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  • “समझ”

    “समझ”

    -एक्सपायरिंग डेट हो गई हैं आप अम्मा जी” -चल इसी बात पर कुछ चटपटा बना खिला” खिलखिलाते हुए पचासी साल की सास और अड़तीस-चालीस साल की बहू चुहल कर रही थी -आज मुझे *एक दीया शहीदों...


  • रणनीतिज्ञ

    रणनीतिज्ञ

    “सक्सेना मैम… मैम… सक्सेना मैम…” आश्चर्य हुआ कि देश से इतनी दूर जर्सी की सड़क पर उसे कौन आवाज दे सकता है. फिर भी मुड़कर देखा तो एक नौजवान दौड़ता हुआ उसकी ओर आता दिखा और...

  • अपना-पराया

    अपना-पराया

    सीलन लग बर्बाद ना हो जाएँ यादगार लम्हें… बरसात खत्म होने को ही है… चलो आज सफाई कर ही दी जाए… बुदबुदाती विभा अलमीरा से एलबम निकाल पलंग पर फैला दी… पास ही खड़ा बेटा एलबम...

  • सूझ-बूझ

    सूझ-बूझ

    “इतने सारे बिस्कुट के पैकेट! क्या करेगा मानव ?” विभा अपनी पड़ोसन रोमा से पूछ बैठी । “क्या बताऊँ विभा! अचानक से खर्च बढ़ा दिया है, बिस्कुट के संग दूध, रोटी, मांस खिलाता है । मेरा बेटा नालायक...

  • सकूँ

    सकूँ

     सुबह से निकली गोधुलि लौट रही थी… थकान से जी हलकान हो रहा था… ज्यों ज्यों घर क़रीब आता जा रहा था त्यों त्यों रात्रि भोजन याद आ रहा था साथ ही पकाना याद आ रहा...

  • सीख

    सीख

    “गुरु जी एक लघुकथा लिखने का विचार आया है” “तो लिख डालो, किस उलझन में हो! आधार बिंदु क्या है लेखन का?” “एक लड़का और एक लड़की बचपन से पड़ोस में रहते हैं… दोनों के बीच...

  • नया सवेरा

    नया सवेरा

    रुग्न अवस्था में पड़ा पति अपनी पत्नी की ओर देखकर रोने लगा, “करमजली! तू करमजली नहीं… करमजले वो सारे लोग हैं जो तुझे इस नाम से बुलाते है…” “आप भी तो इसी नाम से…”! “पति फफक...

  • लघुकथा : भूमिका

    लघुकथा : भूमिका

    “आज तो तुम बहुत खुश होगी. माँ-बाबूजी गाँव लौट रहे हैं! “पर क्यों”? “गुनाह करके मासूमियत से पूछ रही. क्यों”? “गुनाह”? “हाँ! आज तुमने भोलू के गाल पर चाँटा जड़ दिया क्यों”? “भोलू मेरा भी बेटा...

  • कृष्ण-सुदामा

    कृष्ण-सुदामा

    अपने घनिष्ट मित्र नंदनी के पार्थिव शरीर, अग्नि को सौंप कर सतीश अपने भावों को यादों का खाद पानी दे सींच रहा। उसकी बिटिया की शादी अचानक से तैय हो गई जल्दबाज़ी में लाखों का इंतज़ाम...