गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बदले बदले से मिजाज हमारे हैं कह दिया तुमने हम तुम्हारे है । उनकी यादों में खोये रहते है, अब तो यादो के बस सहारे हैं। तेरी उल्फत में यूँ बदनाम हुए, हम पे इल्जाम लगे सारे हैं। दिल्लगी की खता हुई हमसे, सूने सूने से ये नजारें हैं फना हो गये वो किस्से अब, […]

कविता

तहसीन

नफ़रतों के बाजार में हसरतें लुटती रही। बिना कुछ समझे बस आरजू मिटती रही। हर तमन्नाओं को दिल में दफन करते रहे, कुछ यादों को हर पल सजाते रहे, मरते रहे तिल तिल कर हम, फकत इतना तो तहसीन में कह दे तुम अच्छे हो बहुत अच्छे हो बस यही दो लफ्ज के लिए आज […]

कहानी

बदलती तसवीर

प्रीति – मम्मी मेरी चोटी  कर दो मुझे स्कूल मे देर हो रही है। मम्मी- हाँ  जल्दी आओ चोटी कर दूँ । प्रीति- देखो मैने होमवर्क कर लिया । मम्मी- अरे मुझे कहाँ पढ़ना आता है? शाम को पापा को दिखाना। प्रीति- पापा देखो मैने होमवर्क कर लिया। पापा- अरे वाह !बेटा बहुत बड़िया बस […]

कविता

गरीबी

मेरे सपने मेरा वजूद चन्द कागज के टुकड़े में बिक जाये। मेरे जज्बात मेरे एहसास लालच में मिट जाये। मेरी आत्मा मुझसे सवाल करेगी, क्या मुझे दौलत ही मालामाल करेगी, परम्परा में शामिल थी मेरी गरीबी। जन्म से ही है मेरी बदनसीबी। अब देखना है कहाँ लाकर खड़ा करेगी। मेरे हौसलों को कब तक दफन […]

कविता

बेटी बचाओ

नहीं नादान बेटियाँ नहीं अनजान बेटियाँ । इनके ही हाथों में हो देश का ये बल, इनसे ही बनता है ये देश भी संबल , दो हथियार बने देश का आधार, नहीं गुमनाम बेटियाँ,ये अभिमान बेटियाँ । नहिं नादान बेटियाँ,,,,,, हर जुल्म को ये जड़ से मिटा देंगी, हर जुल्मी की ये रूह कंपा देंगी, […]

भाषा-साहित्य

बच्चों को प्रोत्साहन

मैं एक शिक्षिका हूँ काफी दिनों से बच्चों को कविता बनाकर बच्चों को पढ़ाने का शौक था पर वर्तमान में लॉक डाऊन के चलते मैं घर पर बहुत सी कविता लिख रही थी लेकिन मेरी कविताएँ बस मेरी डायरी तक सिमित रही फिर मुझे कवि अभिवक्ति ग्रुप से एक शक्स ने जय विजय मासिक पत्रिका […]

कविता

कविता – बेटी

मै बेटी हूं कोई पशु नही , मेरा अस्तित्व इस दुनिया के हर कोने मै है । बेटी को कोख में नष्ट करने वाले सुन लो अब तुम्हारा अस्तित्व भी खोने को है। अगर वेदो ,पुराणो मे ,शास्त्रो में मेरा जिक्र न होता तो तुम पूजा किनकी करते । नदी, प्रकृति, सरिता पृथ्वी ,अखंड ब्रह्माण्ड […]

कविता

कविता

जिन्दगी की राह को आसान बनाता चला गया। यहां जो भी शक्स मिला कुछ सिखाता चला गया। मोहब्बत में गम न मिले, खुशी चाहे कम मिले, रस्म ये अदायगी निभाता चला गया। यहां जो भी शक्स मिला कुछ सिखाता चला गया। कुछ ख्वाब टूटे और अपने भी हमसे रुठे मैं हर एक यूं मनाता चला […]

गीत/नवगीत

पृथ्वी दिवस पर विशेष गीत

मान इंसानियत का हम बढ़ा न सके। अपनी प्रकृति को भी हम बचा न सके। जीते -जीते जो दौलत कमाई मगर, बाद मरने को जो हमको जो साथ ले जाना है। एक पेड़ भी हम वो लगा न सके। मान इंसानियत का हम बढ़ा न सके अपनी प्रकृति को भी हम बचा न सके। प्रेम […]

कविता

एक मासूम बच्ची का दर्द

एक नन्ही गिलहरी दाना देखन चुपके चुपके आई है । देख जगत की रीत यहां वो थोड़ा सा सुकचाई है। नन्हे कदमों को धीरे-धीरे कुछ सोचकर ही बड़ाई है। एक नहीं गिलहरी दाना देखन चुपके-चुपके आई है। मासूम सी उसकी आँखों ने प्यार के नजराने देखें, दानों के उस ढेर पे जाके वो अनजाने देखें, […]