इतिहास

माता पिता के दायित्व

लेख ————————— आज के इस व्यस्त वातावरण और तकनीकी युग में माता पिता के लिए भी अपने दायित्वों का निर्वहन कठिन होता जा रहा है। बढ़ती महँगाई ने जीवकोपार्जन के लिए बहुत सारे माता पिता काम पर जाते हैं ,ऐसे में दुश्वारियां और बढ़ती जा रही हैं। फिर भी हर माता पिता अपने दायित्वों की […]

इतिहास

मोबाइल

मोबाइल ◆◆◆◆ मोबाइल जीवन का अभिन्न अंग बन गया है, ऐसे लगता है इसके बिना जीवन में रखा ही क्या है? मोबाइल जन की जरूरत है, इसके बिना जीने की अब न कोई सूरत है। मोबाइल हमारी दिनचर्या का हिस्सा हो गया है, इसके बिना अब जीवन मात्र किस्सा भर हो गया है। ये सच […]

कविता

हिन्दी

यह कैसी विडंबना है कि हमनें हिन्दी को अपनी ही भाषा को उपेक्षित कर रखा है, हमें शर्म भी नहीं आती कि हमें हिन्दी दिवस हिन्दी सप्ताह, पखवाड़ा मनाना पड़ता है। अरे!हमसे अच्छे तो वो विदेशी हैं जो अपनी भाषा के साथ साथ हिन्दी को मान दे रहे हैं, हिन्दी सीख रहे हैं,सिखा रहे हैं […]

कविता

संस्कार

संस्कारों का भी अपना संसार है, संस्कारों पर भी सबके अलग मानदंड हैं। सब अपने अपने ढंग से संस्कार ही तो देते हैं, पर उन संस्कारों की परिधि से खुद को दूर ही रखते हैं। आज संस्कार भी विडम्बनाओं के जाल में उलझकर रह गया है। बाप बेटे को संस्कार ही तो देता है, अपने […]

कविता

अस्तित्व बचाइए

जल,जंगल और जमीन ये प्रकृति का उपहार है, पर्यावरण का ही नहीं हर प्राणी का जीवन आधार है। इसका संरक्षण, सम्मान सबकी जिम्मेदारी है, इनकी उपेक्षा हम सब पर पड़ने वाली भारी है। बाढ़,सूखा, ऊसर,भूस्खलन से जमीन को बचाना है तो अधिक से अधिक वृक्ष लगाना होगा, जंगलों का दायरा बढ़ाना होगा, जमीन पर हरियाली […]

लघुकथा

लघुकथा – कानून का फैसला

रामधनी बहुत गरीब था।किसी तरह मेहनत मजदूरी कर अपना और अपनी पत्नी का जीवन यापन करता था।उसके पड़ोस के बाबू जी उसकी जमीन खरीदना चाहते थे,मगर राम धनी बेंचना नहीं चाहता था। आखिरकार बाबू जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया और रामधनी को उसके अपने ही घर से अपने गुर्गों को भेज कर […]

कविता

विनती

हे हमारे पूर्वजों, पित्तरों मैं कुछ कहना चाहता हू्ँ, परंतु आप लोगों के क्रोध से डरता हू्ँ। पर आज कह ही डालूँगा काहे का डर वैसे भी अब डरकर क्या होगा? जब डरना था तब डरा नहीं, आप लोगों के दिखाये मार्ग का कभी अनुसरण किया नहीं। तभी तो आज रोता हूँ जो कल मैंने […]

लघुकथा

मुझे कुछ कहना है

बहुत दिनों से सोच रहा हूँ कि आप से कुछ बात करूँ।पर डरता था कि कहीं आप मेरी किसी भूल का गुस्सा न कर बैठें।वैसे तो आपको गुस्सा होने का पूरा अधिकार है।आखिर हम आपकी ही संतान हैं। आप कहा भी करते थे,डाँटते थे,समझाते भी थे, पर उस समय आपकी बातें खराब लगती थीं,पर अब […]

हाइकु/सेदोका

हाइकू

सुनहरा हो जीवन हर पल, सभी चाहते। ********** सब चाहते जीवन सुनहरा, हो हर पल। ********* जन जन की सुनहरे पलों की, ही चाहत है। ********* डर सबका ये सुनहरे पल, कब खो जायें। *********** विश्वास नहीं ये सुनहरा पल, चला भी गया। ************ भरोसा मुझे मेरा भी सुनहरा पल आयेगा। ********** खुशी मनाओ सुनहरे […]

लघुकथा

लघुकथा – भीख

कहते हैं लाचारी इंसान को कितना बेबस बना देती है।कुछ ऐसा ही मि.शर्मा को अब महसूस हो रहा है। कहने को तो चार बेटे बहुएं नाती पोतों से भरा पूरा परिवार है।मगर सब अपने अपने में मस्त हैं। महल जैसे घर में मि.शर्मा अकेले तन्हाई में सिर्फ मौत की दुआ करते रहते हैं।शरीर कमजोर है,आँखों […]