गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

करें भी अब शिकायत क्या भला हम इस ज़माने से नहीं कोई यहाँ पीछे किसी को भी सताने से । ज़हर इतना लगा घुलने हवाओं में यहाँ पर अब, कली भी हिचकिचाती है दोबारा खिलखिलाने से। उदासी हर तरफ़ छाई हुई इतनी न पूछो तो झिझकता दिल भी कोई गीत प्यारा गुनगुनाने से । ज़रा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बिगाड़े है खुदा, बनाता भी तो है निराशा में आशा, जगाता भी तो है। भले ही कष्ट कितने वो दे दे हमें हरिक का साथ पर निभाता भी तो है। हमें वो उलझनों में डाले है मगर सही रस्ता हमें दिखाता भी तो है। सिखाता दूर रहना सबको इश्क से चिरागे इश्क पर जलाता भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

जिंदगी में हर समय मुश्किल घड़ी तैयार है बेवजह मुख मोड़ लेना मान लीजै हार है ! कंटको की राह पर तू पग बढ़ाना सीख ले ये ज़रूरी तो नहीं के हर गली गुलज़ार है ! मुश्किलों का सामना फ़ौलाद बनके कर सदा आंसुओं को यूँ बहाना तो बड़ा बेकार है ! हम बिलखते हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इस बदलते दौर का अंदाज देखो हो चला कैसा ज़माना आज देखो | सच कहीं आता नहीं अब तो नज़र है हो गया है झूठ का अब राज देखो | चीखती चिल्ला रही हैं बेटियां सब सुन रहा कोई नहीं आवाज़ देखो | हर तरफ़ सहमी हुई सी है हवा अब जुल्म का होने लगा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुझे मुझसे मुहब्बत है कि नहीं बता मेरी ज़रूरत है कि नहीं? सदा मिलता रहे तेरा आसरा ख़ुदा इतनी इनायत है कि नहीं? करूँ दीदार तेरा हमदम मेरे मुझे इतनी इजाज़त है कि नहीं? सताते ही रहो हर पल मुझे तुम बची तुम में शराफत है कि नहीं? गुज़ारी जिंदगी यूँ बेकार में करी रब […]

लघुकथा

लघु कथा – लक्ष्य के लिए

उसने अपना काम धंधा नहीं छोड़ा, गाँव के सरपंच से रात्रि में खुले विध्यालय के बारे पता किया और दाखिला लिया ! उसकी परिश्रम और लग्न रंग लाई ! आज रामू पढ़ लिख गया है और अपने बेटे को पढाने लायक भी हो गया है ! खुद उसके बेटे के स्कूल से न्योता आता है, […]

कविता

साहिल

हिम्मतों को अपनी टूटने न दो होंसलों को अपने रूठने न दो जिंदगी ले आये तूफान कितने, पर नैया को अपनी डूबने न दो ! होंसलें बुलंद हों तो सब कुछ होता हासिल, मुश्किलों से जूझकर हर शक्स बनता काबिल, जो न डरता तनिक भी तेज आँधियों से, उसकी नौका को मिलता ज़रूर है साहिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जीवन है, चलना ही होगा आगे तो बढ़ना ही होगा ! बाधाएं आ जाएँ कितनी उनसे हमें गुजरना होगा ! पानी चाहो गर तुम मंजिल मन में धीरज धरना होगा! रौशन जो करना है जीवन दीये के सम जलना होगा! इन राहों पर चलते चलते गम भूले बस हँसना होगा ! निश्छलता मन में अपनाकर […]

कविता

गलती

गलती से क्यूँ डरते हो तुम, गलती को सब अपनाओ तुम, जीवन में आगे बढना जो, गलती को गले लगाओ तुम ! गलती तो इक ठोकर होती, ठोकर लग कर उठ जाओ तुम, पर इतना भी समझो यारों, गलती को न दोहराओ तुम ! गलती तब तक गलती होती, जब अनजाने कर जाओ तुम, लेकिन […]

कविता

जिंदगी एक सिनेमा

ये जिंदगी भी तो है इक सिनेमा नए किरदार नए अभिनय रंग अनेक कभी श्वेत श्याम सी यादें कभी रंग बिरंगी बातें कभी खिलता मौसम कभी ठहरा सा जीवन रोज नया सा रोल जिंदगी ये गोल वो ऊपरवाला करता निर्देशन जीवन ये रंग मंच किरदार खत्म होते ही जीवन हो खत्म मृत्यु का आगमन नवजीवन […]