कविता

रूठी कलम

आज कोरे कागज पर, इन्सानों की अच्छाई पर, लिखने की इच्छा हुई। कागज सहम- सा गया और कलम भी थम- सी गई।। किसी कचड़े के डब्बे में, हमें फेंक देना, लेकिन हैवानों को इंसानों, का नाम ना देना।। थक गई हूं हर रोज़ निर्भया की , कहानी लिख- लिख कर। थक गई हूं निर्मम हत्याओं […]

कविता

कफस में कनेरी

जाल बिछाया छलिया अहेरी, कहां समझ पाई मैं नन्ही कनेरी? देकर मुझे अधम ने प्रलोभन, छीन लिया मेरा उन्मुक्त गगन। हो गई कफस में कैद, मां मैं ,झर – झर बहे मेरे नैन। ना भर सकती ,नभ में स्वच्छंद उड़ान, दफन हो गए ,क्षितिज के अरमान। कहते सुना,  पीली कनेरी सुन्दर गान, मां क्रंदन में  […]

गीत/नवगीत

प्रकृति हमें सिखाती है।

परिवर्तन के साथ खुद को ढालना, जीवन में ना कभी हार मानना, शांति, संघर्ष,उम्मीद, उदारता, गरिमा का पाठ पढ़ाती है, जीवन के प्रारंभ से अंत तक, प्रकृति हमें सिखाती है। आए तूफान तो पेड़ झुक जाते, जो ना झुकते हैं वो उखड़ जाते , वो अल्प वक़्त गुजरने के बाद, नई सुबह फिर आती है, […]

कविता

बैठा पंछी एक डाल पर

मिला मुझे रास्ते में ,बैठा पंछी एक डाल पर। बना रहा था घोसला ,तिनका तिनका जोड़ कर।। आयी तेज आंधी और ,तिनके बिखर गए जमीं पर। टूटा नहीं उसका हौसला ,बैठा नहीं वो हार कर।। उड़ान भरी फिर से उसने , आसमां में फैला के पर। लाए कई  बार तिनके ,रखा पेड़ की एक डाल […]