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  • कविता

    कविता

    देख रही हूँ फिर से बदल रहे हो तुम तोड़कर धारा से संबंध सारे आसमान में उड़ रहे हो तुम देखो प्रलंभन से जरा दूर रहना तुम अक्स तारों का क्यों फिर से ओढ़ रहे हो...

  • नववर्ष

    नववर्ष

    अलौकिक अवधारणा से पूर्ण हो नूतन वर्ष की परिकल्पना , संदेश प्रेम भरा संसार में हर पल फैलाना तुम । नववर्ष की उत्कंठा में पतझड़ को मत भूल जाना तुम , सार सम्पूर्ण जीवन का दो...

  • मेरा  देश

    मेरा देश

    मेरे देश की अनमोल बातें , मुझको याद दिलाती हैं । मैं हूँ पहले एक इंसान , मर्यादा यही सिखाती है । गाय हमारी पूजनीय माता , श्रद्धा से .. गहरा नाता है दूध देकर पितरों...

  • औरत और उम्मीद

    औरत और उम्मीद

    उम्मीदों के सुलगते चूल्हे पर जाने कितने युग बीत गए साँचा बनाकर औरत का क्यों प्रभु तुम भी भूल गए । लो फिर से आया सुहाना सावन पतझड़ में फूल भी टूट गए , अश्रु बनकर...

  • सिर्फ तुम

    सिर्फ तुम

    बिन तेरे सब सूना लगता है एक तू ही दिल के करीब लगता है । इश्क़ भी तू नफरत भी तू सारा जहाँ रकीब लगता है एक तू ही दिल के करीब लगता है सुबह भी...

  • घुटन

    घुटन

    मुझे कहीं ले चलो दूर इन हवाओं से सहमी घटाओं से नदी का किनारा हो पहाड़ों का बसेरा हो । न हो किसी के खोने का डर न हो किसी के रूठने का डर प्यार ही...


  • जज्बात

    जज्बात

    जज्बातों का जब कोई मोल नहीं , बाजार है ये यहाँ कोई जोर नहीं । बिकते हैं हर मोड़ पे ईमान ओ आँसू मुस्कराहट का यहाँ कोई दौर नहीं । फ़र्ज और कर्ज में खो जाते...

  • स्त्री

    स्त्री

    चित्रित की जाती है सदियों से कागज और कैनवास पर बारीकी से सजाई जाती है घर की दहलीज पर रंगोली और रोली के शृंगार से बहन, बेटी, माँ, पत्नी,और प्रेयसी सभी पवित्र और प्यारे नामों से...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्रेम दुर्लभ नहीं प्रेम तो तपस्या है ।आप लिखिए और प्रेम में खो जाइये । प्रेम राधा है प्रेम कृष्ण है ,प्रेम ही तो सम्पूर्ण विश्व है ।प्रेम न हो तो दुनिया एक अंगार के समान...