समाचार

युवा साहित्यकार विजय विभोर सम्मानित

रोहतक में आज राष्ट्रीय युवा दिवस एवं राष्ट्र के महान युवा संत स्वामी विवेकानंद जी की 158वीं जयंती युवा दिवस के शुभ अवसर पर श्रीमद् शंकर स्वामी विश्व देवानंद तीर्थ धर्मार्थ ट्रस्ट एवं प्रज्ञा साहित्यिक मंच के संयुक्त प्रयास से युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इसमें डॉ० गोपाल कृष्ण आजाद , डॉ० मंजू बाला […]

लघुकथा

पूरा नाम (लघुकथा)

“हाँ तो, नाम क्या है तुम्हारा?” आगंतुक से कुर्सीधारी ने सवाल किया। “जी, महेश।” खड़े-खड़े ही विनम्रता पूर्वक जवाब दिया आगंतुक ने। “अरे पूरा नाम बता….।” कुर्सीधारी ने शब्दों को छानने की कोशिश की। “जी, महेश कुमार।” “अरे आगे भी कुछ लिखता होगा…।” अब कुर्सीधारी के स्वर में कड़कपन था। महेश कुर्सीधारी के चेहरे के […]

लघुकथा

जबरा फैन (लघुकथा)

“सर! मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूँ। सोशल मीडिया पर आपकी हर पोस्ट को लाइक करता हूँ।”सुनकर माननीय का मन प्रसन्न हुआ और उत्सुकतावश, “बड़ी अच्छी बात है। आजकल में आपने मेरी कौन-सी पोस्ट पढ़ी है।”एक कुटिल मुस्कान के साथ, “जी मैंने कहा लाइक करता हूँ…” और झेंपते हुए वह कन्नी काट गया।— विजय ‘विभोर’

लघुकथा

पवित्र पाप (लघुकथा)

“अरे पिता जी! आप…. इस समय?” शमशेर अपने पिताजी को रात के 10 बजे अपनी बैरक में देखकर हैरान था। शमशेर दूरदराज़ के एक छोटे-से गाँव का नौजवान है, जो अपनी कड़ी मेहनत से फ़ौज में भर्ती होने में सफ़ल गया था और ट्रेनिंग के लिए आया हुआ था। 7 बहनों में एक भाई और […]

लघुकथा

रक्षाबंधन (लघु कथा)

‘अरे सुनती हो!….. छोटी नहीं आयी क्या राखी बांधने?’ उसे मालूम था, कि उसकी गरीबी के कारण छोटी बहन पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधने नहीं आती। वह छोटे के यहाँ जाती है। शुभ महूर्त पर राखी बांधती है। छोटा भी उसको हर राखी पर खूबसूरत, कीमती उपहार और रुपया देकर उसका […]

लघुकथा

लघु कथा : भूखी जान

उसे भूख लगी थी, परंतु जेब में पैसे न होने के कारण टाउन पार्क में जा प्रकृति के सौंदर्य का नयन सुख और आराम करना ही उसे उचित लगा। पार्क में लगे वाटरकूलर से पानी पी बरगद के पेड़ के नीचे लगे बैंच पर बैठ वह भूखे पेट परमानन्द का अनुभव कर रहा था। चिड़ियों […]

लघुकथा

लघुकथा – उदारमना

वह स्वयं को दोराहे पर खड़ा देख रहा है। निर्णय नही ले पा रहा है कि किसे चुने और किसका साथ छोड़े। एक तरफ वह लड़की है, जिसे वह समाज के सामने वचनबद्ध हो अग्निफेरे लेकर जीवन भर साथ निभाने का वादा देकर अपनी जीवन संगिनी बना लाया था। वह भी बचपन के सभी रिश्तों, […]

लघुकथा

लघु कथा – पिता

अज़ब सी बेचैनी के कारण उसकी नींद खुल गयी। वह उठ कर रसोईघर में गया और पानी पिया। फिर से बिस्तर में जाने से पहले वह बच्चों के कमरे में झांका तो देखा बच्चे उन्मुक्त, बेतरतीब, बेफ़िक्र सो रहे हैं। यह देख उसे अपने बचपन के दिन याद आ गए जब वह सब भाई बहन […]

लघुकथा

लघुकथा – अहसास

वह तमतमाता हुआ प्रिंसिपल के कक्ष में घुसा। वातानुकूलित और सुव्यवस्थित कक्ष। यह देख उसका पारा सातवें आसमान पर था। उसने प्रिंसिपल साहब को बहुत कुछ सुना दिया। उसकी बातें ख़त्म होने पर प्रिंसिपल साहब अपनी कुर्सी से उठे और प्रोटोकॉल तोड़ते हुए उसे अपनी कुर्सी पर बैठाया। जैसे ही वह कुर्सी पर बैठा उसे […]

लघुकथा

लघु कथा : भूख

‘बाबू जी बच्चा सुबह से भूखा है। दूध के लिए दस रुपया दे दो।’ एक दुबले पतले बच्चे को गोद मे लिए उस मैली कुचैली औरत ने कहा। ‘नहीं मैं रुपया तो नहीं दूँगा। तुम चाहो तो बच्चे को खिलाने के लिए बिस्कुट दिलवा सकता हूँ।’ व्यक्ति ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए कहा। ‘ठीक है […]