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  • साहित्य

    साहित्य

    साहित्य कोई बहस का मुद्दा नहीं , समाज का दर्पण है दोस्तो । प्रकृति का चिंतन है , प्रेम का चित्रण है । सदियों की प्यास है , महबूब का मंथन है । तम का अघ्ययन...

  • आरजू

    आरजू

    जीने की आरजू में रोज मरते हैं हम वो परवाने हैं जो इश्क़ की आग में खुद को फना करते हैं तड़फते हैं दिन भर इश्क़ के चूल्हे में रात को इश्क़ के धुंए में दामन...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    प्यार की रुसबाइयाँ भी अजीज लगने लगी जाने क्यों नफरत की आदत सहज लगने लगी न लिखने का दिल करता है न पढ़ने का हर वक़्त दिल को बगावत की बू आने लगी कभी बरसती थी...

  • मोह्हबत

    मोह्हबत

    मेरे आंसुओं का हिसाब कैसे चुका पाओगे जाओगे जब जन्नत में मेरा ही नूर पाओगे प्यार की जरूरत ने हमें भिखारी बना दिया दीवाने प्यार के हम जैसे और कहाँ पाओगे देखी न होगी ऐसी दर्द...

  • बिन तुम्हारे

    बिन तुम्हारे

    अर्थ का अनर्थ है , बिन तुम्हारे जीवन ये व्यर्थ है। शब्द सिर्फ शब्द हैं। बिन तुम्हारे जिंदगी ये अव्यक्त है। गूँज है नाद की। बिन तुम्हारे गूँज भी सिर्फ दर्द है । दर्द ही दर्द...

  • प्यार की परिभाषा

    प्यार की परिभाषा

    प्यार क्या है ,क्या एक भीख है जो सबके सामने कटोरा लेकर खड़े रहने से मिल सकती है ?क्या प्यार को किसी की खुशामद करके प्राप्त किया जा सकता है ?कभी नहीं ।जिस प्रकार लाभ हानि...

  • मोहब्बत

    मोहब्बत

    बड़ी उलझन में फंसी है जिंदगी मेरी , न डोर मिलती है कहीं से मंजे की टूट गयी है पतंग मेरी । दुनिया की रस्मों करम से वाकिफ नहीं थी ये नन्ही सी जान मेरी ,...

  • रिश्ते

    रिश्ते

    सारे रिश्ते बेमानी लगते हैं , हो जाते हैं वो भी दूर जो ख़्वाबों में अपने लगते हैं । तिलिस्म है ये झूठी दुनिया का , कौन किसी का होता है, दर्द है सिर्फ अपना ,...

  • हमसफर

    हमसफर

    पुलकित हो झूम जाती हूँ , अक्स तेरा चहुँ ओर पाती हूँ । मैं हूँ कागज तुम मेरी पाती हो , तुम से ही तो जीवन पाती हूँ । अधरों पर हैं गीत मिलन के ,...