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  • चक्करव्यूह

    चक्करव्यूह

    कुछ बातें आहत करती हैं तो वही कुछ बातें आगे का राह भी प्रकाशित करती हैं. अब नजरिया अपना-अपना गिलास आधा भरा या आधा खाली. #सवाल_बहना कल्पना भट्ट जी के #जबाब_विभा रानी श्रीवास्तव के 01. प्रश्न...

  • कहाँ_मिटती_भूख

    कहाँ_मिटती_भूख

    “मोटर साइकिल मिल गईल मुनिया” थाने से छुड़ाये मोटरसाइकिल की सूचना पापा दे रहे थे… पापा के फोन रखते भाई को फोन लगाई ” सब ठीक हो गया, अब देर रात घर नहीं लौटियेगा।” “हाँ! सब...

  • “वक्त का गणित”

    “वक्त का गणित”

    कलाकारी करते समय कूँची थोड़ा आडा-तिरछा कमर की और जरा सा दूसरे जगह भी अपना रंग दिखा दी… हाथी पर चढ़े, टिकने में टक टाका टक अव्यवस्थित ऐसे कलश को देख मटका आँख मटका दिया… कलश...

  • “सम्मोहन”

    “सम्मोहन”

    सरंचना पुस्तक पढ़ने में मैं व्यस्त थी कि मोबाइल टुनटुनाया “हेल्लो” “क्या आप पटना से विभा जी बोल रही हैं…?” “जी हाँ! आप कौन और कहाँ से बोल रही हैं… ? क्यों कि यह नम्बर अनजाना...


  • “उड़ान”

    “उड़ान”

      तालियों की गड़गड़ाहट से सारा हॉल गुंजायमान हो रहा था… आज के समारोह में पढ़ी गई सारी लघुकथाओं में सर्वोत्तम लघुकथा श्रीमती रंजना जी की घोषित की जाती है… मुख्य-अतिथि श्री महेंद्र मिश्र (वरिष्ट साहित्यकार...

  • बदला

    बदला

    “यह क्क्य्या नाटक लगा रखी हो… सुबह से बक-बक सुन पक्क गया मैं… जिन्हें अपने पति की सलामती चाहिये वे पेड़ के नजदीक जाती हैं… ई अकेली सुकुमारी हैं…” ड्राइंगरूम में रखे गमले को किक मारते...


  •  “तमाचा”

     “तमाचा”

    एक दिन मैं हाथों में तख्ती लिए हर उम्र के लोगों के पंक्ति के सामने से गुजर रही थी। युवाओं की संख्या ज्यादा थी, “तीन तलाक हमारा हक़ है बिल वापस लो” तख्ती पर लिखे थे,...

  • ठगी

    ठगी

    यूँ तो लगभग सभी पर्यटन स्थलों पर श्वेत मोती , रंगीन मोती की माला , लकड़ी के समान , चाभी रिंग , मूर्ति पत्थरों पर , चावल पर नाम लिखने वालों की एक सी भीड़ होती...