कविता

तिलिस्म

एक झूठा तिलिस्म जो भरभरा कर बिखर गया आ गया सच वो सहसा जो मुँह से निकल गया । सपनों का टूटना तो तय है सदियों से जमाने में हसीन ख्वाब का बिछुड़ना दर्द फिर से दे गया । विधि का विधान कौन बदल पाया है संसार मे , जीवन का एक और सत्य फिर […]

लघुकथा

लघु कथा – श्रद्धा या श्राद्ध

पास वाले कमरे से बर्तन को जोर जोर से पीटने की आवाज आ रही थी ,लेकिन सुधा अपनी बहन से बात करने में मगन थी । बहू ने पास आकर सासू माँ से कहा ….माँ जी ,लगता है अम्माजी को कुछ चाहिए ।आप जाकर देख लीजिए मैं रसोईघर में हूँ ।सुधा ने बड़े ही अनमने […]

कविता

दर्द का सफर

मंजिलों की ख्वाईश में अक्सर कदम डगमगा जाते हैं फिसल जाते हैं रास्ते हाथों में सिर्फ टुकड़े नजर आते हैं । बेपनाह इश्क़ में अक्सर जज्बात का कोई मोल नहीं होता शायरों के जख्म भी जब हँसते हुए पैगाम नजर आते हैं । मदिरा को दोष क्यों देते हो ऐ मेरे साकी मोह्हबत में टूटे […]

कविता

जज्बात

जज्बातों की दौड़ में प्रेम के मरुस्थल पर भावना की स्याही से अंतर्मन के शब्दों को मोतियों की माला में गहरे स्पंदन के स्पर्श छपते चले गए ज्यूँ पन्नों को सहज लगे अक्षय है दुनिया में सिर्फ प्रेम की बाती दुनिया के अनेकों अक्षर में प्रेम पुंज का सुनहरा प्रकाश ज्योत बनकर जले वर्षा वार्ष्णेय […]

कविता पद्य साहित्य

मंजिल

मंजिलों की ख्वाईश में अक्सर कदम डगमगा जाते हैं फिसल जाते हैं रास्ते हाथों में सिर्फ टुकड़े नजर आते हैं बेपनाह इश्क़ में अक्सर जज्बात का कोई मोल नहीं होता शायरों के जख्म भी जब हँसते हुए पैगाम नजर आते हैं मदिरा को दोष क्यों देते हो ऐ मेरे साकी ! मोह्हबत में टूटे हुए […]

सामाजिक

लड़की या संपत्ति

एक लड़की की जिंदगी घर से शुरू होकर घर पर ही खत्म हो जाती है ।आज भी एक लड़की की पढ़ाई लिखाई से ज्यादा उसके घर के कामों को महत्व दिया जाता है ।उसकी ईमानदारी से ज्यादा उसके रूप और सौंदर्य को ज्यादा अहमियत दी जाती है । शादी से पहले एक हँसती खिलखिलाती लड़की […]

कविता

बसंत

बसंत कब रुकता है किसी के जीवन में पतझड़ का चलन जोर पर है अब तो प्रेम पर कब अधिकार है किसी का नफरत का चलन चहुँ ओर है अब तो शब्दों से खेलते तो भी मुनासिब था हृदय की तरंगों से खेलना ही खेल है अब तो दिल में मचाकर प्रेम का मनोरम तांडव […]

कविता पद्य साहित्य

प्रेम

वो मुक्तक है मेरी विराम चेतना का उदघोषक है मेरी सतत नीरवता का प्रकाश है अविरल बहती ऊर्जा का गीत है मेरी रगों में बहती सरगम का वो प्रेम है मेरी कविता के अल्फाज का वो धुन है मेरे शब्दों में तैरती तरंग का वो वेदना है दुनिया की अनजानी सी वो संवेदना है जैसे […]

कविता

कान्हा

ओ कान्हा ओ कान्हा धुन पर तेरी थिरकना हर पल दिल को क्यों भाता है मैं हूँ तेरी तू है मेरा क्यों गीत यही दिल गाता है ओ कान्हा ओ कान्हा मुस्कान मधुर तेरे कपोलों पर देखकर दिल बरबस रुक जाता है तू है मेरा मैं हूँ तेरी वृन्दावन में मन रम जाता है ओ […]

कविता

कविता

हसीन दरख्तों के निशान भी जब जमीन को चुभने लगें मुमकिन है दरख्तों का जिंदा रहना क्या हुआ जो धरती से अलग होना पढ़े। वक़्त कहाँ है अब किसी के लिए मस्त हैं सब अपने जहान में । मत बता किसी को गम अपना क्या हुआ जो दर्द खुद का छिपाना पढ़े । इल्जाम वो […]