कविता

मेरे हायकु संग्रह से…

1. वह तितली बैठी गुलाब पर मैं मंत्रमुग्ध 2. ये प्रेमगीत ज्यों मधुर संगीत मन प्रसन्न 3. वह छुअन दिल हुआ तुम्हारा मैं प्रेममय 4. बन पथिक जीवन मृगतृष्णा भटके मन 5. यह दुनिया है हाट लुभावना तरसता मैं 6. ये जिन्दगी है अजब सी पहेली क्यों सुलझे ना 7. प्रात:काल में चमकें बन मोती […]

कविता

बरखा रानी – एक अरदास

तरसे मन तुम्हें मिलने को, आओ न बरखा रानी आग उगल रहा सूर्य, बरसाओ तुम्हीं शीतल पानी त्रस्त हुए जीव धरा के, बढी जा रही है व्याकुलता करो तुम्हीं तृप्त काया, याद सभी को आयी नानी सूखे सभी ताल-तलैया,भटकते हैं पंछी बिन पानी गर्मी झुलसाये तन-मन,दिनकर कर रहा मनमानी सब ढूंढते तरवर छाया, वनस्पति भी […]