कविता

सुनो माँ

सुनो माँ! कभी तुम भी तो लड़की हुआ करती होगी ना किसी बात पे अपने पापा से झगड़ती होंगी जरा सा हाथ जलता होगा तो चिल्लाती होंगी तब तुम यूं खामोशी से हर दर्द नही सहती होंगी माँ कभी तुम भी तो लड़की हुआ करती होगी न कभी रात भर बहनों के साथ जागकर तुम्हारी […]

कविता

ये जीवन

जीवन है खेल कठपुतली का वो ऊपर बैठा सूत्रधार, कभी हँसाता, कभी रुलाता फिर बुलंदियों पर पहुँचता कभी ख़ाक में मिलाता जीवन है खेल कठपुतली का कभी अपनों को पराया कर जाता कभी अजनबियों में कोई अपना मिल जाता डोर खींचता, कभी ढील छोड़ देता यहां से उठाकर, वहां गिराता और गिरा के फिर कभी […]

कविता

दोस्ती

दोस्त एहसानों के कर्ज़ चढ़ा कर भी ज़िन्दगी को हल्का कर देते है… रिश्ते वो दिल में बस के साँसों की जरूरत बन जाते है…. रहते वो हवा की तरह आसपास, मगर देखो तो कहीं नज़र नही आते बांधों तो मुट्ठी में कैद, छोड़ो तो भी, हथेलियों पर मौजूद ही रहते है… दोस्त एहसानों के […]

कविता

जीवन मंच

दुनिया जैसे मंच कठपुतली का वो ऊपर बैठा सूत्रधार है किसी को कभी हँसाता, कभी रुलाता कभी बुलंदियों पर पहुँचता कभी ख़ाक कर जाता है दुनिया जैसे मंच कठपुतली का कोई रूठता, कोई मनाता यहां से उठाकर, वहां बैठाता और कभी गिरा कर गले लगाता कोई न जाने कब, किसकी डोर खिंच जानी है जब […]

कविता

कविता

रिश्तों को जान पहचान की सीमाओं बाँध दिया हंसी में अपने आंसुओं को छुपा लिया जज़्बातों को मौन में छुपाया है कह दूँ भी तो सुनेगा कौन सुन ले तो मेरे संग रोयेगा कौन ये दुनिया का मेला है जहाँ आया अकेले तू, जायेगा भी अकेला है साथ कुछ लाया नहीं, और ले भी क्या […]

कविता

माँ की कलम से

न जाने किसने ये कह दिया कि अपनेपन में “Thank you” या “sorry” नही कहा जाता आज मन किया कि तुम्हें sorry कह दूँ पर तुम्हें मुझसे ये सुनना पसन्द नही क्योंकि मैं तुम्हारी माँ हूँ ना फिर सोचा love you कहूँ पर जब अपने बीच कुछ ठीक नही हुआ होता है उस वक़्त तुम्हें […]

कविता

मासूमियत

न जाने क्या था उन आंखों में समझ नही पाई अभी इंसानो की भाषा समझ रही थी वो हैवानियत की भाषा पढ़ नही पाई कहना चाहती तो थी मगर कुछ कह नही पाई नासमझी के आंसुओं से आंखें भर आईं समझ ही नही आया क्या हो रहा था मेरे साथ ये बाबा की मुस्कान और […]

कविता

मौकापरस्त सच

तुम कहते हो कि तुम झूठ नही बोलते, अच्छी बात है, पर क्या सच बोलते हो हर बार बोलते होंगे शायद पर क्या किसी को अपने सच से खुश करते हो, सच तो हमेशा कड़वा होता है ये कह कर क्यों सच को बदनाम करते हो क्यों न हम सच भी ऐसा बोलें जो खुशियां […]

कविता

मैं बेस्ट तो नही मगर..

मैं कहीं भी बेस्ट तो नही हूँ, पर मैं ‘मैं’ हूँ, बचपन मेरा बेस्ट न सही पर बेटी अच्छी हूँ, मम्मी पापा के चेहरे पर मेरे लिए गर्व ही एवार्ड है मेरा और ये भी है कि भूत को सोचूंगी ज़्यादा तो वर्तमान कैसे संवारूँगी बेस्ट हाउसवाइफ न सही पर वाइफ अच्छी हूँ, घर की धूल […]

कविता

आज़ादी का त्योंहार

आज़ादी का जश्न, आज़ादी, कितना प्यारा शब्द है कौन नही चाहता अपनी आज़ादी बच्चे, बुड्ढे, औरत या आदमी आज़ादी की हवायें, सभी को है प्यारी पर इतनी आसानी से मिलती कहाँ है आज़ादी? लड़ना पड़ता है कभी दूसरों से और कभी तो खुद से और फिर यूँ भी है कि जो मिल जाये आसानी से, […]