कविता

अफसाना

दिल से तेरी दूरी को, हम अपनी मजबूरी को तुमसे दूर रहने का बहाना बना लेते हैं दूर तुम आँखों से हो पास तुम सांसो के हो बस इन्ही अरमानो को ज़िंदगी बिताने का अफसाना बना लेते हैं हर शाम घुटन सी होती है दिल में चुभन सी होती है हर रात को तेरे सपने […]

कविता

रिश्ता

हर एक सूरत मुझे अब तो तेरी सुरत सी दिखती है देखता हूँ जिधर भी मैं तेरी मूरत सी दिखती है कभी दिंन के उजालों में रात के अंधेरों में बरसती बारिश की बूंदों में बसंत की बहारों में ना जाने क्या रिश्ता है , तुझसे के अब हर पल मुझको तेरी ज़रूरत सी दिखती […]

कविता

शौकीन

दर्द में डूबी हुई एक तस्वीर हूँ मैं ! टूटी हुई है हर एक कड़ी वो ज़ंजीर हूँ मैं ! आशाओं की डाल से टूटा एक पत्ता तेरे प्यार के दर्द का शौकीन हूँ मैं ! मंज़िल से भटका ठोकरें खाता फिरता हूँ परछाईयों के आगोश में तुझे ढूढ़ने का शौकीन हूँ मैं ! तुम्हारा […]