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  • बालकहानी-  खिलखिलाता परिवार

    बालकहानी- खिलखिलाता परिवार

    नदी के किनारे-किनारे सुंदरम गाँव बसा हुआ था। ऊंचे ऊंचे पहाड़ ,बहता हुआ पानी,महकते फूल और हरियाली के बीच खिलखिलाता गाँव। जो वहाँ आता जाने का नाम न लेता। गांववालों को ही नहीं,बच्चों तक को को...

  • कविता : प्रशंसा

    कविता : प्रशंसा

    प्रशंसा सुनकर लोग फूलकर कुप्पा होजाते हैं एक क्षण में अपनी औकात भूल जाते हैं। चलते हैं जमीन पर सोचते हैं आकाश की पल से पल में ही क्या से क्या हो जाते हैं। प्रशंसा एक...

  • मेरी दो लघुकथायेँ

    मेरी दो लघुकथायेँ

    1-जादू -अरे पापा आपकी अलमारी से इतने नोट झड़ पड़े। मैजिक–। कहाँ से आ गए। मुझे तो आप एक रुपया भी नहीं देते। -तू सब लेले। -सच में पापा। बच्चा दोनों हाथों से उन्हें बटोरने में...

  • लघुकथा : असली नकली

    लघुकथा : असली नकली

    मनोहर बहुत दिनों से ससुराल न जा पाया था। उसके ससुर का स्वास्थ्य कुछ ढीला ही चल रहा था इसलिए वे उससे आ कर मिलने का बार-बार आग्रह  कर रहे थे। मौका मिलते ही वह अपनी...


  • लघुकथा – अनुभूतियाँ

    लघुकथा – अनुभूतियाँ

    -ओह !तो तू इस मकान में रहती है? -इसे मकान न कहो—यह तो मेरा घर है। इसमें मुझे आराम मिलता है। अपनापन महसूस होता है। हर चीज मुझे प्यार करती नजर आती है। -ऊँह, बेजान का...

  • लघुकथा : सुहागिन

    लघुकथा : सुहागिन

    वृद्ध पति पत्नी जल्दी ही रात का भोजन कर लेते , अतीत की यादों को ताजी करते हुए टी वी देखा करते । एक दिन वृदधा जल्दी सो गई पर आधी रात को हड़बड़ाकर उठ बैठी...


  • लघुकथा : बंद ताले

    लघुकथा : बंद ताले

    छोटे भाई की शादी थी। दिसंबर की कड़ाके की ठण्ड। हाथ पैर ठिठुरे जाते थे, पर बराती बनने की उमंग में करीब १२० लोग लड़कीवालों के दरवाजे पर एक दिन पहले ही आन धमके। पिताजी सुबह...

  • लघुकथा : चुनौती

    लघुकथा : चुनौती

    पिता की बड़ी इच्छा थी कि बेटी खूब पढे–लिखे और विदेश जाये। बेटी ने उच्च शिक्षा तो प्राप्त कर ली मगर विदेश न जा पाई। संयोग से विदेश में रहने वाला लड़का मिल गया और शादी...