गीत/नवगीत

जनता कर्फ्यू के विरोधियों को संदेश

भारत मां की खातिर, कितनों ने कुर्बानी दीन्हा, तुम कहते हो,”हमको घर में नजरबंद कर दीन्हा”। इसी वतन की खातिर, सावरकर ने क्या-क्या झेला, अंग्रेजों ने पांच दशक तक,उनको रखा अकेला, काल कोठरी में रहकर के,गारा खून-पसीना, कोल्हू को, बैलों-सा जिसने हांफ-हांफ कर ठेला। भूल गया पच्चास वर्ष जो, दिन या साल-महीना, तुम कहते हो, […]

मुक्तक/दोहा

मिला जो वक्त थोड़ा-सा गुजारो आज मस्ती में

हंसी मिलती नहीं है रेल से, हंसी मिलती नहीं पनवेल से न ईर्ष्या-द्वेष से मिलती कभी भी हंसी आती नहीं है तेल से । अगर मस्ती हो जीवन में,सदा ये मुस्कुराएगी, अगर दिल साफ हो तो हंसी खुद ही चलकर आएगी, मम्मी-पापा-बीबी-बच्चे संग लगते बहुत अच्छे गुजारें वक्त थोड़ा संग, जिंदगी खिलखिलाएगी — सुरेश मिश्र

गीत/नवगीत

यह देश न हारेगा,न हारा है करोना ,

यह देश न हारेगा,न हारा है करोना , डर के आगे है जीत,ये नारा है करोना । हर घंटे हाथ धोइए, मत हाथ मिलाओ दूरी बनाओ भीड़ से, अब मास्क लगाओ, दिख जाएं यदि मरीज तो यारा तु चलोना । डर के आगे है जीत ये नारा है करोना । सहमे हैं जो भी लोग, […]

कुण्डली/छंद

हे कोरोना अंकल

टेंशन में हैं इंडिया, दहशत में संसार गले पड़ा यूं कोरोना,लाज रखें करतार लाज रखें करतार, मगर सबका है रोना नेता घर जाने से क्यूं डर रहा ‘कोरोना’ ? कह सुरेश ‘वायरस’दादा तुम यार डरो ना! पाक परस्त सभी नेता से प्यार करो ना। — सुरेश मिश्र

गीत/नवगीत

ऐग्जिट पोल के नतीजों पर पहली प्रतिक्रिया

भारत माता सिसक रही हैं,तुम सब की नादानी पर, तुम जमीर को बेच दिए, केवल बिजली व पानी पर ।। तुम बोले मंदिर बनवाओ, ‘उसने’ काँटा साफ किया, और तीन सौ सत्तर धारा वाला स्विच ही ऑफ किया, इच्छा यही तुम्हारी थी,घुसपैठी भागें भारत से, लाकर के कानून हौंसला घुसपैठी का हाफ किया। राणा-वीर शिवा […]

कविता

गणतंत्र मुबारक

द्रोही को ‘गनतंत्र’ मुबारक, पंडित जी को मंत्र मुबारक, देशभक्त जितने भारत के- उन सबको ‘गणतंत्र’ मुबारक। वंशवाद के हर चमचे को, दिल बैठा ‘परतंत्र’ मुबारक। नवल सृजन के वैज्ञानिक को- दूर करे दुख ‘यंत्र’ मुबारक। जो विकास की लहर चला दे, मोदी को वह तंत्र मुबारक। जो ‘सीएए’ के अवरोधी- दुश्मन का ‘अभिमंत्र’ मुबारक। […]

कुण्डली/छंद

ममता ने की शांति की अपील

ममता तू है दोगली, स्वयं लगाकर आग अब कहती है जोर से, “भाग रे भइया भाग” भाग रे भइया भाग, तुम्हारी ऐसी-तैसी ! हिंदू गण से अधिक, दुलारे बंग्लादेशी कह सुरेश ‘मोमताज’ नहीं मेरे को जमता, आने दो चुनाव, भोगेगी तू भी ममता ।। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

प्याज के अच्छे दिन आए

प्याज बेचारी क्या करे, लोग करें बदनाम ‘महबूबा’-सा किया है गोडाउन में जाम गोडाउन में जाम, मचा कोहराम देखिए सपनों मे अब यही आ रही राम देखिए कह सुरेश कल थी सड़कों पर मारी-मारी तरकारी की ताज बनी अब प्याज बेचारी ।। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

बच्चो करना माफ

राम कसम इस बार तो, बच्चो करना माफ दिल में भारी टीस है, बतलाता हूँ साफ बतलाता हूँ साफ, शरम थी नहीं जरा सी जिसे वतन से बढ़कर लगती थी ऐय्याशी कह सुरेश जिसको अच्छी न लगी हिंदुआई उनके जन्म दिवस पर कैसे कहूँ बधाई।। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

कुण्डली

योगी साहब देखिए, मरकर भी कमलेश हमको, तुमको, सभी को, दे गै इक संदेश दे गै इक संदेश, ‘”हमें तो बैर नहीं है’। भारत में भी अब हिंदू की खैर नहीं है” । कह सुरेश करिए इलाज जो मन के रोगी। ‘गोधरा कांड याद है तुमको, भइया योगी?’ — सुरेश मिश्र