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  • चल अकेला

    चल अकेला

    डूब गया जब कोई सितारा, दिल को न बहकाना तुम , आएगा फिर मौसम बहार का , आंखों को न नम कर जाना तुम । महफ़िल मस्ती की मिल जाये हर पल ये कोई जरूरी नहीं।...

  • नया साल

    नया साल

      बदल जाती होंगी ,नए साल में कैलेंडर के रंग और तहरीरें । बदल जाते होंगे घरों के आगे पड़े हुए कूड़े के भी दिन । बदल जाते होंगे दिलों में पनपते हुए नफरत के बीज...

  • बदलाव

    बदलाव

    देख रही हूँ फिर से बदल रहे हो तुम , तोड़कर धारा से संबंध सारे आसमान में उड़ रहे हो तुम । देखो प्रलंभन से जरा दूर रहना तुम , अक्स तारों का क्यों फिर से...

  • बेपनाह इश्क़

    बेपनाह इश्क़

      बेपनाह इश्क़ समंदर के मानिंद, अंतहीन सफर अंतहीन रास्ते … सरसराहट सी भर देता मन के अंदर , जाने कब ज्वार भाटे का अंतर । बुत बन चुके जिस्म को पिघला देता रूह की सच्ची...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    इंतजार सिर्फ इंतजार ही तो लिखा होता है रूहानी मोह्हबत में , बाँस के पेड़ों से कब खुश्बू आती है उदास जिंदगी में । लहरों की तरह यादों का दौर आता है रुकी जिंदगी में ,...

  • औरत

    औरत

    थक गई हूँ खुद से , जाने क्यों टूटने लगी हूँ। लगता है जैसे खुद को ही छलने लगी हूँ । जंजीरों को कब मैंने बाँध लिया पैरों में स्वतंत्रता की चाह जाने क्यों झुलसने लगी...

  • दर्द का रिश्ता

    दर्द का रिश्ता

    चंद पल जो तुमको जिंदगी दे जाएं , कुछ हसरतें जो बचपन में ले जाएं । भूल जाएं अतीत की दुख भरी यादें , कुछ सुकून के लम्हे वापिस आ जाएं । कब मांगे थे बेशकीमती...

  • लौ

    लौ

    प्रकृति के अंतर्मन से उदीयमान हो रही थी कुछ संवेदनाएं जेहन में प्रदीप्त हो रही थीं । शांत था अलाव फिर क्यों वो उबल रही थी कहीं कुछ टूट गया गुनगुनाहट हो रही थी । अंजाम...

  • औरत

    औरत

    थक गई हूँ खुद से , जाने क्यों टूटने लगी हूँ। लगता है जैसे खुद को ही छलने लगी हूँ । जंजीरों को कब मैंने बाँध लिया पैरों में स्वतंत्रता की चाह जाने क्यों झुलसने लगी...

  • साहित्य

    साहित्य

    साहित्य कोई बहस का मुद्दा नहीं , समाज का दर्पण है दोस्तो । प्रकृति का चिंतन है , प्रेम का चित्रण है । सदियों की प्यास है , महबूब का मंथन है । तम का अघ्ययन...