कविता लघुकथा

देहदानी शराबी

युवावस्था से केतन को शराब की लत क्या लगी कि वह शराबी ही कहा जाने लगा। स्वभाव से सरल मिलनसार केतन सीमेंट फैक्ट्री में मैनेजर था। धुन का पक्का, मेहनती था। कभी शराब पीकर ड्यूटी नहीं गया।न ही फैक्ट्री में अपने शराबी दोस्तों को आने देता। शराब की ही वजह से उसने शादी नहीं की,ताकि […]

इतिहास

मैं हूँ न

क्या चिंता क्या ग़म करना जब तक मैं हूँ, न रोना,न परेशान होना जब तक मैं हूँ। हर दुविधा त्याग दो स्वच्छंद मस्त होकर जियो जितने भी दर्द तुम्हारे हैं सब मुझे दे दो आखिर मैं हूंँ न। निंदा नफरत त्याग दो ईर्ष्या द्वेष दूर भगा दो भला किसी का करो न करो पर किसी […]

कविता

पौत्र

पुत्र का पुत्र पौत्र जिसमें दिखे दादा को अपना बचपन। एक अजीब सी मस्ती छा जाती है दादा के चेहरे पर, दादा का दर्द जैसे काफी कम हो जाता है उस पल जब पौत्र होता दादा के संग। पौत्र को भी मिल जाती है जैसे हुड़दंग की आजादी, मम्मी पापा का डर नहीं होता दादा […]

कविता

सत्य असत्य

सत्य के चक्कर में पड़कर घनचक्कर न हो जाइए, सत्य की पहचान के चक्कर में न खुद को उलझाइए। ये कलयुग का दौर है यारों सत्य की चाशनी में न फंसे जाइए समय का तकाजा है फार्मूला आपको भी पता है। मुंह में राम बगल में छुरी छिपाकर असत्य के मार्ग पर चलिए सत्य का […]

कविता

विश्व शांति

  आइए! विश्व शांति की बात करते हैं अपने ही घर से सिर फुटौव्वल की शुरुआत करते हैं। हम इतने तो नासमझ नहीं लगते बिना अशांति के शान्ति की क्यों बात करें पहले अशांति फैलाते हैं फिर बड़े सूरमा बनते शांति दूत बन शांति का पाठ पढ़ाते हैं। जाति धर्म मजहब का झंडा बुलंद करते […]

कविता

सनातन संस्कृति

समय के साथ हम भी कितने सयाने हो गए हैं, वेद पुराण गीता उपनिषद घोलकर हम पी गए हैं। भूल गए संस्कृति सभ्यता भूल गए सब लोकाचार भूल पुरातनपंथी धारा भूल गए सब शिष्टाचार। भूल गए सभ्यता संस्कृति भूल गए करना सम्मान, भूल रहे माँ बाप को हम तनिक नहीं हो रहा भान। छोटे बड़े […]

कविता

प्यासी धरती

मजाक अच्छा है कि धरती भी प्यासी है, शायद यही सही भी है क्योंकि धरती रुंआसी सी है। छोड़ो इन बातों में रखा क्या है धरती प्यासी रहे या मर जाय हमें मतलब क्या है? हम तो अपनी मनमानियां करते रहेंगे हरियाली का नाश करते रहेंगे जल स्रोतों को दफन करते रहेंगे धरती को खोखला […]

कविता

सारा आकाश हमारा है

यह हमारी सोच दर्शाता है हमारे वैचारिक भाव उजागर करता है, हमारे चिंतन का फलक कितना बड़ा है यह दुनिया को बताया है, तभी तो हम गर्व से कहते हैं सारा आकाश हमारा है। बड़ी सोच जब रखते हैं हम अच्छा जब सोचते हैं हम सर्वहितकारी भाव जब रखते हैं हम तब ही तो कहते […]

कविता

देहदान कीजिए

आइए! इस नश्वर शरीर का अंतिम उपयोग करते हैं, नेत्रदान,देहदान करते हैं। इस संसार,समाज ने हमें क्या कुछ नहीं दिया, तो हम भी समाज को कुछ देते हैं, निष्प्राण शरीर का कुछ उपयोग करते हैं। जीवन में अच्छा बुरा जो भी किया कुछ फर्क नहीं पड़ता, कम से कम जीते जी ही मरने के बाद […]

कविता

ऐसा क्यों?

एक टीस मन को सदा कचोटती है, बेचैन करती चुभती है शूल सी। नहीं पता ऐसा क्यों है? न कोई रिश्ता, न कोई संबंध मान लीजिए बस तो है जैसे हो कोई अनुबंध लगता जैसे पूर्व जन्म का हमारे बीच कोई तो है संबंध। क्योंकि ऐसी बेचैनी, ऐसी चिंता यूं तो ही नहीं हो सकती, […]