कविता

बन गया बेरोजगार

जब तलक मन में थी तुम कुवाँरी याद आती थी हर पल अक्स तुम्हारी जब से पढ़ लिख कर हो गया बेरोजगार तेरे संग बसा ना पाया अपना  घर बार पलको में सपने नित्य थे आते दीदार हो जाती थी गली में जाते प्यार की होती थी आँखों से इजहार ये था अपना सच्चा तुमसे […]

कविता

कल्पना

दिल जब रोता है जार जार जज्बातों की उठती हे ज्वार शब्दों की धारा बह कर आती है कोरे कागज पे कविता रच जाती है सुख आये या दुःख आये जीवन में खुशियाँ मस्कुराता है नील गगन में तब भी दिल में आता है तुफान टीस देती है कविता बन नादान ख्वाब मन का जब […]

कविता

जीत

जीत लेगें दुश्मन को एक दिन जिस दिन होगी समर से प्यार रोक ना पायेगें बैरी मेरी मंजिल जिस दिन होगी हाथ में तलवार सामने दिख जाये कोई पहाड़ या पथ पे हो  शेर की  दहाड़ पीछे कदम ना कभी मुड़ेगा आगे बढ़ कर करेगें हम वार हिम्मत हो जब अपना साथी जीत लेगें हम […]

कविता

हम हैं हिन्दी

हम हिन्दूस्तानी कर्म है ज्ञानी पावन धरती प्यारा हिन्दुस्तान भारत मेरी माता दधिचि सा दाता ना है विश्व में कोई    अनजान जम्मू द्वीपे भारत खण्डे में आर्यावर्त है इनका ही नाम नदी है माता जंगल है दाता प्रकृति पूजते मान भगवान धर्म सनातन के पुजारी देवी है नारी विश्व गुरू था हमारी कभी पहचान […]

कविता

विनय

तन खूबसूरत हो या ना हो मन को खूबसूरत कर दो पाकेट में धन हो या ना हो दिल को दौलतमंद कर  दो ईष्या द्वेष मन में ना उपजे मित्र भाव से जग भर    दो दुश्मन पड़ोस में नजर ना आये दोस्ती से चमन भर       दो अज्ञानता को दर किनार कर के […]

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दीये की बाती

कोई जहाँ ना हो अपना साथी बन जा खुद की दीये की बाती कोई किसी का ना होता है मतलब से ये जग रोता    है कहने का तो जग है अपना पर सच में ये बातें है सपना मतलब का सूरज  आता है मतलब से ये दिन ढलता है मत कर गुरुर झ्स धन […]

कविता

हिन्दी दिवस

जब तक सूरज चाँद रहेगा जग हिन्दी की सम्मान करेगा जो भारतीयता की मूल आत्मा है जन जन में बसा परमात्मा  है संस्कृत भाषा जिनकी है माता हर काव्य से है जिनका   नाता तुलसी कबीर की ये वाणी  है काव्य सरिता की  रवानी  है गीता रामायण में है समाया अज्ञानी से ज्ञानी जिसने बनाया अ […]

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तर्पण

अर्पण तर्पण अछत सर्मपण गंगाजल कीजीये  स्वीकार अंजली भर श्रद्धा सुमन लीजीये कूल पितर सरकार तेरी आर्शिवाद से फलीभूत हुई तेरी ही वंश वृक्ष की बड़ी संसार सदैव रखना हाथ अपनों पे अपना देना अपना वरदान        अपार निरोग रहे तन मन व उपवन जो दिया है वशंज को उपकार छ्तरी बन वंशज […]

कविता

बेईमानों की बस्ती

बेईमानों की इस बस्ती में ईमान की बात क्यूँ करते हो नक्कारखाने में तुती सुनाने की बेकार की आस क्यूँ रखते हो वहशी की इस बेशर्म बस्ती में अस्मत की बात क्यूँ करते हो हर नुक्कड़ पर खड़ा है भेड़िया सुरक्षा की बात क्यूँ करते हो अज्ञानियों की इस बस्ती में ज्ञान की बात क्यूँ […]

कविता

चलो चलें अब गाँव की ओर

शहर में बढ़ गई अधिक आबादी वाहनों से होता कर्कश अब शोर पत्थर के महल में नींद है   रूठी चलो चलते हैं अब गाँव की ओर शहर में बढ़ गई अधिक मंहगाई दुध दही का आकाल बड़ी जोर पाऊडर से काम कहाँ     चलता चलो चलते हैं अब गाँव की ओर शहर में बढ़ गई […]