गीत/नवगीत

वाह वाह रच्चण हारया ….

हेलो वाणी वाह वाह रच्चण हारया …. वाह वाह रच्चण हारया तेरे रंग नियारे कुदरत रखते बन्न के क्या खूब नज़ारे हस्ती की सी बन्दे दी तू याद करा ती भजदी फिरदी दुनिया झट जाम करा ती अपणीं नज़रें बणया आपे तूं हीरो रखता करके मालकां तू पल विच ज़ीरो … पल विच ज़ीरो वेहण […]

ब्लॉग/परिचर्चा

बेजुबान

बेजुबान     ‘मां, क्या हमारे जुबान नहीं है?’ बछिया ने गाय मां से पूछा। ‘कौन कहता है?’ गाय मां ने कहा। ‘आज जब मैं तुम्हारा दूध पी रही थी तो हमारे अन्नदाता ने मुझे खींच लिया और दूध बर्तन में भरने लगा। अभी तो मेरा पेट भी नहीं भरा था। मैंने बहुत कोशिश की […]

ब्लॉग/परिचर्चा

महाभारत

महाभारत ‘ज़रा थोड़ी देर के लिए शांत रहो’ टीवी पर महाभारत का सीरियल देखती हुए दादी मां ने शोरगुल करते बच्चों से कहा। ‘क्या दादी मां, कितना बोर सीरियल है, हमें खेलने भी नहीं देतीं आप’ बबली ने कहा। जवाब में दादी ने बच्चों को इशारे से अपने पास बुला कर बिठा लिया और चुपचाप […]

कहानी

मेरा तिरंगा

मेरा तिरंगा  ——————–  ‘बाबू जी, बाबू जी, ये ले लीजिए तिरंगा’ टिमकी आते जाते लोगों को छोटे-छोटे तिरंगे झण्डे बेचने के लिए मेहनत कर रही थी। टिमकी की तरह और भी बहुत से बच्चे थे और साथ में उनके मां-बाप भी थे। क्यों न हों, 15 अगस्त को लोग इन्हीं तिरंगों को फहरा कर भारत […]

कहानी

स्ट्रीट चिल्ड्रन

स्ट्रीट चिल्ड्रन ‘देखा, उसके हाथ में कितना सुन्दर गिलास है’ बातुल ने गंजू से उस गिलास से कोई पेय पदार्थ पीते हुए अमीर से दिखने वाले लड़के की तरफ टुकुर-टुकुर देखते हुए कहा। बातुल और गंजू सड़क के बच्चे थे जिन्हें अंग्रेजी में स्ट्रीट चिल्ड्रन कहा जाता है और अंग्रेजी का यह शब्द ‘चिल्ड्रन’ संभवतः ऐसा […]

कहानी

भुट्टेवाला

‘भइया, क्या तुम्हारे पास नरम नरम और कच्चे भुट्टे हैं, छोटे बच्चों के लिए ले जाने हैं?’ सुरेखा ने बाज़ार में रेहड़ी पर भुट्टे वाले से पूछा जो गर्मी के बावजूद कच्चे कोयले की अग्नि में भुट्टे सेक सेक कर रखता जा रहा था।  ‘हां, बहन जी, बहुत हैं, कितने चाहिएं?’ भुट्टे वाले ने पंखा […]

कहानी

गुब्बारा

‘देखो भाई, इस हाल की हर दीवार को और छत को गुब्बारों से सजाना है । आज मेरी बिटिया का जन्म दिन है । गुब्बारे हरेक रंग के होने चाहिएँ, अलग-अलग डिज़ाईन के होने चाहिएँ । और हाँ छत के गुब्बारों के लिए गैस अच्छे से भरना । एकाध दिन तक छत पर टँगे रहने […]

लघुकथा

स्टैंडर्ड एक लघुकथा

‘नितिन, तुम पार्किंग में से गाड़ी लेकर बस स्टैंड के पास आओ, मैं वहीं पहुंचती हूं’ राधिका ने कहा। ‘ठीक है’ कह कर नितिन गाड़ी लेने चला गया। राधिका को जब ज्यादा देर हो गई तो वह पार्किंग में खुद जा पहुंची और देखा कि उनकी गाड़ी के आगे कोई अपनी गाड़ी लगा गया था। […]

लघुकथा

नज़र बट्टू (लघु कथा)

‘भइया, 10 किलो नींबू और 5 किलो हरी मिर्च तोल दे जल्दी से’ कमला सुबह 4.30 बजे ही थोक सब्जी मण्डी में अपनी बेटी मीना के साथ आई थी। यह उसका रोजाना का काम था। ‘यह लो, दोनों चीजें’ दुकानदार ने कहा और दोनों नींबू और मिर्च उठाकर सुबह की बस में बैठकर बाज़ार पहुंच […]

कहानी

मैला रिश्ता

‘अब आपकी फाईल नहीं मिल रही तो मैं क्या करूँ ? इतना पुराना रिकाॅर्ड है । बेसमेंट में स्टोर रूम की अलमारियों में गर्द छान रहा होगा । उस गर्द में तो जा पाना ही नामुमकिन है । मुझे वैसे ही धूल से एलर्जी है । अब आपकी एक फाईल के लिए मैं खुद पर […]