कविता

स्वास्थ्य दिवस

पहला सुख निरोगी काया यह बतलाने सात अप्रैल आया। वर्ल्ड हेल्थ डे के रूप में विश्व को स्वास्थ्य का मूल्य बताया 1948 में स्वास्थ्य संगठन ने .स्वास्थ्य के खातिर सभा बुलाया स्वास्थ्य दिवस मनाने का प्रस्ताव बनाया 7 अप्रैल 1950 को पहला स्वास्थ्य दिवस मनाया जिंदगी रखना हो यदि खुशहाल तो रखो स्वास्थ का अपने […]

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मेरा बचपन

मेरा बचपन मुझे बहुत याद आता है बीते दिनों को बहुत  तरसाता जाता हैl ममता भरी मां की वह लोरी दादी नानी के किस्से कहानी कभी मुझको हंसाता कभी मुझको रुलाता है। मेरा बचपन मुझे बहुत याद आता है तुतलाती प्यारी सी बातें सुहानी इतराती सुनो हुई सबकी जुबानी कभी मुझको बताता कभी मुझको सुनाता […]

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हिंदी भाषा

संस्कृत भाषा से जो जन्मी है संपूर्ण विश्व में जानी जाती है सर्व प्रिय मान सम्मान है जिसका हिंदी भाषा है नाम उसी का प्रेम के धागे में  बंधी हुई है हर भाषा में समाई है। एकता की जान है हिंदी अपने देश की शान है हिंदी। जगत में जिस दिन आए हम कर्णों ने […]

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नारी

नारी जो नित बहती अविरल धारा सी प्यारी सी मुस्कान लिए नित पिघलती पारा सी। बाहर से नाजुक पर अंदर से मजबूत सिर पर सबका भार उठाती वसुधा सी। नैनों में है गर्व लिए निर्भरता नारीत्व का आत्मविश्वास है इतना कि अडिग पर्वत श्रंखला सी। श्रद्धा स्नेह ममता विश्वास की प्रतिमूर्ति दूसरों को तृप्त कर […]

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पंच पर्व

आया पंच श्रंखला का त्योहार आओ जाने इसका सार पहला दिन धनतेरस का यम कुबेर धन्वंतरि का। धनवंतरी के पूजन से स्वास्थ्य लाभ भी पाया जाता यम का दीप जलाया जाता। दूसरा दिन नरक चतुर्दशी या रूप चौदस का कहते हैं अत्याचारी नरकासुर का वध होने के कारण। सोलह हजार एक सौ कन्याओं ने दीपों […]

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वक्त

वक्त तुझे देखा नजदीक से मैंने तेरे साथ बिताए कई बरस मैंने। कभी तू हल्का था कभी भारी कभी तो होती थी निशा भी कारीl हर रंग तेरे देखें तू साथ रहा मेरे सपनों में मेरे अपनों में भी मेरेl तू चलता रहा मैं भी चलती रही दर्द की झलकियां चलचित्र सी चलती रही कभी […]

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शरद पूर्णिमा

वर्षा बीती शरद पूर्णिमा आई और फिजा में शीतलता छाई मंद मंद बह रही समीर निराली भास्कर ने सुनहरी चुनर लहराईl रास रचायेंगे राधा कृष्णा खीर बनेगी चावल की अमृत बरसेगा आसमान से बातें होंगी मनुहार की। बारिश होगी जगत में श्वेत चांदनी की। आज चांद भी सोलह कलाएं दिखलाएगा खुद को नीले सागर सा […]

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जिंदगी जरा रुक

आज सोचा जिंदगी के बारे मेंजाने क्या जानती हूँइसके बारे में।दौड़ते-भागते रह गयेकभी न सोच पाये तेरे बारे में।बचपना था खेलकूद थेकुछ सपने थे तेरे  बारे में।सोचा बहुत था करना बहुत थातेरे साथ तेरे बारे में।किया बहुत पाया बहुततेरे साथ तेरे साये में।ज्यों ज्यों मैं पली बढ़ीतू भी चलती रही मेरेसाथ मेरे साये में।हौसलों की […]