बाल कविता

बाल कविता

आओ बच्चों खेलो खेल नानाजी के आंगन खेल नन्ही नन्ही तितली पकड़ो रंग – बिरंगे पंखों देखो यहां उड़ेगी वहां उड़ेगी जब पकड़ो तो खूब उड़ेगी धागा बांधकर खूब उड़ाओ आसमान का सैर कराओ रंग – बिरंगे फूलों पर बैठी सबके मन को मोह लेती बच्चे भी खूब करते खेल देखो खूब मचाए शोर! — […]

कविता

कोरोना

किस कदर ये कोरोना का आना हुआ किस कदर ये कोरोना का जाना होगा ये तो चीनी के बंदिसो से फैला हुआ आकर भारत में शोर खूब मचा रहा सोशल डिस्टेंस है इसका दवा सही मौत के गाल में जो फँसा हुआ किस कदर ये कोरोना का आना हुआ किस कदर ये कोरोना का जाना […]

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सवेरा

सूर्य की किरणें आंखे खोले मन्द मन्द मुस्कुरा रही प्रात: जगत के आगमन से मन प्रफुल्लित हो उठा! भौरें भी फूलों से लिपटे पक्षी भी खूब करवल करते मन्द हवाएं शीतल बहती मानव को आगाध कराती खेतों की हरियाली देखो हरे घास पर मोती बिखरे मानो सबका दिल हर लेता सूर्य की किरणें आंखे खोले […]

कविता

जनजातियां

आदिवासी कहे या जनजातियां इनकी जीवन को क्या कहने रही फूस की टूटी झोपड़ी फटे पुराने कपड़े पहने कपड़े भी खूब मेला रहते बच्चो की तो जीवनलीला ही कैसा सुबह शाम सब धूल में खेले रात अंधेरे में लिपट गए क्या कुदरत की कैसी माया कैसा उनको जीवन दिया! व्रत त्योहार से मतलब नहीं खान […]

कविता

कोरोनावायरस

कोरोना कोरोना का कहर डर आजकल बना हुआ उथल पुथल है मची हुई मानव संघर्ष है छिड़ा हुआ! स्वदेशी अपनाकर हम सब स्वच्छ भारत बना सकते विदेशी चलन तिरस्कार कर सुखमय जीवन जी सकते! हाय, हैलो, शेक् हैंड से ये जहर है खूब पनपता भारतीय हम सब हाथ जोड़कर इससे पंगा ले सकते हैं! मांसाहारी […]

कविता

श्रावण मास पवित्र है

श्रावण मास पवित्र है झर झर बरसे नीर शिवशंकर अविनासी है करत दुखों के दूर। भांग धतूरा खात है रहत सदा मतवाल अपने भक्तों को निज करत सदा उद्धार। वर्षा बरसे बिजली चमके श्रावण मास में शोर मचावे कावरिया की भीड़ लगी मुख से निकले बम का जयघोष। बाबा करते है उद्धार शरण में आए […]

हाइकु/सेदोका

हाईकू

प्रीत मिलन मधुरमय बेला करे पुकार! नई उमंग मन मे है तरंग हुई मगन ! सुनी डगर निहारते सनम मिले कदम! लोग बेगाने बने इस तरह मिले सबक! अजनबी ये मन करता दुआ शुक्रिया तेरा? बिजया लक्ष्मी

कविता

किस कदर करवां का भी जाना हुआ

किस कदर चाँद तारों का आना हुआ, किस कदर कारवाँ का भी जाना हुआ, हम जमाने की कलियाँ , खिलाते गये, हर जमाने मे कोई मुक्कदर बना किस कदर कारवाँ का भी जाना हुआ.! ऐसी भोली सी सूरत कहाँ छुप गयी सुनने वालों का दिल भी थम सी गयी हर नई एक कलियाँ संयोजे हुए […]

कविता

प्रभु एक आश है तेरी

लिखी तक़दीर में क्या खूब कभी समझ नही आती अपने दूर चले गए नादानी समझ नहीं पाए! जब मैं थी एक गुड़िया थे सबके आंचल के छांव आज वो दिन भुल गए अपने दूर चले गए! आज बिखर गए क्यों सब दिल में वैमनस्यता लिए हुए बस पश्वताप का दीपक मन में जला गए! प्रभु […]

कविता

मां

तेरे तन्हाईयों का दर्द मां मैं कैसे सहू तेरे बिन तेरे रुसवाइयों का डर मां किसी गम से कम नही। चाहें तू लाखं जरुरते पूरी कर दे मां पर सब बिखर जाते है सिर्फ तेरे बिन मां। चाहे तू कोई हमसफ़र चुन दें मेरे लिए मां पर तेरी कमी को पूरा कोई कर नहीं सकता। […]