कविता

अंतिम यात्रा

कड़ुआ पर सच है जीवन में अनगिनत यात्रियों के बाद हमें अंतिम यात्रा पर जाना ही होगा, हम लाख इस सत्य से दूर भागते रहें सच से मुंह छुपाते भागते रहें पर बच नहीं पायेंगे, अंतिम यात्रा से मुक्त होने का मार्ग या छुपने का स्थान भला कहाँ पायेंगे? जो आया है वो जायेगा भी […]

कविता

फर्क

फर्क कोई वस्तु नहीं बस महसूस करने का भाव है, फर्क नजरिए का भी होता है तो कभी हमारे तरीक़े में हम जिस नजरिए से देखते हैं फर्क हमें दिखता है। सबका अपना अंदाज है सबको फर्क दिखता है किसी को कम किसी को ज्यादा बस यही फर्क ही हर किसी में फर्क का फर्क […]

कविता

परछाईं

वक्त कितना भी बदल जाये हम कितने भी आधुनिक हो जायें, कितने भी गरीब या अमीर हों राजा या रंक हों नर हो या नारी हों परछाईं हमारी आपकी अपनी है। सबसे करीब सबसे वफादार साथ नहीं छोड़ती, हम चाहें भी तो भी नहीं मरते दम तक साथ निभाती है, हमारे साथ चिता तक जाती […]

कविता

पूस की ठंड

जब भी आती है पूस की ठंड सब कुछ अस्त व्यस्त कर जाती जीवन उलझा जाती । इंसान हो या पशु पक्षी सब बेहाल हो जाते ठंड से बचने बचाने के हरदम उपाय करते, बस! जैसे तैसे जीवन जीते जल्द बीते ये पूस की ठंड सब यही प्रार्थना करते। निराश्रित, असहाय, गरीबों, निर्बल वर्ग और […]

कविता

प्रेरणा

कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी में उम्मीद की किरण फैला सकता है। हताश निराश व्यक्ति को उत्साह से भर सकता है, किसी की प्रेरणा किसी को इतिहास बनाने का हौसला दे सकता है, प्रेरणा जीवनदान बन सकता है, मुर्दा जी जिंदगी में जान ला […]

कविता

विश्वास

विश्वास क्या है कुछ भी तो नहीं सिवाय भावों के अनुबंध के जिसकी डोर नाजुक भी होती तो बहुत मजबूत भी। बस! हम पर निर्भर है कि हम कैसा विश्वास करते या करा पाते  हैं, नाजुक या मजबूत विश्वास की नींव रख पाते हैं। हम कितना विश्वास करते हैं या किसी पर जमा पाते हैं, […]

कविता

जनवरी की ठंड

नववर्ष के साथ कहें या जनवरी के साथ या फिर दोनों साथ साथ आते। मगर विडंबना देखिये दोनों नया संसार, विचार भी लाते पर हाय रे जनवरी और नववर्ष तुम जरा भी नहीं शर्माते कड़ाके की ठंड, शीतलहर अपने साथ लाते दोष एक दूजे पर लगाते, कितना हठ दिखाते, पर दोनों यह भी नहीं सोचते […]

लघुकथा

ठंड के बीच जीवन

अरे रधिया!सुन आज हम तेरे घर चलेंगे। यह सुन एकपल के लिए रधिया अवाक रह गई। मगर काहे को मालकिन। बस यूं ही और हाँ तेरी बेटी की पढ़ाई कैसी चल रही है? मैं कछू नहीं जानत हूँ मालकिन पर म्हारी बिटिया फटे कंबल में लपटी देर तक पढ़त है। क्यों क्या तुम्हारे पास ओढ़ने […]

कविता

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां

नववर्ष के साथ नयी नयी चुनौतियां भी कम नहीं है, ओमीक्रान पहले से ही डरा रही है, राजनीति का पराभव किसी खतरे से कम नहीं है, नेताओं के बिगड़ते बोल देश की मानसिकता दूषित कर रहे हैं, स्वार्थ में अंधे नेता देश के लिए जोंक से कम नहीं हैं। अराजकता और आतंकवाद फैलाने के खतरे […]

कविता

अलविदा

अब तुम जा रहे हो न तनिक सकुचा रहे हो, लगता है बड़े बेशर्म हो गये हो। जाओ न हम भी कहां कम हैं तुम्हारे जाने से कुछ फर्क नहीं पड़ता बस हमारे जीवन का एकवर्ष अपने साथ ले जा रहे हो, अपने भाई को  हमारे सिर पर बैठाकर भी जा रहे हो। तुम अच्छे […]