कविता

काश ! मैं प्रधानमंत्री होता

काश ! मैं देश का प्रधानमंत्री होता तो पाक को आखिरी सबक सिखाता फिर भी न मानता तो इतिहास में रह जाता। जाति धर्म का भेद मिटाता आरक्षण हटाता, हर गरीब को शिक्षा के लिए आर्थिक सुविधा का कानून बनाता मजहब के नाम पर फूट डालने वालों दंगा करने/कराने वालों को आजीवन कैद का कानून […]

कविता

छिनता बचपन

यह कैसी विडंबना है कि देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है, फिर भी देश आज भी बाल मजदूरी का दंश सह रहा है। आज भी बच्चों का बड़ा हिस्सा बाल मजदूरी की भेंट चढ़ रहा है, जाने अनजाने छिनता बचपन भूख की विवशता पारिवारिक मजबूरियों की लाचारी बेबसी के चलते उनका बचपन […]

कविता

हिमालय या हौसला

ये हमारी सोच दर्शाता है, हमारा हौसला हिमालय से भी टकरा जाता है। ये सच है हिमालय बड़ा ही नहीं बहुत बड़ा है, पर हमारे हौसले के सामने नतमस्तक होकर खड़ा है। हमारे हौसले के आगे वह भी झुक गया है, हमारे हौसले को देख अपना अस्तित्व ही भूल गया है। हमारे हौंसले को हिमालय […]

कविता

ताल से ताल

आइये सब मिलकर ताल से ताल मिलाते हैं, नवप्रभात का नया सूर्य मिलकर उगाते हैं। मन,वाणी कर्म से मतभेद मिटाते हैं, नयी परिकल्पना का सूत्रधार बन आगे आते हैं। सबके मन में सुंदर, स्वच्छ सरल भाव जगाते हैं, दुनिया समाज में परिवर्तन की अलख जगाते हैं। सब मिलकर नया इतिहास रचाते हैं, दुनियां को खुशहाल […]

कविता

प्यार की खुशबू

आइए बाँटते हैं प्यार की खूशबू, ऊँच नीच,छोटे बड़े जाति,धर्म, सम्प्रदाय को भूल सबसे हिलमिल कर रहें सुख दुःख में सहभागी बने निंदा नफरत भूलकर सुंदर, सरल,निर्मल संसार बनायें जीवन में प्यार की खुशबू फैलाएं। कोई नहीं है दुश्मन मेरा सब अपने हैं भाव ये मेरा, सब के मन में प्यार जगायें एक नया संसार […]

कविता

पिता:पहले और बाद

अब महसूस होता जब आप हमें छोड़ गये। जब तक आप थे तब दो बच्चों का बाप होकर भी बच्चा बना रहता था, तब पूरी आजादी से जीता था। न चिंता, न फिक्र थी हर समस्या आप तक पहुंचकर खत्म हो जाती थी। फिर भी आपने कभी कुछ नहीं कहा बस!इशारों में समझाते रहे माँ […]

कविता

विकास दिवस

आइए विकास दिवस मनायें दिवस मनाने की भी औपचारिकता निभाएं। क्योंकि औपचारिकता निभाने के तो हम उस्ताद हैं, विकास की गंगा का मीठा मीठा स्वाद है। विकास तो विकास है अपना हो या समाज या फिर राष्ट्र का। आखिर विकास तो जरूरी है हम सबकी मजबूरी है, इसलिए विकास का रोडमैप बहुत जरुरी है, मेरे […]

कविता

खामोशी

मेरी खामोशी ही मेरा ईमान धर्म है, मगर गफलत मत पालिए कि मैं कमजोर हूँ। न मैं कमजोर था न कमजोर हूँ न कमजोर रहूंगा। मेरी खामोशी आप पर सदा भारी रहेगी, दोस्तों से तो दोस्ती मगर जुल्म, अन्याय, अनाचारियों पर बहुत भारी पड़ेगी। मेरी खामोशी से टकराने की भूल मत करना वरना बहुत पछताओगे, […]

कविता

तुम्हें देखकर

तुम्हें देखकर सारी थकान, मन का बोझ छूमंतर हो जाता है, तन मन में उत्साह, उल्लास सा छा जाता है। जब से तुम आई हो मेरे घर आँगन में खुशियों का भंडार भर गया है मेरा, अब तो बस तुम्हें देखता हूँ खूब प्रफुल्लित होता हूँ ऐसा लगता है जैसे सातवें आसमान पर बैठा हूँ। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

संस्कृति और संस्कार

कहने के लिए तो ये दो मात्र साढ़े तीन अक्षरों वाले शब्द मात्र हैं परंतु इनकी गहराई और व्यापकता बहुत उच्च भाव का प्रकटीकरण करती है। हमें हमारे पुरखों से जो संस्कार और संस्कृतियों का सुंदर समन्वय प्राप्त हुआ था वह आज धीरे लुप्त हो रहा है।कहना गलत न होगा कि आज हम अपनी ही […]