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  • जिंदगी

    जिंदगी

    बहुत अकेली है जिंदगी , जरा गले लगाओ न । टूट रही है शब्दों की माला , धागा प्रेम का लगाओ न । मायूस है देखो वो अंधेरा भी , दीप प्रीत के जलाओ न ।...

  • गरीबी

    गरीबी

    मंजीरे बज रहे थे ,पर सांसें उदास थी । ढोलक की थाप पर बेसुरों की आग थी । रोटियों की आवाज ने भूख को आवाज दी । पेट की भूख ने घुंघरुओं को मात दी ।...

  • स्त्री

    स्त्री

    झूठे प्यार की उम्मीद में आशियाना सजा लेती है , एक स्त्री त्यागकर अपनी सभी इच्छाएं खुद को मना लेती है । छोड़कर वो नीड़ बिताये थे जहां बरसों उसने , एक अनजानी डगर को बनाकर...

  • लौट के आ

    लौट के आ

    खो न जाऊँ कहीं धुन्ध में , आ फिर से प्यार ओढ़ कर आ । चांदनी रात में हो हाथ मेरे हाथ में , बनाकर तारों को घूंघट शर्म का , जिंदगी की सौगात लेकर आ...

  • माँ

    माँ

    माँ ,माँ क्या होती है ?क्या कोई बता सकता है ?नही ,क्योंकि जिनको माँ मिल जाती है वो इसका अर्थ भी नही समझते । माँ वो है , जो बच्चे के रोने से पहले उसकी भूख...

  • दर्द

    दर्द

    डूब जाने का अपना अलग ही मजा है , न समझाओ हमें बिखरते हुए ख्वाबों की तरह ! न होंगे हम तो किसको गीत सुनाओगे ! उजड़े हुए चमन से कैसे निजात पाओगे ! समंदर है...

  • ग़ज़ल : दर्पण

    ग़ज़ल : दर्पण

    कुछ दिनों से लगता है जैसे मैं नहीं रही खो गयी हूँ भीड़ भरे रास्तों पर फिर कहीं न कोई आवाज है प्यार भरी न उम्मीद कहीं न जाने किस मोड़ पर जिंदगी मेरी जा रही...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्रेम ही तो है ईश्वर का अनमोल वरदान ,नहीं है प्रेम सिर्फ एक दिन का मेहमान सृष्टि से पूर्व बहता था हवाओं में फिजाओं में ,सृष्टि के बाद भी इंसान की अनिवार्य पहचानप्रेम एक ऊर्जा है,प्रेम ही...

  • ख़ुशी

    ख़ुशी

    जाने क्यों लगते सारे रिश्ते बेमानी है ।जिंदगी रहनी है तन्हा- तन्हा ,सिर्फ ख्वाबों में जिंदगी बितानी है ।जिसको भी चाहा हद से ज्यादा ,उससे ही ठोकर खानी है ।।रिश्तों के झंझाबात में मिलतीसिर्फ एक वीरानी...

  • मिठास

    मिठास

    छू गयी दिल को मेरे तेरी यही दिल लुभाने की अदाएं , कितना नेह है भरा दिल में तेरे , क्या सच में मैं इतनी ही मीठी हूँ , या फिर ये सिर्फ एक बहम है...