Author :

  • हाउसवाइफ

    हाउसवाइफ

    हां मैं सिर्फ एक हाउसवाइफ ही तो हूँ समाज की नजरों में जिसका कोई वजूद नहीं । सपनों को आंखों में बसाए , ख़्वाबों को दिल में छिपाए कब बड़ी हो जाती है लड़की उम्र का...

  • इश्क़

    इश्क़

    जीने की आरजू में रोज मरते हैं , हम वो परवाने हैं जो इश्क़ की आग में रोज खुद को फना करते हैं । तड़फते हैं दिन भर इश्क़ के चूल्हे में रात को इश्क़ के...

  • मौसम

    मौसम

    देखकर मौसम का मिजाज कोई भूला याद आता है । न जाने क्यों जिंदगी से कोई अनजान नाता जुड़ जाता है । बीत जाएँ चाहे हजारों सदियाँ पर दिल न जाने क्यों , भूल नहीं ….पाता...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    जन्नत सी लगती है कभी जमीं तो कभी घने जंगल के मानिंद । देखकर हसीं चेहरा खुश हो जाती , तो बिखर जाती कभी अरमान सी। किताब जैसे अल्फाज सुकून दे जाते , मोतियों की माला...

  • जज्बात

    जज्बात

    उबलते हुए जज्बात आंखों के रास्ते , गर्म पानी बनकर बहने लगते हैं जब । उम्मीदें दूर से एक आवाज लगाती है , अहसास दर्द के चीखने लगते हैं तब। नशा बन जाता है इश्क़ जहर...

  • साहित्य

    साहित्य

    साहित्य कोई बहस का मुद्दा नहीं , समाज का दर्पण है दोस्तो । प्रकृति का चिंतन है , प्रेम का चित्रण है । सदियों की प्यास है , महबूब का मंथन है । तम का अघ्ययन...

  • आरजू

    आरजू

    जीने की आरजू में रोज मरते हैं हम वो परवाने हैं जो इश्क़ की आग में खुद को फना करते हैं तड़फते हैं दिन भर इश्क़ के चूल्हे में रात को इश्क़ के धुंए में दामन...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    प्यार की रुसबाइयाँ भी अजीज लगने लगी जाने क्यों नफरत की आदत सहज लगने लगी न लिखने का दिल करता है न पढ़ने का हर वक़्त दिल को बगावत की बू आने लगी कभी बरसती थी...

  • मोह्हबत

    मोह्हबत

    मेरे आंसुओं का हिसाब कैसे चुका पाओगे जाओगे जब जन्नत में मेरा ही नूर पाओगे प्यार की जरूरत ने हमें भिखारी बना दिया दीवाने प्यार के हम जैसे और कहाँ पाओगे देखी न होगी ऐसी दर्द...

  • बिन तुम्हारे

    बिन तुम्हारे

    अर्थ का अनर्थ है , बिन तुम्हारे जीवन ये व्यर्थ है। शब्द सिर्फ शब्द हैं। बिन तुम्हारे जिंदगी ये अव्यक्त है। गूँज है नाद की। बिन तुम्हारे गूँज भी सिर्फ दर्द है । दर्द ही दर्द...