कविता पद्य साहित्य

मतलब के रिश्ते

होते है जो मतलब के, वे रिश्ते पिसते रहते है, घावों से ज्यों रक्त निकलता, वैसे रिसते रहते है। जीवन कोरा, कोरी खुशियां, क्षण भर जो ना टिक पाये, ऐसे रिश्ते लाज के टुकड़े, हाथ में लेकर फिरते है। कुछ पल मन को भाने वाले, सौंदर्य प्रसाधन के-से, आंखों में ये धूल झोंकते, जीवन भर […]

गीत/नवगीत

गौरी

गौरी तेरी पांव की पायल, जब भी छम-छम बजती है, तेरी चाल मधुर कानों में, गजरा बनकर सजती है..! गौरी तेरे कान का झुमका, लटक बहुत इतराता है, देख इसे खुद कामदेव भी, अपना शीश झुकाता है…! जब गौरी तू पहन के लहंगा, चुनरी को सरकाती है, लाखों हृदयों में चंचल सी, लहर दौड़ ही […]

कविता पद्य साहित्य

बचपन की चाह

बारीकियों से सीखता ही आ रहा हूं, चाहता हूं मैं जरा सी जिंदगी। अनुभवों का मैं लबादा ओढ़कर, ना किसी को थोपना हूं चाहता। जाल सा मैं चाहता हूं तोड़ना, जो है घिरा इस उम्र में, है भले पचपन की थापें पीठ पर, एक बचपन चाहता हूं सींचना।

बाल कविता बाल साहित्य

नानाजी का तोहफ़ा

पिछले रविवार को चुन्नु-मुन्नू बिट्टू के घर गए, बिट्टू की साइकिल को देख उनके सपने भर गए, चुन्नु मुन्नू से बोला, “देखो बिट्टू की साइकिल, उस पर बैठा बिट्टू देखो लगता है एक एंजिल।” मुन्नू फट से बोला, “बिट्टू हमको भी सैर कराओ, अपनी नई साइकिल पर बिठाकर थोड़ी दूर घुमाओ, मुझे और चुन्नु को […]

कविता

प्रिय प्रेमिका!

प्रिय प्रेमिका! अब ना मिलन होगा, जब तक देश न उठे, ये भाव दफ़न होगा, चाहता हूं तू भी शामिल हो इस दावानल में, लगेगा जब जंगल में, सिर पर कफ़न होगा.. बहुत भाग लिए अब जाग लगी है, शयन नहीं है शेष, केवल जागरण होगा.. प्रिय प्रेमिका! अब ना मिलन होगा…!! जन मानस की […]

कविता

व्यंग्य कविता : मैं भारत हूं…

अब भी शेष है, संस्कृति वस्त्र तन पर, अमीरी उसे हटा दो.. मैं भारत हूं, संस्कृति का पुरोधा मुझे लुटा दो…! क्या गीता क्या रामायण, क्या राम क्या नारायण, पुराणों को मिटा दो… मैं भारत हूं, संस्कृति का पुरोधा मुझे लुटा दो…! साहस को कायरता से, प्रेम को दुत्कार से, अहिंसा को हिंसा से, धैर्य […]

लघुकथा

देशभक्ति

पिछले दिनों नेताओं को आजादी दिवस के उपलक्ष पर देशभक्ति का भूत सवार हो गया. पर नेताओं को भाषण से ज्यादा कुछ आता भी तो नहीं है, तो माननीय नेताजी भाषण से ही अपनी और अपने परिवार की देशभक्ति की झूठी लीलाएँ बघारने लगे. जब कुछ ज्यादा ही नेताजी उत्तेजित हो गए तो बेनाम कवि से रहा नहीं गया और बोल पड़ा,”नेताजी आपने […]

बाल कविता

फूलों की कहानी- नानाजी की बागवानी

सुबह-सुबह सूरज दादा की किरण पड़ी, पड़ते ही चुन्नु-मुन्नू की नींद उड़ी, चुन्नु और मुन्नू ने ली अंगड़ाई, उठकर नानाजी की और दौड़ लगाई, कमरे में जाकर देखा तो नानाजी वहाँ नहीं थे, ना पूजाघर ना रसोई, नानाजी और कहीं थे, चुन्नु-मुन्नू बाहर आए वहीं खड़े थे नानाजी, चरण-स्पर्श करके बोले- ” करते हो क्या […]

कविता

यादों के मुसाफ़िर- ‘अंसू’

हम यादों के मुसाफ़िर है, यादों के सहारे जीते हैं…! कुछ लफ्ज़ शिकायत करते है, कुछ ग़म के प्याले पीते हैं…!! तू मुझसे दूर सही लेकिन, दिल में तेरी ही यादें है, हमें लोग समझ ना पाते हो, पर तेरे लिए हम सादे हैं, इस सादे पर बेबाकीपन में, खुशियों के कनस्तर रीते हैं…! हम […]

कविता पद्य साहित्य

अब कहाँ है धीर..?

विलम्ब के घन हो धड़ाधड़, चपला की हूंकार गड़ागड़, बूंदें गिरती है तड़ातड़, अश्रुओं के वीर… अब कहां है धीर? गिर पड़े गह्वर में शोणित, है ‘प्रजापति’ प्राण रंजित, भाल पर है भाग्य अंकित, लेख लिख गंभीर… अब कहां है धीर? सृष्टि लुण्ठित है बड़ी, असफलताएँ खड़ी, रिक्तिकाओं में जड़ी, ले अनोखी भीर… अब कहां […]