बाल कहानी

बालकहानी : प्रिया की नई सहेलियाँ

गर्मी का मौसम था। स्कूलों की छुट्टियाँ हो चुकी थी। प्रिया का भी स्कूल जाना बंद हो गया था। कक्षा तीसरी की प्रिया बहुत सुंदर थी। गोरा रंग। गोल-मटोल चेहरा। फुंडा-फुंडा गाल। सुंदर नुकीली सुआनाक। लम्बे-घने बाल। यानी दिखने में खूबसूरत तो थी ही; पढ़ाई-लिखाई में भी नंबर वन। पर अपने मम्मी-पापा की अकेली संतान […]

बाल कहानी

बाल कहानी – जैसे को तैसा

रानी कोयल और मनु बंदर की कलाकारी से सिंघोला बाग ही नहीं; वरन् आसपास की सारी बगिया वाकिफ थी। रानी कोयल गायन में माहिर थी; तो मनु बंदर था एक नंबर का नर्तक। दोनों को गायन व नर्तन के नियमों की बहुत अच्छी जानकारी थी। उनकी कलाकारी की अंचल में तूती बोलती थी। वे दोनों […]

लघुकथा

लघुकथा : फिक्र

“चलो न माँ हमारे साथ सरगुजा। एक साथ रहेंगे हम सब। मेरी नौकरी ऐसी है कि मैं तुम्हें मिलने  बार-बार नहीं आ सकता। तुम यहाँ अकेली रहती हो। यह मुझे अच्छा नहीं लगता। मुझे तुम्हारी बड़ी फिक्र लगी रहती है। वहाँ तुम्हारे लिए हर सुविधा है माँ। हर चीज उपलब्ध है।” राजेश के कहने पर […]

लघुकथा

लघुकथा – नया जन्म

लेबररूम से बाहर निकलते ही डाॅ. सुबोध मरकाम जी बोले- “भरत लाल ! बधाई हो। तुम बाप बन गये। अंदर जाओ। मिल लो। बड़ी मुश्किल से डिलवरी निपटी है। सब ठीक है। जाओ। दो जने का जन्म हुआ है।”        भरत लाल की खुशी का ठिकाना न रहा। कमरे में गया। नवजात को […]

बाल कहानी

बालकहानी : तनु की कुछ शर्तें

           इस बार ओड़गाँव के गाँधीपारा के बच्चों को होली का बेसब्री से इंतजार था। सबने होली मनाने की बात अपने-अपने तरीके से सोच ली थी। कोई खूब रंग-गुलाल खेलने की, कोई पिचकारी चलाने की, कोई ढोल-नगाड़े बजाने व नाचने-गाने की। अपने-अपने माता-पिता से रंग-गुलाल व पिचकारी भी लिवा लिये थे। […]

लघुकथा

लघुकथा : गोश्त की दुकान

        “ओ मैनाबाई…! एक नहीं, आज डेढ़ किलो तौल दो। मेहमान आये हैं हमारे यहाँ।” रामरुज मैनाबाई को पाँच सौ का नोट थमाते हुए बोला।         “अरे वाह ! क्या बात है रामरुज… कुछ खास है क्या ?” मैनाबाई ने गोश्त का बड़ा सा टुकड़ा तराजू के पलड़े पर […]

बाल कहानी

बालकहानी : दोस्ती में दरार

          बहुत पुरानी बात है। एक वनांचल गाँव था पण्डेल। गाँव से ही बिल्कुल लगा हुआ एक बहुत बड़ा बबूल का पेड़ था। उस बबूल पेड़ पर एक कौआ रहता था। गाँव से खाने की जो भी वस्तु मिलती; पेड़ पर लाता, और आराम से बैठकर खाता था। दिन भर गाँव, […]

लघुकथा

सम्मान

          दरवाजा खटखटाने की आवाज आई। विजयेन्द्र साहू जी ने दरवाजा खोला। देखा, दरवाजे पर एक युवक खड़ा था। उसने अपना परिचय देते हुए कहा- “नमस्ते ! मैं विशाल मंडावी हूँ। क्या यह मकान श्री विजयेन्द्र साहू जी का है ?”          ” जी नहीं। यह घर विजयेन्द्र […]

बाल कविता

लोरी

सोजा रे मेरे मुन्ना राजा सो जा रे,   आँख मूँद के सुंदर सपनों में खो जा रे। कौशल्या ने सुनायी थी लोरी,                   अपने नयन तारे राम को। यशुमति ने पालने में कभी,        झुलाया था अपने दुलारे श्याम को। मेरा कहना मान के […]

बाल कहानी

बाल कहानी : आकर्षक खिलौने

           अध्यापक ठाकुर जी कक्षा सातवीं में आए। बोले- “बच्चों ! कल से दशहरे की छुट्टी हो रही है पाँच दिनों के लिए; यानी शुक्रवार तक। बच्चे खुश हो गए। ठाकुर जी फिर बोले- “दशहरे की छुट्टी का आनंद लेने के साथ तुम सबको एक गृहकार्य भी करना है; और उसे […]