सामाजिक

परीक्षाएँ ही नहीं, महत्त्वपूर्ण होते हैं प्रश्नपत्र भी

पिछले दिनों (जुलाई 2014 में) केरल कर्मचारी चयन आयोग (एस.एस.सी.) की ओर से ग्रैजुएट लेवल की एक परीक्षा में प्रश्न पूछा गया कि इनमें से सबसे लंबी ऐक्ट्रेस कौन है? उत्तर के लिए चार आॅप्शन दिए गए हैं जो इस प्रकार से हैं: (1) हुमा कुरैशी (2) कटरीना कैफ़ (3) दीपिका पादुकोण (4) प्रीटि जिंटा […]

स्वास्थ्य

दातुन ही नहीं, उपयोगी हैं टूथपेस्ट और टूथब्रश भी

एक सज्जन से मिलने जाना हुआ। पहले पानी और उसके बाद चाय आई। चाय सिर्फ़ एक कप ही थी। मैंने मेज़बान से पूछा, ‘‘आप चाय नहीं लेंगे?’’ ‘‘मैं चाय-काॅफी, बीड़ी-सिगरेट, पान, गुटका, शराब, तम्बाकू आदि कोई ग़लत चीज़ नहीं लेता,’’ मेज़बान ने बड़े गुरूर के साथ फ़र्माया। ‘‘अच्छी बात है आप कई बेकार की चीज़ों […]

सामाजिक

दुर्घटना ही नहीं रोडरेज से बचना भी ज़रूरी है

रोड रेज से बचने के लिए ज़रूरी है विशाल हृदयता व मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन पाँच व छह अप्रैल 2015 की रात को दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में रोड रेज में हुई हत्या हमारी संवेदनशीलता व कानून व्यवस्था दोनों पर प्रश्न चिह्न लगाती है। पिछले दिनों घटित कुछ घटनाएँ ज़ह्न में ताज़ा हो गईं। […]

सामाजिक

पुरस्कार ही नहीं, दण्ड भी उपयोगी है

एक व्यक्ति को उसके भयकंर अपराधों के लिए फाँसी की सज़ा सुनाई गई। फाँसी से पूर्व उसकी माँ अपने बेटे से मिलने के लिए आई। माँ का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटे ने इशारे से माँ को अपने पास बुलाया और अपना मुँह उसके कान के पास ले गया मानो चुपचाप उससे कोई राज़ की […]

सामाजिक

प्रायश्चित और ध्यान-परिवर्तन द्वारा संभव है धूम्रपान से मुक्ति

अपनी आत्मकथा के पहले भाग के ‘‘चोरी और प्रायश्चित’’ खण्ड में गाँधीजी लिखते हैं, ‘‘अपने एक रिश्तेदार के साथ मुझे बीड़ी पीने का शौक लगा। हमारे पास पैसे नहीं थे। हम दोनों में से किसी का यह ख़्याल तो नहीं था कि बीड़ी पीने में कोई फ़ायदा है अथवा उसकी गंध में आनंद है। पर […]

सामाजिक

घर के भीतर ही नहीं, घर के आसपास भी ज़रूरी है प्रकाश

दीपावली पर सभी अपने-अपने घरों को रोशन करते हैं। घरों को ही नहीं आसपास को भी। दीपक ऐसे रखे जाते हैं कि चारों तरफ़ प्रकाश फैल सके। घरों के साथ-साथ उन सार्वजनिक स्थानों पर भी एक-एक दीपक रख आते हैं जहाँ प्रकाश करने वाला कोई नहीं होता। एक दीपक गली के सूने कोने पर तो […]

सामाजिक

सफाई ही नहीं, ज़रूरी है सफाईकर्मियों की स्थिति में भी सुधार

महात्मा गांधी सफाई को बहुत महत्त्व देते थे। बेशक वो अत्यंत सादगी से रहते थे लेकिन उनकी आंतरिक और बाह्य स्वच्छता आज भी अनुकरणीय है। वो न केवल अपनी साफ-सफाई स्वयं करते थे अपितु दूसरों को भी साफ-सफाई और स्वयं अपनी सफाई करने के लिए प्रेरित करते थे। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार […]