गीत/नवगीत

कजरी (अवधी)

पांच अगस्त को अयोध्या में प्रभू श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा है। गांव की एक राम भक्तन ने अपनी सखी से कहा,” मंदिर तीन मंजिला का होगा, मतलब तीनो लोकों का प्रतीक। मंदिर में ३६६ खंभे होंगे जो वर्ष के हर दिन के प्रतीक हैं। पांच शिखर (गुंबद) पांच ज्ञानेंद्रियों के प्रतीक हैं। […]

कविता

बिना मात्राओं वाला छंद

अजब-गजब जग, नर छल मत कर, धरम-करम कर, जनम सफल कर । यह तन, मन,धन,जल,थल, परबत, सब अब रब कर, कनक,कनक,चर। मन खग जस बन,अब कलरव कर, धर न भरम पथ, यह जग सरवर । कदम-कदम पर,खटपट मत कर, छल बल तज हर, शरण ग्रहण कर। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

महान डाकू मोहर सिंह का निधन

मोहर सिंह डाकू गयो, धरा छोड़ि यमलोक मचा लुटेरों के जगत, में दुखदाई शोक में दुखदाई शोक, अरे कुछ दिन रुक जाते लूट जगत की महिमा,रुतबा,शान बढ़ाते, कह सुरेश वह बोले,’सहन न होवे खिल्ली’ हमसे बड़े-बड़े डाकू चुनि चलि गै दिल्ली। — सुरेश मिश्र

कविता

शराब की दुकानों पर गरीबों की लंबी कतार

खाने के पैसे नहीं, तो पीने के पैसे कहां से लाते हो, देशवासियों और,  सरकार को बेवकूफ क्यूं बनाते हो? उस गरीब की आंखें भर आईं, बताते-बताते उसे आ गई रुलाई। राशन के लिए रोज लाइन लगाते हैं, भोजन के पैकेट से, भूख हम मिटाते हैं। देश की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है, सुना है, रसातल […]

गीत/नवगीत

जनता कर्फ्यू के विरोधियों को संदेश

भारत मां की खातिर, कितनों ने कुर्बानी दीन्हा, तुम कहते हो,”हमको घर में नजरबंद कर दीन्हा”। इसी वतन की खातिर, सावरकर ने क्या-क्या झेला, अंग्रेजों ने पांच दशक तक,उनको रखा अकेला, काल कोठरी में रहकर के,गारा खून-पसीना, कोल्हू को, बैलों-सा जिसने हांफ-हांफ कर ठेला। भूल गया पच्चास वर्ष जो, दिन या साल-महीना, तुम कहते हो, […]

मुक्तक/दोहा

मिला जो वक्त थोड़ा-सा गुजारो आज मस्ती में

हंसी मिलती नहीं है रेल से, हंसी मिलती नहीं पनवेल से न ईर्ष्या-द्वेष से मिलती कभी भी हंसी आती नहीं है तेल से । अगर मस्ती हो जीवन में,सदा ये मुस्कुराएगी, अगर दिल साफ हो तो हंसी खुद ही चलकर आएगी, मम्मी-पापा-बीबी-बच्चे संग लगते बहुत अच्छे गुजारें वक्त थोड़ा संग, जिंदगी खिलखिलाएगी — सुरेश मिश्र

गीत/नवगीत

यह देश न हारेगा,न हारा है करोना ,

यह देश न हारेगा,न हारा है करोना , डर के आगे है जीत,ये नारा है करोना । हर घंटे हाथ धोइए, मत हाथ मिलाओ दूरी बनाओ भीड़ से, अब मास्क लगाओ, दिख जाएं यदि मरीज तो यारा तु चलोना । डर के आगे है जीत ये नारा है करोना । सहमे हैं जो भी लोग, […]

कुण्डली/छंद

हे कोरोना अंकल

टेंशन में हैं इंडिया, दहशत में संसार गले पड़ा यूं कोरोना,लाज रखें करतार लाज रखें करतार, मगर सबका है रोना नेता घर जाने से क्यूं डर रहा ‘कोरोना’ ? कह सुरेश ‘वायरस’दादा तुम यार डरो ना! पाक परस्त सभी नेता से प्यार करो ना। — सुरेश मिश्र

गीत/नवगीत

ऐग्जिट पोल के नतीजों पर पहली प्रतिक्रिया

भारत माता सिसक रही हैं,तुम सब की नादानी पर, तुम जमीर को बेच दिए, केवल बिजली व पानी पर ।। तुम बोले मंदिर बनवाओ, ‘उसने’ काँटा साफ किया, और तीन सौ सत्तर धारा वाला स्विच ही ऑफ किया, इच्छा यही तुम्हारी थी,घुसपैठी भागें भारत से, लाकर के कानून हौंसला घुसपैठी का हाफ किया। राणा-वीर शिवा […]

कविता

गणतंत्र मुबारक

द्रोही को ‘गनतंत्र’ मुबारक, पंडित जी को मंत्र मुबारक, देशभक्त जितने भारत के- उन सबको ‘गणतंत्र’ मुबारक। वंशवाद के हर चमचे को, दिल बैठा ‘परतंत्र’ मुबारक। नवल सृजन के वैज्ञानिक को- दूर करे दुख ‘यंत्र’ मुबारक। जो विकास की लहर चला दे, मोदी को वह तंत्र मुबारक। जो ‘सीएए’ के अवरोधी- दुश्मन का ‘अभिमंत्र’ मुबारक। […]