं आकार अक्षरों की...

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    1) रहती नहीं अपनी कोई खबर ऐसी इश्क की होती है डगर पाकर भी मिलता चैन नहीं खोने का भी रहता इक डर !!! 2) प्यार फिर से वो जताने आ गये हैं आस फिर से...

  • कविता: नववर्ष स्वागत

    कविता: नववर्ष स्वागत

    बीते दिनों को अब दो विदाई नव वर्ष को अब दो बधाई लम्हे गुजर गये हैं जो बीते क्या वो कभी आते हैं भाई! मंगल घड़ी आई है रे भाई छोड़ो सभी झगड़े ये लड़ाई मन...

  • कविता: बचपन

    कविता: बचपन

    मंद मुस्कान पाक मन ईशवर का रूप करते दूर हर शिकन ! न भय बन्धनों का न कोई जिम्मेवारी कागज की कशती घोड़े की सवारी ! खेल खेल में बीतें पल मन में न उलझन न...