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  • उलझन में लिपटा जीवन

    उलझन में लिपटा जीवन

    .अनेकानेक दलों के मैनिफेस्टो को वह अबतक आकंलन-निरीक्षण-परीक्षण करता रहा था… आजतक कोई सरकार उसे ऐसी नहीं दिखी जो जारी किए अपने मैनिफेस्टो को पूरा लागू करने में सक्षम रही हो। फिर चुनावी मौसम गरमाया हुआ...


  • लघुकथा – परीक्षा

    लघुकथा – परीक्षा

    “माँ! माँ आज मैं बेहद खुश हूँ… आप पूछेंगी ही क्या कारण है… पहले ही बता दूँ कि हमारी सारी चिंताएं-परेशानियाँ खत्म होने वाली है… मैं जिस कम्पनी में काम करती हूँ उसी कम्पनी में साकेत...



  • आज का हामिद

    आज का हामिद

    तब हामिद क्या करता, कल्पना करना मुश्किल लगा तो सोच रही हूँ…   गाँधीमैदान में ट्रेड फेयर लगा था। स्कूल के कुछ मित्रों ने वहाँ चलने की योजना बनायी। सभी बच्चे बड़े घरानों से थे लेकिन कौशल एक...


  • “संस्कार”

    “संस्कार”

    हरीश लाला के बड़े बेटे गिरीश की शादी के लिए लड़की रीमा और रीमा के माता-पिता आये.. चाय नाश्ते के बाद बात शुरू हुई…“मुझसे शादी कर लें!” रीमा ने गिरीश से कहा।“मेरी शक्ल पर बुद्धू या...

  • जीवंतता

    जीवंतता

    स्व लेखन की पुस्तक के लोकार्पण होने पर मेरी प्रसन्नता इंद्रधनुषी हो रही थी..। सोच बनी कि घनिष्ठ मित्रों को भी एक-एक प्रति भेंट करनी चाहिए। मित्रों की सूची बनाने के क्रम में बिगत सात वर्षों...