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  • मासूमियत

    मासूमियत

    न जाने क्या था उन आंखों में समझ नही पाई अभी इंसानो की भाषा समझ रही थी वो हैवानियत की भाषा पढ़ नही पाई कहना चाहती तो थी मगर कुछ कह नही पाई नासमझी के आंसुओं...





  • गुल्लक

    गुल्लक

    बचपन में इक गुल्लक होती थी मेरी तो पूरी तिजोरी होती थी वही जितने पैसे भी बचते थे जमा कर के रख लेती थी कितना संभाल के रखती थी मेरी जायदाद होती थी वही अब पैसा...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    इक कुर्सी और खिड़की जैसे ज़िन्दगी सिमट के रह गयी थी वहीं जीवन की सांझ न खत्म होता इंतज़ार इंतज़ार भी अपने दिल के टुकड़ों का जो दिल मे रहते है मगर नज़रों से कोसों दूर...