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  • स्टैंडर्ड एक लघुकथा

    स्टैंडर्ड एक लघुकथा

    ‘नितिन, तुम पार्किंग में से गाड़ी लेकर बस स्टैंड के पास आओ, मैं वहीं पहुंचती हूं’ राधिका ने कहा। ‘ठीक है’ कह कर नितिन गाड़ी लेने चला गया। राधिका को जब ज्यादा देर हो गई तो...

  • नज़र बट्टू (लघु कथा)

    नज़र बट्टू (लघु कथा)

    ‘भइया, 10 किलो नींबू और 5 किलो हरी मिर्च तोल दे जल्दी से’ कमला सुबह 4.30 बजे ही थोक सब्जी मण्डी में अपनी बेटी मीना के साथ आई थी। यह उसका रोजाना का काम था। ‘यह...

  • मैला रिश्ता

    मैला रिश्ता

    ‘अब आपकी फाईल नहीं मिल रही तो मैं क्या करूँ ? इतना पुराना रिकाॅर्ड है । बेसमेंट में स्टोर रूम की अलमारियों में गर्द छान रहा होगा । उस गर्द में तो जा पाना ही नामुमकिन...

  • तनेजा साहब का संकल्प

    तनेजा साहब का संकल्प

    ‘मि. तनेजा, आप जानते हैं कि स्कूल का नया सैशन शुरू होने जा रहा है, विद्यार्थी अगली क्लासेज़ में जायेंगे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आप विद्यार्थियों के लिए समय पर पुस्तकों और स्टेशनरी...

  • हम कहाँ जा रहे हैं

    हम कहाँ जा रहे हैं

    बड़ी अजीब सी होती जा रही है शहरों की रौशनी उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल होता जा रहा है नादान होता जा रहा है आज का इंसान अटकता है जब दुःख आता है भटकता है...


  • लघु कथा – तहज़ीब

    लघु कथा – तहज़ीब

    अमीर कालोनी की एक आलीशान गाड़ी में जब भी अलसेशियन कुत्ता जैक अपने मालिक के साथ सुबह सुबह हवाखोरी करने निकलता तो राह में मिलते सड़क के कुत्ते उसे देखकर भौंकते और काफी दूर तक पीछा...

  • नन्हे मासूम सपने

    नन्हे मासूम सपने

    ‘पिंकी … पिंकी … इधर आ …’ सपना चिल्लाई। ‘क्या है … क्यों चिल्ला रही है … क्या हो गया ?’ लटकते हुए चुम्बक से सड़क पर गिरे हुए लोहे के कबाड़ को चिपकाते हुए और...

  • दरख्त

    दरख्त

    ​तूफान ज़िंदगी के इतने झेले कि तूफान भी दोस्त बन गए, पर जिसके लिए दर-दर भटका वो किसी और के हो गए, सुन ऐ जिंदगी कुछ तो करामात कर, सुकून की बरसात कर, वक़्त दूर नहीं...