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  • गीत – विश्व योग दिवस : 21 जून

    गीत – विश्व योग दिवस : 21 जून

    है  “विश्व  योग  दिवस” आज, नेक  काम  कर लो। कुछ  कसरतें,  श्वसन-क्रियायें, प्राणायाम  कर लो।। हैं  योग  की   ये  शक्तियां   नायाब   दोस्तो । हर रोज़  योग-आसनों को  तुम किया  करो। तप-योग से  हर  रोग का  क़िस्सा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस दुनियां में इंसानों के क़िस्से बड़े निराले हैं ऊपर से तो दिखते उजले, पर अंदर से काले हैं जिन हाथों ने पाला-पोसा उनको ही डँस लेते हैं धरती मां ने दूध पिलाकर, नाग कई ये...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये मेरा दिल है, तेरे शहर का बाज़ार नहीं प्यार करता है फ़क़त, प्यार का व्यापार नहीं नातवां हूँ मैं मगर इतना भी लाचार नहीं इश्क़ का मेरे मुक़ाबिल कोई बीमार नहीं भुला दे करके जो...

  • हमारा भारत हमारा गणतंत्र

    हमारा भारत हमारा गणतंत्र

      आओ हम भारत को इस धरती का स्वर्ग बना डालें प्यार-मोहब्बत के फूलों से बग़िया ये महका डालें अद्भुत है गणतंत्र हमारा, दुनिया वाले कहते हैं कई जाति-मज़हब बोली वाले मिलजुल कर रहते हैं प्यारा...

  • नया साल

    नया साल

      ये अलसाई आँखों में सपने सजाकर, नया साल आया, नया साल आया कि माज़ी के हर दर्दो-ग़म को भुलाकर, नया साल आया, नया साल आया कि शबनम से धरती नहाई हुई है उमंगों की ख़ुश्बू...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      प्यार में आँखों से कुछ दिखता कहाँ है दोस्तो प्यार का पर्दा सा इक रहता जवाँ है दोस्तो प्यार तो रब की इबादत, गुलसितां है दोस्तो प्यार से पुरनूर  ये सारा समां है दोस्तो बस...

  • ग़ज़ल : सदा

    ग़ज़ल : सदा

    गुनगुनाते हुए आंचल की हवा दे मुझको उंगलियां फेर के बालों में, सुला दे मुझको हर एक पल तू मेरे सामने ही रहता है वफ़ा की राह में चाहे तो भुला दे मुझको सिलसिला दर्द का...

  • ग़ज़ल : दिल और दिवाली

    ग़ज़ल : दिल और दिवाली

      सम्भल कर तोड़ना, दिल एक नाज़ुक फूल होता है फ़िज़ा में रूह से निकली हुई ख़ुशबू पिरोता है ये कांटों में भी रहकर खिलखिलाता-मुस्कुराता है मगर चुभ जाये कोई फांस, ये ता उम्र रोता है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      दोस्त तुम भी कमाल करते हो बेसबब क्यूँ मलाल करते हो भान ख़ुद चाँद से ज़ुदा कब है दोस्ती पर सवाल करते हो ? दौलते-हुस्नो-नूर से शब को दोस्त तुम मालामाल करते हो दीद देकर...

  • श्रीकृष्ण भजन

    श्रीकृष्ण भजन

      हे नटवर, लीलाधारी अब आओ कृष्णमुरारी धरती संतप्त तुम्हारी आ जाओ हे गिरधारी मार-काट,बस लूट-पाट, अब ये दुनिया हैवान हुई बमधमाकों और गोलियों से ख़िल्क़त हलकान हुई आज कंस फिर जाग उठा है, कष्ट हरो...