कथा साहित्य कहानी

कथा दर्पण- ‘साइलेण्ट लव’

साइलेण्ट लव मुहब्बत नगर में एक अंसू अनजान रहता था. बड़ा दिल था उसका. जिससे भी मिलता बड़ी शिद्दत से मिलता. एक रोज़ वह बेवफ़ाई नगर में अपने किसी रिश्तेदार की शादी में जा पंहुचा. रिश्तेदारों में एक सनम बेवफ़ा उसे दिखलाई दी. किसी ज़माने में उसने उसको देखा था. तभी से वह केवल उसी […]

कविता

माँ— ‘निरुत्तर’

साँझ थी होने को आई, शाम की हवा की ये हिलोरें अन्त:स्थ के स्पंदन के वेग को कुछ बढ़ाने लगी, कुछ उमंगे जगाने लगी, हौले-हौले पदचाप करते-करते उस पीपल के पेड़ से कुछ दूरी तक मैं आ गया था, हाँ, वो फुटपाथ आ गया था— उस पीपल के नीचे मैं था रहता खड़ा हमेशा, आज […]

कविता पद्य साहित्य

कैसे नमन करूं जगमोहन..?

कैसे नमन करूं जगमोहन तेरी मूरत पाट की, कैसे तरणी पार लगाऊं गगरी फूटी घाट की..! मेरे तो तुम ही गिरधारी, मुरली-तान लगाने वाले, बांस-वास से मैं अनभिज्ञ, डाली तोड़ी काठ की..! तुमने अपने प्रेम रास से, राधा को बहकाया, बहकी मैं भी आज बाँधने, मीरां डोरी गाँठ की..! एस. एन. प्रजापति

बाल कविता

नानाजी का ‘सॉरी’…!!

चुन्नु-मुन्नू बन ठन के पहली बार स्कूल चले,  नानाजी की सारी बातें रख बस्ते में भूल चले, चुन्नु-मुन्नू ने कक्षा में जैसे ही पाँव ठोका, एक मोटी आवाज ने उन दोनों को रोका, दोनों सहमे, देखा तो मास्टरजी आ रहे, हाथ में अपने एक मोटा डण्डा भी ला रहे, मास्टरजी बोले बिन पूछे ही कहाँ […]

कविता पद्य साहित्य

पहनावा…

पहनावा पहचान है, मानव की इकलौती शान है, पहने ऐसा जो हो मन भावन, ऐसा ना जो तुम्हें विचारों से भी नग्न कर दें… आधुनिकता के भूकंप में, जूपती तुम्हारी लौ जलती जा रही है, संस्कृति का सिसकना जारी है, रुदन बंद पड़ गया है, पतन सम्मुख ले कटोरा खड़ा है, अस्वीकृति कर प्रदान, इसे […]

कविता पद्य साहित्य

विचार-विस्तार…!!

तुम्हारे जो विचार है, अरूपित-निराकार है, इनको गढ़ लेने दो, विहारों में चढ़ लेने दो.. कुत्सित कुवाक्य है जो अटल, नकार रहा है जिनको पटल, उन्हें मिट लेने दो, लेखनी से पिट लेने दो.. रिवाजी चलन बिखरता है, आजकल खुरों में निखरता है, शब्द बाण हर लेने दो, निराहार कर लेने दो.. तुम्हारे जो विचार […]

कविता पद्य साहित्य

यतीम हूं ना…!

खाली पेट सोता हूं, यतीम हूं ना….! सूखे आँसू रोता हूं, यतीम हूं ना….! स्कूल की घण्टी सुन सहम जाता हूं, बाहर से ही शोरगुल सुन पाता हूं, चाहता हूं मैं भी कि पढ़ पाऊँ, पायलट बन आसमान में चढ़ जाऊँ, गैराज में गाड़ी धोता हूं, यतीम हूं ना….! सपने पुराने गुल्लक में पिरोता हूं, […]

कविता हास्य व्यंग्य

जिस थाली में खाते है सब..

बात पते की बतलाता हूं, जिस पर मुझको खेद है, जिस थाली में खाते है सब, उस थाली में छेद है..!! ढोंगी क्या-पाखण्डी क्या, ये अभिनेता है जोर के, करते है सब तरफ दलाली, खाते पैसे चोर के, नेता पाई-पाई दबा के रखते सारे भेद है, जिस थाली में खाते है सब, उस थाली में […]

कविता

अब से लिखना बंद करूंगा…!

अब से लिखना बंद करूंगा…! लफ़्ज में दिखना बंद करूंगा…!! तुमने खरीदे लफ़्ज मेरे, हो गए सारे जज्ब़ मेरे, अब खरीदना सूखे पत्ते, तुम पर बिकना बंद करूंगा…! अब से लिखना बंद करूंगा…!! पत्र हमारे राख कर दिए, गर्व-गुमां सब ख़ाक कर दिए, शर्म-हया सब ताक पे रख के, अबसे झिझकना बंद करूंगा…! अब से […]

कविता

खत रो पड़ा..!

ख़त रो पड़ा… माँ को देकर संदेशा सिपाही की शहादत का..! शब्द बिखरने लगे सिसकियों में, पंक्तियाँ बहने लगी आँसुओं में, सीने से लगाकर रो पड़ी माँ भी… और ख़त रो पड़ा… शब्दों को समेटकर पंक्तियों में लपेटकर माँ ने सहेजकर ख़त को रख दिया पेटी में, पास ही बेटे की तस्वीर के, अंतिम निशानी […]