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  • कुंडली – गर्मी में

    कुंडली – गर्मी में

    मनवां अइसा बावरा, पल-पल भरे कुलेल खेल रहा है आजकल, जियरा के सँग खेल जियरा के सँग खेल, भावनाओं की मंडी नैना खुद को समझे, दादा कागभुसुंडी कह सुरेश धक-धक दिल बोले कटे न दिनवां गर्मी...

  • आल्हा उत्तर प्रदेश का

    आल्हा उत्तर प्रदेश का

    बड़े लड़ैया सैफइ वाले, जेकरी लाज रखइं करतार लट्ठ बजइ हर दिन यूपी मा, निसरइ बल्लम अउर कटार पाँच डकैती, पचपन हत्या, राहजनी केउ गिनइ न भाइ लखनउवा कइ अइसन हालत, छोटकी गल्ती गिनी न जाइ...

  • कुंडली- पगलाई दीदी

    कुंडली- पगलाई दीदी

    दीदी दौरा कर रही, और भरे हुंकार एक मंच पर आइए, गदहे,श्वान, सियार गदहे,श्वान, सियार, रहे जो हिंदूद्रोही बिल्ली के गठबंधन में शामिल हों वो ही कह सुरेश काटें मिल शेर, मने बकरीदी पीएम बनने की...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    कोई किसी पर इल्जाम लगा देता है, कोई किसी का भी दाम लगा देता है, दर्द दिल में हो या कि दुकानदारी में वो हर जगह, झंडू बाम लगा देता है — सुरेश मिश्र परिचय -...

  • कुंडलिया छन्द : लालू को जेल

    कुंडलिया छन्द : लालू को जेल

    चारा खाकर के चले, लालू भइया जेल रबड़ी भउजी सिसकतीं, कब तक होगी बेल कब तक होगी बेल,उधर तेजस्वी भइया पीकर ठर्रा आज,नाचते ता-ता थइया कह सुरेश मैंने भी माटी खाया यारा क्या माटी से ज्यादा...

  • कुंडली : हद कर दी आपने

    कुंडली : हद कर दी आपने

    बबुवा हारे अब तलक, ‘उन्तिस’ बार चुनाव चमचे फिर भी चहकते, जैसे ऊद बिलाव जैसे ऊद बिलाव, तनिक देखो बेशर्मी कहते ये चिल्लाय, ‘खतम मोदी की गर्मी’ कह सुरेश लतियाइ रहे हैं वोटर सारे फिर भी...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    कपिलों ने इस देश को, दिया बहुत कुछ यार एक कपिल मुनि हुए थे, जाने ये संसार जाने ये संसार, कपिल शर्मा को भइया एक कपिल मिश्रा, अब करते ता-ता थइया कह सुरेश वो कपिलवस्तु, कपिला,कपि...

  • गीत : गधे ही गधे

    गीत : गधे ही गधे

    जहाँ देखिए जी गधे ही गधे हैं, बौड़म हैं ज्यादा, और कुछ सधे हैं । मगर देखिएगा, गधे ही गधे हैं ।। इलेक्शन के मौसम में, दिखते हैं ज्यादा, स्वयं को बताती ‘लियोनी’ भी राधा ।...

  • ये पब्लिक है, सब जानती है

    ये पब्लिक है, सब जानती है

    चोरी करके चोर ही,करने लगे बवाल डाट रहा है लुटेरा, सहमा है कोतवाल सहमा है कोतवाल, सड़क के गड्ढे रोएं हरिश्चंद के लाल,देखिए आपा खोएं कह सुरेश भाऊ पापों से भरी ‘कमोरी’ धंधा संकट में ,अब...

  • कुंडली : जूते की गुहार

    कुंडली : जूते की गुहार

    जूता सिसकी भरि रहा, ये मेरा अपमान सोच-समझ कर तानिए, फिर करिए संधान फिर करिए संधान, ‘केजरी’ मुवां निठल्ला संविधान रिपु, नीच, हठी, बातूनी, नल्ला कह सुरेश जो सठ ‘अन्ना सपनों’ पर ‘मूता’ ऐसे खल पर...