कविता

व्यंग्यबाण

मुख पर सुरीले गीत ह्रिदय रसहीन वाणी झरे मेह मन करुणा विहीन सुहाता जिन्हें निज स्वार्थ ही केवल करें श्रृंगार किन्तु मुखड़ा श्री हीन आत्म मुग्ध ऐसे कोई भाता ना आप अपनी महिमा बताते प्रवीन दूजे को गिराते  अपनी जमाते आत्म प्रशंसा नित ही गढ़ते नवीन मिले यदि स्वयं से बली चुप लगाते गाते प्रवंचक […]

कविता

प्रिय ‘हिन्दी’ को नमन

हिन्दी दिवस पर मेरी प्रिय भाषा तुम्हें नमन अतिशय प्रचुर तुम्हारा गरिमामय शब्द धन राष्ट्र भाषा , संपर्क भाषा ,जन भाषा तुम्ही निज सामर्थ्य से प्रेषित करो जग में कवि मन प्राकृत शौरसैनी संस्कृत की श्रेष्ठ सुता उन्नति मूल कहते  भारतेन्दु की वंदिता वैज्ञानिकता हो चुकी प्रमाणित तुम्हारी निज डोर बांधी भारत की तुमने एकता […]

हास्य व्यंग्य

ऑनलाइन शिक्षा (एक व्यंग)

कोरोना महामारी के चलते आम जनता के जीवन में तूफ़ान आया हुआ है ताली पीटकर थाली पीटकर और फिर टोटल लॉकडाउन करने की कोशिशों के बाद भी यह (कोरोना) ना पलटा बल्कि देश की जनसंख्या की तरह आगे ही बढ़ता जा रहा है। इधर कोरोना बढ़ा, उधर आर्थिक समस्याएं और दोनों की जंग में लॉकडाउन […]

गीतिका/ग़ज़ल

नव युग संदेश 🌻

कब तक औरों पर निर्भर रह जाए आत्मनिर्भर आइए अब हो जाएं ना कच्चा माल बाहर भेजेंगे तैयार समान अब बेचें जाएं पेड़ और वनों को अब ना काटें मिलके वृक्ष धरा पर नए लगाए मैकाली शिक्षा क्यों ढोते जाएं अब अपनी नव शिक्षा नीति बनाएं मुमकिन नहीं सबकुछ सरकार करें कर्तव्य अपने सभी जरुर […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलीया छंद

  🌻कुण्डलीया छंद🌻 🌻१🌻 सुन्दर ऐसा चाहिए ;जो मन मंजुल होय सुंदर सदैव, मन भला ;तन छवि देता खोय तन छवि देता खोय; बूढ़ा तब तन ना भावै फीकी आंखें होय; गात श्वेत ना लुभावै अरूणिम अधर खोय :जर्जर हो काया मंदर कह सुनी बना रहे; सु मन सदा ही सुंदर 🌻२🌻 संतोष  उर धरे सदा:लोभ कभी […]

कविता

भारत हमारा विश्व में महान है

भारत हमारा विश्व में महान है देव देते “अवतरण”का सम्मान है बर्फ से लदी हिमालय की चोटियां फूलों से लदी मनमोहक घाटियाँ आंखों के सुख का सामान है भारत हमारा विश्व में महान है वेदों की गुंजार यहां गंगा की धार है रामायण गीता देती जीवन का सार है धर्म अर्थ काम मोक्ष में होता […]

गीत/नवगीत

बधाई गीत

जन्मभूमि परम सुखदाई पूजित होगी रघुराई मंगल दीप जले हैं घर-घर फिरेगी राम दुहाई सज रही है फिर से अयोध्या नगरी पुण्यदाई देख देख तैयारी सरजू मैया मुस्काई राम काज करने को आतुर गड़ी भवन में रौनक छाई जन्म भूमि पूजित होती है हनुमत जी तुमको हो बधाई सावन बरसा बादल गरजे मणि पर्वत बसंत […]

कविता

“आम” जी आप जरा हट जाइए

माननीयों की निकली सवारी। “आम” जी आप जरा हट जाइए छोड़े बॉस का डर, करें न फिकर। एंबुलेंस में भी है आप अगर । जल्दी है तो वहीं निपट जाइए। “आम” जी आप हट जाइए । इनकी गाड़ी चलेगी अगाड़ी । तोड़ेगी सिग्नल और देगी गाली ‌। आंख मूंदिए या पिट जाइए। “आम” जी आप […]

भजन/भावगीत

शिव स्मरण

(छंद-वाचिक श्येनिका, 21 21 21 21 21 2 ) नाग, धारि, काम आरि ओम हो नील लोहित शिव अव्यग्र व्योम हो नील कंठ अमरनाथ शरण दें सोमनाथ आदिनाथ तरण दें आशुतोष चारुविक्रम नाथ हो वामदेव शूल पाणि तात हो सर्वज्ञ जगत के गुरू पशुपति हो सात्त्विक अष्टमूर्ति अमर यति हो रूप कोटि-कोटि नाम अनन्त हैं […]

कविता

गुरु सु जीवन का आधार

गुरु सु जीवन का आधार गुरु का हो सदा ही सत्कार हरि रूठे तो गुरु सहायक गुरु रूठे तो कहां उद्धार गुरु सत्संग की महिमा गाए नाम सुमिरन की राह दिखाएं खोल देता गुरु ज्ञान के द्वार गुरु सु जीवन का आधार प्रकाश स्तंभ गुरु जीवन में स्व स्वरूप दिखाएं मन दर्पण में हो उन […]