हास्य व्यंग्य

ग्राउंड जीरो

मेरे प्रिय मित्र भाई भरोसे लाल आया और बोले कि तैयार हो जाओ ग्राउंड जीरो पर चलना है। क्योंकि मेरा अंग्रेजी का ज्ञान अल्पतम है चलो पहले अल्पतम का ही मतलब बता दूँ क्योंकि हो सकता है आप सब अंगेरजी प्रेमी होंगे ही इसलिए सम्भव है कि आपका हिंदी ज्ञान भी अंग्रेजी जैसा ही हो। […]

हास्य व्यंग्य

भाई भरोसे  लाल  का पुस्तक प्रेम 

मेरे मित्र भाई भरोसे लाल ने मुझे फोन पर सूचना दी कि अब वे बुढ़ापे में अच्छी पुस्तकें पढ़ कर अपना समय बिताएंगे। और इस लिए वे लाइब्रेरी यानि पुस्तकालय से बहुत साडी किताबे ले आये हैं। मुझे भी अच्छा लगा कि चलो यह तो बहुत अच्छा हुआ। जैसे कोई फिल्म देख कर आये तो […]

हास्य व्यंग्य

आप को कोरोना तो नहीं है

मेरे मित्र भाई भरोसे लाल को दिन में गर्मी के कारण दो तीन बार खांसी आ गई तो बस अब क्या था क्योंकि कोरोना काल तो चल ही रहा है। उन के सारे परिजन यानि घर वालों को बहुत चिंता हो गई कि अब उन का क्या होगा ?उन्होंने ध्यान से देखा तो उन्हें हल्का […]

हास्य व्यंग्य

करोना  करोना 

मेरे मित्र भाई भरोसे लाल के पास उन केएक मित्र का फोन आया। कुशलक्षेम के उपरांत स्वाभाविक था वर्तमान क्रोना की बीमारी पर बात हुई। यह भारत में बीमारी का शुरआती समय था। लोगों में अधिक चढ़ा नहीं थी। बस अभी भारत के बाहर ही कुछ केस आये थे तो घरवालों के कानों में नया […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग – राजनीति घर की

भाई भरोसे लाल कई दिन जब मुझ से मिलने आये तो बड़े झुंझलाये हुए थे। मैंने उनकी  झुंझलाहट का  जानना  चाहा  तो  वे  मुझ पर ही  भड़क  उठे और बोले कि तुम भी क्या सच में ही मेरी  झुंझलाहट का कारण जानना चाह  रहे हो  या तुम भी  नेताओं और पत्रकारों  की ही  भांति कुछ […]

कविता

कविता – माटी

माटी के ही तो  विभिन्न रूप है  भिन्न भिन्न चित्र  उन में गढ़ी गई मांसलता  उन में उकेरे हुए उभार  उन का आकर्षण  उन की मोहकता  ‘और उन की मादकता मादकता  कलाकार ने माटी को  कितने रूप दिए हैं  कितना सौंदर्य दिया है  माटी को कितना सजाया है  पुन : माटी होने से पहले।    […]

कविता

कविता : जीवन कठिन पहेली थी

जीवन कठिन पहेली थी पर फिर भी कठिन नही थी जीवन की सच्चाई उससे फिर भी कठिन नही थी जिस कठिनाई से जीवन भर रहा जूझता हर दिन उस कठिनाई से कोई कठिनाई कठिन नही थी। . जीवन की हर सांस मुझे कुछ रस्ता बता रही थी हरेक साँस जीवन में हर पल मुझ को सिखा […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गंगा जमुनी संस्कृति

भारत एक अति प्राचीन देश है इस की संस्कृति भी उतनी ही प्राचीन है। विश्व की अधिकांश संस्कृतियां या लगभग सभी संस्कृतियां इस के समक्ष अभी यौवन को छू भर रहीं हैं। संस्कृति मानवीयता के उदात्त नियमों को परिभाषित करती है और प्रोत्साहित करती है सभ्यता अपने परिवर्तन शील नियम के अनुसार सदा आकर्षित रहती […]

कविता

कविता

पानी खारा हुआ तो यूं ही आँखों से बह जायेगा न तो मन की न आँखों की प्यास बुझ वह पाएगा क्यों प्यासे मन की तृष्णा को ऐसे दुगना करते हो इसी लिए कहता हूँ मन को पावन गंगा जल कर लो। कुछ भी बोलो कहाँ मना है बिना अस्थि की जिह्वा है कठिन शब्द […]

कविता

कविता : स्त्री यानि औरत

स्त्री यानि औरत जिस की मजबूरी है घर की आमदनी बढ़ाना या आधुनिकता की दौड़ में शामिल होना इसी लिए निकलना पड़ता है उसे घर से सुबह सवेरे जल्दी ही सब की इच्छाएं पूरी करते हुए टिफिन, टाई, रुमाल, जुराब और जरूरी चीजें संभलवा कर फिर भागना पड़ता है उसे अपना नाश्ता छोड़ कर भीड़ […]