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  • आरे में आरा

    आरे में आरा

    टहल-वहल कर आया और झाड़ू-वाड़ू भी लगाया क्योंकि बाहर की खर-पतवार पर क‌ई बार निगाह-सिगाह पड़ चुकी थी। अब चाय-वाय पी लेने के बाद इत्मीनान से बैठ गया हूं। फेसबुक पर कुछ पोस्ट करने के लिए...

  • मीडिया के जुलाहे

    मीडिया के जुलाहे

    गजब है भाई इस देश की मीडिया ! हाँ ‘मीडिया’ को लेकर कन्फ्यूजियाइए मत, आज के जमाने में इसका दो ही मतलब निकलता है; एक न्यूज चैनल और दूसरा सोशल मीडिया, बस। अगर यह चैनल वाला...


  • अभिभूतीकरण

    अभिभूतीकरण

    घिसई अकसर नेताओं के भाषणों को “आरत के मन रहई न चेतू” टाइप से आब्जर्व करता है और उसी में अपना भाग्य तलाशता है। कभी-कभार मिलने पर जब वह इन भाषणों का जिक्र मुझसे करता है,...


  • बोरियतनामा

    बोरियतनामा

    मैं बैठे-बैठे बोर हो रहा हूँ..बोरियत भगाने के लिए कुछ लिखने की सूझ रही है..लेकिन यहाँ का दृश्यमान वातावरण बोरियत भरा होने के कारण विषय-विहीन प्रतीत हो रहा है, फिर भी लिख रहा हूँ…एक ओर कुछ...


  • रूपए का गिरना

    रूपए का गिरना

    पेट्रोल पंप की ओर कार मोड़ते ही मुझे घिसई दिखाई पड़ गया। देखते ही मैंने उसे जोर से पुकारा, “का हो घिसई का हालचाल बा?” हालचाल पूँछने से खुश हुआ घिसई मेरे पास आकर बोला, “सब...


  • व्यंग्य की संतई

    व्यंग्य की संतई

    वैसे तो कबीर लिटरेचर मेरा प्रिय विषय रहा है..! लेकिन इधर कबीर राजनीति के क्षेत्र में उतर आए हैं, और व्यंग्यकारों ने इसे ताड़ लिया है ! तभी तो, बेचारे कबीर भी व्यंग्यियाए जा रहे हैं..बाप...