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  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    इंतजार सिर्फ इंतजार ही तो लिखा होता है रूहानी मोह्हबत में , बाँस के पेड़ों से कब खुश्बू आती है उदास जिंदगी में । लहरों की तरह यादों का दौर आता है रुकी जिंदगी में ,...

  • औरत

    औरत

    थक गई हूँ खुद से , जाने क्यों टूटने लगी हूँ। लगता है जैसे खुद को ही छलने लगी हूँ । जंजीरों को कब मैंने बाँध लिया पैरों में स्वतंत्रता की चाह जाने क्यों झुलसने लगी...

  • दर्द का रिश्ता

    दर्द का रिश्ता

    चंद पल जो तुमको जिंदगी दे जाएं , कुछ हसरतें जो बचपन में ले जाएं । भूल जाएं अतीत की दुख भरी यादें , कुछ सुकून के लम्हे वापिस आ जाएं । कब मांगे थे बेशकीमती...

  • लौ

    लौ

    प्रकृति के अंतर्मन से उदीयमान हो रही थी कुछ संवेदनाएं जेहन में प्रदीप्त हो रही थीं । शांत था अलाव फिर क्यों वो उबल रही थी कहीं कुछ टूट गया गुनगुनाहट हो रही थी । अंजाम...

  • औरत

    औरत

    थक गई हूँ खुद से , जाने क्यों टूटने लगी हूँ। लगता है जैसे खुद को ही छलने लगी हूँ । जंजीरों को कब मैंने बाँध लिया पैरों में स्वतंत्रता की चाह जाने क्यों झुलसने लगी...

  • साहित्य

    साहित्य

    साहित्य कोई बहस का मुद्दा नहीं , समाज का दर्पण है दोस्तो । प्रकृति का चिंतन है , प्रेम का चित्रण है । सदियों की प्यास है , महबूब का मंथन है । तम का अघ्ययन...

  • प्रीत बाबरी

    प्रीत बाबरी

    नेह लगाकर भूल गए क्यों पास बुलाकर दूर गए क्यों। मैं तो तुम्हरी प्रीत बाबरी , वंशी बजाकर छोड़ गए क्यों । अँखियाँ मेरी सावन भादों , याद तुम्हारी मुझे बहकाबें । प्रीत हैं जब राधा...


  • घनी चादर

    घनी चादर

    आंसुओं की घनी चादर में जाने क्यों आज भी जिंदा हूँ । मचल रहा है बाबरा मन , रहगुजर राह की जैसे परिंदा हूँ । कोपलों पर खिलती हैं कलियाँ हर दिन जैसे नई उम्मीद लिए...

  • कविता

    कविता

    सोचती हूँ कुछ कविता लिखूँ तुम पर कुछ गीत भी लिखने को दिल करता है । शब्द नहीं मिल रहे चलो आज चंद अहसास ही लिख देती हूं अपने अन्दाज में क्यों रुलाते हो तुम मुझे...