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  • दोस्ती

    दोस्ती

    दोस्त एहसानों के कर्ज़ चढ़ा कर भी ज़िन्दगी को हल्का कर देते है… रिश्ते वो दिल में बस के साँसों की जरूरत बन जाते है…. रहते वो हवा की तरह आसपास, मगर देखो तो कहीं नज़र...

  • जीवन मंच

    जीवन मंच

    दुनिया जैसे मंच कठपुतली का वो ऊपर बैठा सूत्रधार है किसी को कभी हँसाता, कभी रुलाता कभी बुलंदियों पर पहुँचता कभी ख़ाक कर जाता है दुनिया जैसे मंच कठपुतली का कोई रूठता, कोई मनाता यहां से...

  • कविता

    कविता

    रिश्तों को जान पहचान की सीमाओं बाँध दिया हंसी में अपने आंसुओं को छुपा लिया जज़्बातों को मौन में छुपाया है कह दूँ भी तो सुनेगा कौन सुन ले तो मेरे संग रोयेगा कौन ये दुनिया...


  • मासूमियत

    मासूमियत

    न जाने क्या था उन आंखों में समझ नही पाई अभी इंसानो की भाषा समझ रही थी वो हैवानियत की भाषा पढ़ नही पाई कहना चाहती तो थी मगर कुछ कह नही पाई नासमझी के आंसुओं...





  • गुल्लक

    गुल्लक

    बचपन में इक गुल्लक होती थी मेरी तो पूरी तिजोरी होती थी वही जितने पैसे भी बचते थे जमा कर के रख लेती थी कितना संभाल के रखती थी मेरी जायदाद होती थी वही अब पैसा...