लघुकथा

“सम्मोहन”

सरंचना पुस्तक पढ़ने में मैं व्यस्त थी कि मोबाइल टुनटुनाया “हेल्लो” “क्या आप पटना से विभा जी बोल रही हैं…?” “जी हाँ! आप कौन और कहाँ से बोल रही हैं… ? क्यों कि यह नम्बर अनजाना है मेरे लिए…!” “मैं हाजीपुर से मीता बोल रही हूँ।” “जी बोलिये किस बात के लिए फोन की हैं… […]

लघुकथा

◆अपनी_बारी_खुशियों_से_यारी◆

आज 05/06/2018 सुबह चार बजे आँख खुली तो कच्ची नींद जगी हूँ , ऐसा नहीं लगा… एक पल सोचने में लगा दिमागी अलार्म बजा क्यों… उठकर मोबाइल सर्च की तो पता चला देर रात सूचना आई थी संगनी क्लब में जाना है… पर्यावरण रैली में शामिल होने… साढ़े छ में पहुँचना है… रात में सोते […]

लघुकथा

“उड़ान”

  तालियों की गड़गड़ाहट से सारा हॉल गुंजायमान हो रहा था… आज के समारोह में पढ़ी गई सारी लघुकथाओं में सर्वोत्तम लघुकथा श्रीमती रंजना जी की घोषित की जाती है… मुख्य-अतिथि श्री महेंद्र मिश्र (वरिष्ट साहित्यकार नेपाल) जी के घोषणा के खुशियों की लाली से रंजना सिंह रक्तिम कपोल लिए दोनों हाथ जोड़े मंच से […]

लघुकथा

बदला

“यह क्क्य्या नाटक लगा रखी हो… सुबह से बक-बक सुन पक्क गया मैं… जिन्हें अपने पति की सलामती चाहिये वे पेड़ के नजदीक जाती हैं… ई अकेली सुकुमारी हैं…” ड्राइंगरूम में रखे गमले को किक मारते हुए शुभम पत्नी मीना पर दांत पिसता हुआ झपट्टा और उसके बालों को पकड़ फर्श पर पटकने की कोशिश […]

लघुकथा

“लेखनी की आत्महत्या”

  बिहार दिवस का उल्लास चहुँ ओर बिखरा पड़ा नजर आ रहा… मैं किसी कार्य से गाँधी मैदान से गुजरते हुए कहीं जा रही थी कि मेरी दृष्टि तरुण वर्मा पर पड़ी जो एक राजनीतिक दल की सभा में भाषण सा दे रहा था। पार्टी का पट्टा भी गले में डाल रखा… तरुण वर्मा को […]

लघुकथा

 “तमाचा”

एक दिन मैं हाथों में तख्ती लिए हर उम्र के लोगों के पंक्ति के सामने से गुजर रही थी। युवाओं की संख्या ज्यादा थी, “तीन तलाक हमारा हक़ है बिल वापस लो” तख्ती पर लिखे थे, तुम्हारी कौम क्यों नहीं चाहती कि औरतें सुखी हो?” “उन्हें दुख क्या है?” “तुम युवा हो हज के लिए […]

लघुकथा

ठगी

यूँ तो लगभग सभी पर्यटन स्थलों पर श्वेत मोती , रंगीन मोती की माला , लकड़ी के समान , चाभी रिंग , मूर्ति पत्थरों पर , चावल पर नाम लिखने वालों की एक सी भीड़ होती है… कांचीपुरम का समुंद्री तट यहाँ बसा पुराना शिव मंदिर सैलानियों के लिए मनमोहक स्थल… पूरे देश से जुटी […]

क्षणिका

क्षणिकायें

01. मेरा है , मेरा है , सब मेरा है इसको निकालो उसको बसाओ धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें अनेकानेक कहानियाँ इति हुई लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें तब भी न क्षणभंगुर संसार झलके 02. माया लोभ मोह छोह लीला उजड़ा बियावान में जा मिला दम्भ आवरण सीरत के मूरत अब […]

लघुकथा

समय की सुन्दरता

“पुराना कम्बल ही हमें देने लाती न बिटिया!” “क्यों! ऐसा आप क्यों बोल रही हैं? दान भी दें और कुछ साल ढ़ंग का हो भी नहीं तो वैसे का क्या फायदा” “ये हमारे पास कल रहेगा कि नहीं तुम क्या जानो?!” “क्क्क्या ?” “तुमलोगों के जाते हमसे छीन लिया जायेगा और बेच दिया जायेगा!…” “कौन […]

लघुकथा

सुविधा सुमार

“देखो भाया! मैं ठहरा बनिया…। लेना-देना हमारा व्यापार है… मैंने आपका साल भर से बंद पड़ी स्कूटी ठीक करवा देने में मदद की… बरोबर… है न?” “बिल्कुल ठीक कहा आपने । आप बड़ा काम करवा दिए…” “अब हिसाब बराबर करने का है” “ले आइये ढ़ेर सारा मिठाई… मिठाई से कर्जा थोड़ा उतर जाए…” “अरे नहीं […]