बाल कविता

पर्यावरण स्वच्छ बनाओ।

वृक्षों से धरती सजाओ, पर्यावरण स्वच्छ बनाओ। इधर-उधर कूड़ा मत फैंको, धरती का कण-कण महकाओ॥ पोलीथीन से नाता तोड़ो, जूट के बैग सब अपनाओ। वाहन कम से कम चलाओ, धुंए से सबको बचाओ। आओ सब मिल पेड़ लगाएँ, पर्यावरण स्वच्छ बनाएं। अपनी प्यारी  धरती माँ को, हम प्रदूषण मुक्त बनाएं॥ — सुरेखा शर्मा

लघुकथा

बड़ी सोच

सेठानी रसोईघर में बरतन समेटते हुए बड़बड़ाए जा रही थी, तभी पड़ोसन आ धमकी जले पर नमक छिड़कने । “क्या हुआ पुरसोत्तम की माँ, ,क्यों सुबह-सुबह इन बेजान बरतनों पर बिगड़ रही हो?” “अरे सुमित्रा बहन, आओ….आओ, देख ना सूरज सिर पर चढ़ आया पर वो सु गना है कि अभी तक नहीं आई,,घर का […]

लघुकथा

लघुकथा : मदर्स डे

कई दिनों बाद आज पड़ोस में रहने वाली काकी के  घर उनका हाल-चाल पूछने  गयी तो उनका मुरझाया चेहरा देखकर हैरान रह गयी। लग रहा था जैसे वे कई दिनों से बीमार हों, फिर भी कमीज पर तुरपाई करने में लगी हुई थीं। तभी उनकी उंगली में सूई चुभी और खून की बूंद निकली।भाग कर […]

लघुकथा

देवी पूजा

आंख खुलते ही हर रोज की तरह आज भी रसोईघर से मम्मी  की आवाज के साथ -साथ बरतनों की उठापटक की आवाज सुनाई दी,पर हैरानी की बात आज कामवाली बाई की आवाज नहीं आ रही थी। जाकर देखा तो माँ नौकरानी  की बेटी को डांट रही थी जो रोते-सुबकते रात के झूठे पडे बरतनों  को […]

कहानी

तपस्विनी

समाचार-पत्र का पृष्ठ खोलते ही उसमें छपे चित्र पर जैसे ही मेरी दृष्टि पड़ी तो नीचे लिखी पंक्तियों को एक ही सांस में पढ़ गयी |जिसे पढकर तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा | घर में सभी को ये समाचार पढकर सुनाया कि शुभम का एच० सी० एस० में चयन हो गया है […]

कविता

होली गीत “हवा चली होली में”

नर-नारी का तन-मन महके हवा चले जब होली में, झूमें नाचें खुशी मनाएँ हवा चले जब होली में। पीली सरसों खिले खेत में, हवा चले जब होली में। नई-नई कोंपल खिल जाएँ, हवा चले जब होली में। भीनी-भीनी गंध बिखेरें, फूल खिलें जब होली में।                           रूठे जन को प्रिय मनाएँ, गले लगा कर होली में। […]

कविता

पर्यावरण

वॄक्षों से धरती सजाओ, पर्यावरण स्वच्छ बनाओ। इधर-उधर मत कूड़ा फैंको, धरती का कण-कण महकाओ। पोलीथीन से नाता तोड़ो. जूट के बैग सब अपनाओ। वाहन कम -से-कम चलाओ. धुएं से सबको बचाओ। आओ सब मिल पेड़ लगाएँ जग प्रदूषण मुक्त बनाएँ अपनी प्यारी धरती का पर्यावरण स्वच्छ बनाएँ। — सुरेखा शर्मा

कविता

गीत – बसंत

बसन्ती रूप निराला देख , मचाता पागल मनवा शोर । मोर के पंखों जैसी छटा , दिखाती सुंदर जग की भोर ।| हिमानी शीत गयी है बीत , बहे अब सुरभित मंद बयार मचाती तन-मन में हलचल, गिराती संकोची दीवार । उठो देखो ये मधुमय मास , उमंगों की जो बांधे डोर | बसन्ती रूप […]

लघुकथा

लघुकथा- “कामवाली”

सुबह-सुबह मम्मी-पापा  में  फिर झगडा शुरू हो गया था। मम्मी रसोईघर में बरतनों की जोर जोर से उठापटक के साथ-साथ बडबडाए भी जा रही थी, ”सुबह-सुबह उठो, बच्चों को उठाओ, स्कूल के लिए तैयार करो, नाश्ता बनाओ, स्कूल भेजो, फिर घर की साफ सफाई में लग जाओ, इनसान ना हों जैसे कोई मशीन हों।यह भी […]

कविता

नववर्ष

नववर्ष कुछ ऐसा आए, हर्षोल्लास की वर्षा लाए। उपहारों से झोली भर दे, रंग-रंगीला जीवन कर दे॥ गजानन आशीष देकर, सुख समृद्धि की वर्षा कर दें ।। माँ वीणा विराजे वाणी में, अपनी शक्ति कलम में भर दें ॥ कविता  उससे  निखरे ऎसी, विख्यात विश्व में  हमको कर दे॥ गूंजे स्वर कविता के जग में, […]