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  • कविता- वहाँ मिलूँगी मैं

    कविता- वहाँ मिलूँगी मैं

    तुम हर पल ढूंढकर देख लेना. मैं तुम्हारी यादों की बस्ती में मिलूँगी. कोई जब खिलखिला कर हँसे. उसकी उस हंसी में मिलूँगी मैं. जब रिमझिम बारिश होगी. उस बारिश की नन्ही नन्ही सी बूंदो में...

  • घुमक्कड़ पथिक

    घुमक्कड़ पथिक

    सच्चे रिश्तें को ढूंढने निकल एक घुमक्कड़ पथिक. जब से रूप बदला है उसने .  उसकी काबिलियत पर उंगलियां उठानी शुरू कर दी, जब अपनो पर पैसा लुटाता रहा तब वाहवाही मिलती. तब एक आदर्श चाचा...

  • मेरी प्यारी माँ

    मेरी प्यारी माँ

    माँ एक शब्द नही है संसार बसता है उसमें, अपने खून से सींचकर हमे जीवन देती है, कितनी भी मुश्किलें क्यूँ न सहे, मगर कभी कुछ नही कहती है, कब मुझे भूख लगी कब मुझे प्यास...





  • कविता- घरौंदा

    कविता- घरौंदा

    एक प्यारा सा परिवार मिला मुझे, एक प्यारे से पिता जिनकी राजदुलारी हूँ मैं, एक प्यारी सी माँ मिली जिनकी लाड़ली हूँ मैं, एक प्यारी सी बड़ी बहन मिली जो हर पल , नई राह दिखाती...

  • आधुनिक नारी हूँ मैं

    आधुनिक नारी हूँ मैं

    मैं आधुनिक युग की नारी हूँ, कमजोर नही हूँ मैं, सीमा को लांघना सीखा नही कभी, ऐसे संस्कार मुझे मिले नही, पहनती हूँ जीन्स टॉप भले ही, मगर बुजुर्गों का सम्मान करना सीखा है मैंने, कोई...

  • लघुकथा- सुयोग्य वर

    प्रियंका एक बेहद ही पढ़ी लिखी और खुले विचारों वाली लड़की थी मगर एक मध्यमवर्गीय परिवार में उसके विचारों को समझने वाला कोई नही था। माँ गृहणी थी और पिता जी एक सरकारी स्कूल में क्लर्क।परिवार...