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  • अवसाद

    अवसाद

    जिंदगी भी कितने रंग बदलती है ।जब भी हम सोचते हैं कि सब कुछ अच्छा चल रहा है ,अचानक एक तेज आंधी आती है और सब कुछ बिखेरकर चली जाती है ,यही तो जिंदगी है ।हम...

  • प्रीत

    प्रीत

    नेह लगाकर भूल गए क्यों पास बुलाकर दूर गए क्यों। मैं तो तुम्हरी प्रीत बाबरी , वंशी बजाकर छोड़ गए क्यों । अँखियाँ मेरी सावन भादों , याद तुम्हारी मुझे बहकाबें । प्रीत हैं जब राधा...

  • जज्बात

    जज्बात

    जज्बातों में भीगा हुआ कुछ तन्हा सा मुकाम था कुछ लफ्ज थे उलझे हुए कुछ तन्हाई का पैगाम था समझाया था दिल ने मेरे छोड़ दे उम्मीद किसी से न माना था ये दिल मेरा गहराई...

  • ख्यालात

    ख्यालात

    उलझे उलझे से ख्यालात कर जाते हैं बैचैन मुझे , खुश रहने की जिद में और भी उलझ गयी जिंदगी । बहके बहके से जज्बात रुलाते हैं मुझे , रुत प्यार की पतझड़ बना गयी जिंदगी...

  • पिता की गोद

    पिता की गोद

    काश मैं फिर से छोटी बच्ची बन जाती और तुम्हारी गोद में खेल पाती । झूल जाती तुम्हारे कंधों पर तुम्हारे बालों से छेड़ पाती । न होती कोई कमी कभी भी प्यार की दुलार की...

  • आर्तनाद

    आर्तनाद

    आर्तनाद वो धरा का पिघलता हो यूँ शबाब बिखर गई वो शमा यूँ अंधेरा हो लाजवाब । चट्टानों की वो खामोशियाँ सुन रहा है जहाँ , द्वन्द के बीच में शान्त चमक रहा आफताब कविता की...

  • दर्द

    दर्द

    दर्द को रूह में उतारकर हमने जो लिखी रुसवाई , तड़फकर दुनिया भी कह उठी ये कहाँ से शबे गम आई । फिराक ऐ यार के अदब में जुर्रतें तो मिसाल थी , अदब ऐ इश्क़...

  • गृहिणी

    गृहिणी

    हां मैं सिर्फ एक हाउसवाइफ ही तो हूँ समाज की नजरों में जिसका कोई वजूद नहीं । सपनों को आंखों में बसाए , ख़्वाबों को दिल में छिपाए कब बड़ी हो जाती है लड़की उम्र का...

  • हाउसवाइफ

    हाउसवाइफ

    हां मैं सिर्फ एक हाउसवाइफ ही तो हूँ समाज की नजरों में जिसका कोई वजूद नहीं । सपनों को आंखों में बसाए , ख़्वाबों को दिल में छिपाए कब बड़ी हो जाती है लड़की उम्र का...

  • इश्क़

    इश्क़

    जीने की आरजू में रोज मरते हैं , हम वो परवाने हैं जो इश्क़ की आग में रोज खुद को फना करते हैं । तड़फते हैं दिन भर इश्क़ के चूल्हे में रात को इश्क़ के...