कविता

धुंध

जिंदगी के तूफानों से घिरकर जब घबरा जाते हैं सुकून की एक छोटी सी वजह तलाशते हैं । बहुत गुरूर था कभी हमें जिनकी दोस्ती पर न जाने क्यों आज वही हममें ऐब निकालते हैं । नहीं अच्छी लगती अब बच्चों जैसी शरारतें न दिल को भाता है अब कोई भी मजाक सारी दुनिया से […]

क्षणिका

पल

पल पल हर पल जो पल रहा दिल के अंदर कोई और नहीं वही तो है वो पल जो पल रहा मन के अंदर तुम क्या जानो उस पल का डर जिसने भुला दिया सदियों का डर प्रेम बनकर जो समाया है साँसों के अंदर वो पल नहीं भूलता मुझको हर पल वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

क्षणिका

क्षणिकाएँ

पिघल न जाये गर दिल तो कहना आँसूओं में मेरे संग संग चलना मिल जाये गर मुझ जैसा कोई और जो दिल चाहे सजा मुझे देना ************* हाथ छुड़ाना तो एक बहाना था सच तो हमसे मन भर जाना था निभाई जो प्रीत कृष्ण ने राधा से इंसानों ने कब प्रेम को जाना था ************* […]

कविता

नववर्ष की शुभकामनाएं

जब हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है फिर क्यों नववर्ष के कैलेंडर को परेशान हैं माना कि ये सब अंग्रेजों की देन है फिर शादी के कार्ड पर क्यों तारीख की दरकार है। चलो आज से कैलेंडर लाना बंद करो क्योंकि ये हमारी संस्कृति का अपमान है । हम कब कहते हैं कि मदिरा का […]

कविता पद्य साहित्य

प्रेम

प्रेम से तुम भी कभी प्रेम करके तो देखो , प्रेम नस नस में न समा जाए तो कहना । प्रेम की बातें जरा प्रेम से करके तो देखो , प्रेम दिल में न भर जाए तो कहना । प्रेम के लिए जरा प्रेम से मिलकर तो देखो प्रेम साँसों में न समा जाए तो […]

कविता पद्य साहित्य

ख्वाब

आँखें ढूँढती हैं हर पल वो ख्वाब ख्वाब में भी जो सच लगे बाँध कर उड़ते हुए मन को जो सिर्फ अपना सा लगे बिछुड़ने का न हो डर एक पल भी जीता हुआ कोई सपना लगे । कभी रख दे दुखती हुई रग पर उँगली धीरे से सहलाकर मुझसे पूछे बताओ न क्या गम […]

कविता पद्य साहित्य

मंजिल

मंजिलों की ख्वाईश में अक्सर कदम डगमगा जाते हैं फिसल जाते हैं रास्ते हाथों में सिर्फ टुकड़े नजर आते हैं । बेपनाह इश्क़ में अक्सर जज्बात का कोई मोल नहीं होता शायरों के जख्म भी जब हँसते हुए पैगाम नजर आते हैं । मदिरा को दोष क्यों देते हो ऐ मेरे साकी मोह्हबत में टूटे […]

कविता पद्य साहित्य

प्रेम और दुनिया

प्रेम से न किसी का वास्ता पैसा ही सबसे बड़ा रिश्ता हार जाता है सच्चा रिश्ता अहम जिंदगी का फरिश्ता माँ बाप की गलती की सजा क्यों भुगतता ताउम्र बच्चा यूँ तो कहने को भीड़ है बहुत हर दिल ढूंढता सच्चा रिश्ता आँसू भी जब लगने लगे बोझ टूट जाता दिल का गुलिस्तां मतलबी संसार […]

कविता

तिलिस्म

एक झूठा तिलिस्म जो भरभरा कर बिखर गया आ गया सच वो सहसा जो मुँह से निकल गया । सपनों का टूटना तो तय है सदियों से जमाने में हसीन ख्वाब का बिछुड़ना दर्द फिर से दे गया । विधि का विधान कौन बदल पाया है संसार मे , जीवन का एक और सत्य फिर […]

लघुकथा

लघु कथा – श्रद्धा या श्राद्ध

पास वाले कमरे से बर्तन को जोर जोर से पीटने की आवाज आ रही थी ,लेकिन सुधा अपनी बहन से बात करने में मगन थी । बहू ने पास आकर सासू माँ से कहा ….माँ जी ,लगता है अम्माजी को कुछ चाहिए ।आप जाकर देख लीजिए मैं रसोईघर में हूँ ।सुधा ने बड़े ही अनमने […]