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  • रक्षाबंधन (लघु कथा)

    रक्षाबंधन (लघु कथा)

    ‘अरे सुनती हो!….. छोटी नहीं आयी क्या राखी बांधने?’ उसे मालूम था, कि उसकी गरीबी के कारण छोटी बहन पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधने नहीं आती। वह छोटे के यहाँ जाती है।...

  • लघु कथा : भूखी जान

    लघु कथा : भूखी जान

    उसे भूख लगी थी, परंतु जेब में पैसे न होने के कारण टाउन पार्क में जा प्रकृति के सौंदर्य का नयन सुख और आराम करना ही उसे उचित लगा। पार्क में लगे वाटरकूलर से पानी पी...

  • लघुकथा – उदारमना

    लघुकथा – उदारमना

    वह स्वयं को दोराहे पर खड़ा देख रहा है। निर्णय नही ले पा रहा है कि किसे चुने और किसका साथ छोड़े। एक तरफ वह लड़की है, जिसे वह समाज के सामने वचनबद्ध हो अग्निफेरे लेकर...

  • लघु कथा – पिता

    लघु कथा – पिता

    अज़ब सी बेचैनी के कारण उसकी नींद खुल गयी। वह उठ कर रसोईघर में गया और पानी पिया। फिर से बिस्तर में जाने से पहले वह बच्चों के कमरे में झांका तो देखा बच्चे उन्मुक्त, बेतरतीब,...

  • लघुकथा – अहसास

    लघुकथा – अहसास

    वह तमतमाता हुआ प्रिंसिपल के कक्ष में घुसा। वातानुकूलित और सुव्यवस्थित कक्ष। यह देख उसका पारा सातवें आसमान पर था। उसने प्रिंसिपल साहब को बहुत कुछ सुना दिया। उसकी बातें ख़त्म होने पर प्रिंसिपल साहब अपनी...

  • लघु कथा : भूख

    लघु कथा : भूख

    ‘बाबू जी बच्चा सुबह से भूखा है। दूध के लिए दस रुपया दे दो।’ एक दुबले पतले बच्चे को गोद मे लिए उस मैली कुचैली औरत ने कहा। ‘नहीं मैं रुपया तो नहीं दूँगा। तुम चाहो...

  • लघु कथा – लाख़ बहाने

    लघु कथा – लाख़ बहाने

    पण्डित भगवानदास जी का भरापूरा परिवार है। परिवार में सात बेटे, बेटों की पत्नीयाँ। पन्द्रह पोते-पोतियों की किलकारियों के संगीत से हर वक्त एक मनोहारी वातावरण घर में बना रहता है। पण्डित जी स्वयं को संसार...

  • लघु कथा – ‘आगे की सोच’

    लघु कथा – ‘आगे की सोच’

    रसिक लाल ने कस्बे में कोल्ड वाटर सप्लाई का काम शुरू करने का इरादा अपने मित्रों को बताया तो उसके मित्रों ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा – ‘अरे रसिक! अपने कस्बे में छोटे-बड़े 18 तालाब...

  • सच्चा सेवक

    सच्चा सेवक

    रात के दस बजे थे। दीपेन्द्र खाना खा कर अपने बंगले के पीछे बने पार्क में टहल रहा था। तभी नौकर दौड़ा-दौड़ा आया ओर सूचना दी कि मंत्री महोदय का फोन आया हुआ है लैंडलाइन पर,...

  • मुफ्त के लड्डू

    मुफ्त के लड्डू

    कचहरी में ज्यादातर वक़ील सारा दिन ख़ाली ही बैठ कर चले जाते हैं| उनके पास सामाजिक, राजनीतिक और क्रिकेट की चर्चाओं के सिवा कोई और काम भूले भटके ही आता है| हाँ कुछ विरले वकील ऐसे...