गीत/नवगीत

कविता : कोरोना से जूझें

आओ साथी मिल कर , हम कोरोना से जूझें । जीवन एक संघर्ष है । एक विचार-विमर्श है । एक तरफ विषाद है , दूसरे तरफ हर्ष है । समूची धरा रणक्षेत्र हुई , हम हिम्मत करके कूदें । जग से हिल-मिल जाएँ । हर कोई साथ निभाएँ । शांति सयंम धैर्य रखें , बैरी […]

हाइकु/सेदोका

पाँच हायकू

( 1 ) खुद की रक्षा आज के लिए बनी देश-सुरक्षा । ( 2 ) संकट आया प्रकृति दोहन से प्राण गँवाया । ( 3 ) ‘ लौट आना माँ ‘ साँझ होते ही नीड़ देखूँ आसम़ाँ । ( 4 ) कहीं से आई चींटी देखती नहीं गिरि-ऊँचाई । ( 5 ) दोनों किनारे तीव्र […]

बाल कविता

दो बाल कविताएँ

आओ यार  स्वेटर   मफलर   रजाई । अजी तुम कहाँ हो भाई । ठण्ड  लगी  है मुझे जी । कुछ नहीं अब सूझे जी । छुपे  कहाँ  हो  भाई । दिखो जहाँ हो भाई । अपने साथ रखूँगा तुम्हें । कुछ  नहीं  कहूँगा तुम्हें । मैं तुम्हारे साथी प्यारे । बड़े  भले  चंगे  न्यारे । आओ […]

कविता

प्रयास

बच्चा रूठ गया तो क्या हुआ तू उसे मनाकर तो देख । जाल टूट गया तो क्या हुआ तू उसे जोड़कर तो देख । चड्डी फट गयी तो क्या हुआ तू उसे सीकर तो देख । ऐ मेरे भाई ! अरे कुछ हो गया तो क्या हुआ तू फिर से कुछ करके तो देख । […]

कविता

पहले “राम” बन 

हे राम ! उस सीता की बात न धर तू अपनी सीता की बात कर । सच है ! कभी सीता की चोरी हुई थी पंचवटी से , पर अब तुम्हारी सीता चहुँ ओर से भयावह पंचवटी से घिरी है । आज तुम्हारा भाई से लक्ष्मण नहीं न पर्णकुटीद्वार पर लक्ष्मणरेखा नहीं , क्योंकि तुम्हारी […]

बाल कहानी

बालकहानी : प्रसन्नता के आँसू

एक बार ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती हंस पर सवार होकर आकाश मार्ग से होते हुए श्रीहरि विष्णुजी से मिलने विष्णुलोक जा रही थीं। श्वेत वस्त्रों से सजी-सँवरी माँ सरस्वती की गौरवर्ण काया रजत आभूषणों से सुशोभित थी। चूँकि माँ सरस्वती को विष्णुलोक पहुँचने में विलम्ब थी, अतः हंस को वह सृष्टि-निर्माण के सम्बंध में बता रही […]

बाल कविता

डाॅक्टर आए

कीट पकड़ कर डाॅक्टर आए । मुझे देख कर वो मुस्कुराकाए । छुए  हाथ   और   छुए  माथा , बुखार  होने  की  बात बताए । सर्दी है तुझे और  खाँसी भी , बड़े  प्यार से मुझे समझाए । गर्म खाना और  गर्म पानी , हाथ धोने की राज बताए । हल्के  से  वो   सुई   लगा  कर […]

बाल कविता

रहे तिरंगा

हर हाथ में रहे तिरंगा भाई । हर  हाथ  में बहे गंगा भाई । तन-मन सुंदर निर्मल-धवल । चेहरे पर हो खिलता कँवल । हिमालय जैसे हों ऊँची शान । सिंधु सा  धीर गम्भीर महान । ईश्वर  से  महान  माता-पिता । मानें कुरान इन्हें समझें गीता । मातृधरा की करें पहली पूजा । काम  करें  […]

बाल कविता

प्यारी छतरी

मेरी प्यारी  नीली छतरी । वर्षा से हुई गीली छतरी । डंडी है इसकी जे आकार । तनती   है   तो   वृत्ताकार । यह आठ कड़ियाँ वाली है । अति सुंदर और निराली है । बारिश से यह बचाती मुझे । धूप  से  यह  छुपाती मुझे । मम्मी से मुझे मिली छतरी । मेरी  प्यारी   नीली  […]

बाल कविता

खुल गया स्कूल

मम्मी ! खुल गया  मेरा स्कूल । पापा !  लेट  मी  गो  टू स्कूल। खेलकूद   धमा-चौकड़ी   केन्सिल । कहाँ हैं मेरी कापी किताब पेन्सिल । मम्मी ! मेरी यूनीफॉर्म करो तैयार । स्कूल  कर  रहा है  मेरा  इंतजार । मोजे-जूते को  मैं ढूँढ़ता हूँ । कहाँ हैं वे , मैं ही पूछता हूँ । दादा […]