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  • एक ख्वाब है।

    एक ख्वाब है।

    एक ख्वाब है ########## विकास के गूंजें चारों ओर मंत्र । असफल हो गंदी राजनीति के षड्यंत्र । ना कहीं भ्रष्टाचार हो ना हो भ्रष्टतंत्र । बस बिगुल बजे समृद्धि का खुशहाली का। हर कोई हो...

  • लाचारी

    लाचारी

    सामने गली की नुक्कड़ में छोटा सा घर दुल्हन की तरह सजा था! घर की चहल-पहल व रौनक से लग रहा था आज कोई बड़ी खुशी का अवसर है। तभी रीना की कामवाली बाई आ गई...

  • क्यूं मुकर्रर  नहीं?

    क्यूं मुकर्रर नहीं?

    क्या करे क्या नहीं? क्यों यह मुकर्रर नहीं? * क्यों परेशान सा हैं ? यहाँ हर कोई आदमी……? * उठ रहे सवाल? कर रहे बवाल? * किधर जाए? हल कोई ? क्यों मिलता नहीं? * मेरे...

  • खामोशियाँ

    खामोशियाँ

    कौन कहता है ? खामोशियाँ बे आवाज़ होती है कभ दिल से सुनो उनमें गहरे लफ्जो़ं की आवाज होती है। गूंजते हैं भाव प्रतिभाव अनेक प्रतिध्वनियां फूटते हैं गहन उद्गार आशयों अभिप्रायों से दूर मौन गूंजती...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    कल एक झलक जिंदगी को देखा वो राहों में मेरी गुनगुना रही थी! छिप जाती रह रह कर आँख मिचौली खेलती मुस्कुरा रही थी। एक अरसे के बाद यारों आया मुझे करार वो सहला के गोद...

  • कोई  समझाओ तो……

    कोई समझाओ तो……

    खिज़ा निकली है तलाश में बहारों की मौसम गमों से सरद है कोई समझाओ तो… यूं ही कोई उदास नहीं होता किसी को खोने का गम है इसे बताओ तो… क्यों करे गिले शिकवे यह वक्त...

  • सिसकती कलाईयाँ

    सिसकती कलाईयाँ

    लो आ गई राखी फिर से माँ आज फिर मेरी कलाई सूनी है बाँधी हैं सबने रंग-बिरंगी राखियाँ पर मेरी कलाईयाँ सूनी हैं! काश! मेरी भी एक बहन होती जो बाँधती राखी मुझको बाँधकर राखी मुझे...