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  • पुस्तक-मेले में लेखक

    पुस्तक-मेले में लेखक

    इधर सोशल मीडिया पर किसी पुस्तक मेले की खूब चर्चा चली ! मैं भी यहीं से पुस्तक-मेले में हो रही गतिविधियों को वाच करता रहा। जहाँ लेखकों की गहमागहमी के साथ उनकी पुस्तकों के विमोचन की...


  • रजाई बनाम कंबल

    रजाई बनाम कंबल

    पचीस दिसंबर पर वाकई ठंडी बहुत बढ़ जाती है। इधर महोबा में क्या है कि अभी तक कंबल ओढ़ने से काम चल जाता है। लेकिन इस पचीस दिसंबर को ऐसा लगने लगा कि अब यहाँ भी...

  • छेड़खानी

    छेड़खानी

    तो छेड़खानी का अजीब मसला छाया हुआ है आजकल! यह बहुत चर्चित शब्द बन चुका है। छेड़खानी पर जितना हो-हल्ला मचता है उतना ही घटने के बजाय यह बढ़ रही है। अभी देखिए गुजरात में क्या...



  • धुंध के पार्टिकल

    धुंध के पार्टिकल

    बहोत धुंध है भाई! हाँ इस देश में धुंध ही धुंध तो है! सूर्य देवता अब कित्ता प्रकाश फेंकें कि धुंध कटे? कहते हैं हर जगह पक्ष और प्रतिपक्ष होता है, सो नमी है तो खुश्की...

  • जमानतदार

    जमानतदार

    अब मैं उसे हैरानी के साथ देखने लगा था..! और वह भी कपाल में गहरी धँसी मिचमिचाती आँखो से अपनी निगाह मुझ पर स्थिर किए हुए था…और इसी के साथ वातावरण में निस्तब्धता सी छा गई...