इतिहास

तनाव और जीवन

तनावों का जीवन में अलग ही है रोल , तनावों के बिना फेल है जीवन का भूगोल। तनाव है तो जीते हैं बिना तनाव भला आप क्या कर पाते हैं? तनावों के बिना दिन की शुरुआत अधूरी सी लगती है, तनावों के बीच ही तो कर्मक्षेत्र जरूरी सी लगती है, तनाव न हो तो सब […]

कविता

दिखावा

आजकल परोपकार में भी दिखावेपन का समावेश हो गया है, परोपकार कम और प्रचार का शौक हो गया है। रत्ती भर परोपकार का प्रचार पाने का लोभ बढ़ गया है, जिसके साथ परोपकार किया जाता है उसका सिरदर्द बढ़ गया है, एक कंबली बाँटकर बीस बीस लोगों के हाथ लगे फोटो से परोपकार का मर्म […]

कविता

माँ गंगा और हम

माँ गंगा का हम कितना मान सम्मान कर रहे हैं, अपने पाप धोते हैं साथ में कपड़ें भी धोते हैं, गंदगी फैलाते हैं प्रदूषण से माँ गंगा का क्या खूबसूरत श्रृंगार करते हैं। कितने भले लोग हैं हम जो अपनी पतित पावनी जीवनदायिनी माँ के आँचल को मैला करते हैं और बेशर्मी से उसी माँ […]

कविता

भ्रष्टाचार

अविश्वसनीय सा लगता है पर भ्रष्टाचार का दीमक हर ओर पहुँच ही जाता है, अब क्या क्या, कहाँ कहाँ बताऊँ अब तो कहते हुए भी शर्म लगता है। अब आप ही बताइये इसे क्या कहेंगे? अब तो लाशों के साथ भी भ्रष्टाचार होता है। कौन है जो दावा कर सके कि यहां भ्रष्टाचार नहीं होता […]

कविता

वादा

चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी ने अपने मतदाताओं से एक बार फिर निवेदन किया बस ! एकबार और मौका दीजिये, इस बार आप यकीन कीजिये इस बार मैं हमेशा आपके बीच रहूँगा, यहां नहीं तो लखनऊ, दिल्ली में जरूर मिलूंगा। फिर यदि वादे पर खरा न उतर सका तो अगली बार सिर्फ़ वोट की खातिर […]

कविता

लकीर

चलो माना कि हाथ की लकीरें बहुत कुछ कहती हैं। मगर सिर्फ़ इन्हीं के भरोसे मत रहिए, कुछ अलग कीजिये अपने लिए खुद भी एक लकीर खींचिये, फिर उस लकीर को ही बौना साबित करने की ठान लीजिए फिर उसके बाद उसे भी और उसके बाद उसे भी बौना साबित करते हुए आगे बढ़ते रहिए। […]

कविता

ये दिन

ये कैसी बेबसी लाचारी है, कोरोना भी अजीब बीमारी है। लोगों को दूर कर दिया, खौफ का साम्राज्य फैला दिया, रोजी रोटी पर प्रहार कर दिया, किसी तरह मेहनत मजदूरी कर वैसे भी जी रहे थे, परिवार को ढो रहे थे। अब तो उस पर भी आरे चल गये जीने के रास्ते अब और मुश्किल […]

कविता

रक्तदान

आपका किया रक्तदान तीन व्यक्तियों का जीवनदान। विचार कीजिये और लगे हाथ यह पुण्य काम कर डालिए। मन में संतोष होगा, आत्मसंतुष्टि मिलेगी, आपके इस कदम से किसी के आँगन में खुशियाँ महकेगी। रक्तदान का कोई मोल नहीं है ये अनमोल है, हम सबके छोटे से प्रयास का जाने किस किसके जीवन में बड़ा रोल […]

कविता

धनतेरस पर

धनतेरस पर कुबेर जी का जन जन पूजन करिये, धन,धान्य से सभी अपना भंडार भरिए। बस इतनी विनती है आपसे दीन, हीन,असहायों के लिए भी थोड़ी सी विनती करिए, किसी की झोली कुबेर की कृपा से न रहने पाये खाली, हर कोई मना सके खुशियों भरी दीवाली, सच मानिए तभी होगी सार्थक दीपों वाली दीवाली।

कविता

धनतेरस

आइए!धनकुबेर के नाम एक दीप जलाते है, कुबेर जी से आशीष पाते हैं। धनतेरस से ही दीवाली पर्व की शुरुआत होती है। आज हम धन कुबेर जी को मनाते हैं धन धान्य से भरपूर होने का सब वरदान चाहते हैं। आज इस बार हम सब अपने साथ साथ दीन हीन असहायों के लिए भी धन […]