भजन/भावगीत

माँ कालरात्रि

सप्तम रूप माँ जगदम्बे का माँ कालरात्रि कहलाये, शुभकारी फल देती मैय्या शुभंकारी भी कहलाये। रुप भयानक, डरावनी पर भक्तों को नहीं कमी, दुष्टों का विनाश है करती काल विनाशिनी माँ। भूत प्रेत सब दूर रहे अग्नि, जल,शत्रु का न भय, ग्रहबाधा का नाश करे कालरात्रि माँ। एकनिष्ठ, नियम,संयम से पवित्र मन,वाणी,काया से, जो भी […]

कविता

प्रतिष्ठा

जिस तरह इन दिनों महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार बढ़ रहा है, हम मस्तक शर्म से झुक रहा है। हम सबको सोचने की जरूरत है या हमें बेशर्मी की आदत है। अब तो सचेत हो जाओ बहन बेटियों की इज्ज़त लुटने से बचाओ। वरना वो दिन दूर नहीं जब घर में भी बेटियां महफूज नहीं रहेंगी, […]

कविता

मेरी चाहत

क्या कहूँ? शब्द जैसे खो गये हैं लगता है ऐसे जैसेतुम्हारे प्यार की बंदिशों में सो गये हैं। तुम्हारी तारीफों के लिए शब्द कहाँ से लाऊँ? शब्द भी इठला के मुझसे दूर होते जा रहे हैं। तुम क्या आई जिंदगी जिंदगी में रंग भर दी, प्यार के रस घोलकर जिंदगी मधुमास कर दी। थी अकेली […]

कविता

रावण मारीच संवाद

सूर्पनखा की दशा देख रावण बहुत अकुलाया, आनन फानन में उसने मामा मारीच को बुलवाया। फिर मारीच को रावण ने अपना मंतव्य बताया, रावण का मंतव्य जान मारीच बहुत अकुलाया। रावण बोला मामा तुम छल का उपयोग करो, सीता को भरमाकर राम को दूर करो। निपट अकेली सीता कुटिया में जब होगी, धर मायावी रुप […]

भजन/भावगीत

माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की कन्या माँ कात्यायनी कहलाती, माँ के षष्टम स्वरूप में जग में पूजी जाती। स्वर्ण सदृश्य चमकती है माँ शोक,संताप है हरती, रोग, दोष भय माता अपने भक्तों के हर लेती। कालिंदी के तट जाकर ब्रज की गोपियों ने पूजा, पति रूप में मिलें कन्हैया माँ कात्यायनी को ही पूजा। सूर्योदय से पूर्व […]

बाल कविता

रेलगाड़ी

छुक छुक करती आती रेल हम सब को ले जाती रेल हो गरीब या हो अमीर शरणदात्री सबके रेल। चाहे पास या हो दूर सबको ही ले जाती रेल सुविधाएं मिलती हैं ढेरों कम खर्चे में करें सवारी। चाहे अकेले जाना हो या परिवार को ले जाना हो, सबकी सुविधा सबकी रेल पैसा कम और […]

कविता

शबरी

मतंग मुनि की शिष्या शबरी कुटिया बना कर हर रोज प्रभु आगमन की आस में राह के काँटे चुनती फूल बिछाती और प्रभु की राह तकती, आस न छोड़ती विश्वास डिगने न देती, उसे पक्का विश्वास था उसके प्रभु राम आयेंगे उसको न बिसरा पायेंगे। अंततः उसका विश्वास जीत गया, प्रभु राम का उसकी कुटिया […]

कविता

गृहलक्ष्मी

माता पिता परिवार छोड़ आई है, मेरी पत्नी गृहलक्ष्मी सी मेरा सौभाग्य लाई है। सबसे पहले जगती सबके बाद में सोती है इक पल चैन न पाती फिर भी रहे मुस्कराती है। अपनी पीड़ा छिपाती परिवार की खुशियां सजाती, सास,ससुर,देवर,जेठ ननद,बच्चों में उलझी सबकी खुशियों का प्रबंध करती। माँ बाप,भाई बहन को याद चुपके से […]

भजन/भावगीत

माँ स्कंदमाता

स्कंदकुमार कार्तिकेय की माता जगत जननी का पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता कहलाती, चतुर्भुजी, कमल पुष्प धारिणी वरद मुद्रा, गोद में पुत्र लिए कमलासन,पदमासना, वातस्लय की देवी, विचार चेतना शक्तिदात्री पहाड़वासिनी,शुभ्रवर्णी, सिंह सवार,मां स्कंदमाता इच्छित फलदात्री मूढ़ को ज्ञानी बनाने वाली, नवचेतन निर्मात्री सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री जन कल्याणी माँ स्कंदमाता भव सागर से पार उतारती। पीत […]

कविता

भरत मिलाप

लौटकर ननिहाल से भरत अयोध्या आये, नगरवासियों की नजरों में शंका के बादल देख किसी अनहोनी से बहुत घबड़ाये। राज महल में पहुंच कर जाना भैया राम गये हैं वन में पिताजी स्वर्ग सिधाए। अपनी माता को फिर बातें बहुत सुनाये। राम से मिलने वन जाने की व्याकुलता दिखलाये। तीनों माताएं,गुरू और शत्रुघ्न संग जंगल […]