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  • रूपए का गिरना

    रूपए का गिरना

    पेट्रोल पंप की ओर कार मोड़ते ही मुझे घिसई दिखाई पड़ गया। देखते ही मैंने उसे जोर से पुकारा, “का हो घिसई का हालचाल बा?” हालचाल पूँछने से खुश हुआ घिसई मेरे पास आकर बोला, “सब...


  • व्यंग्य की संतई

    व्यंग्य की संतई

    वैसे तो कबीर लिटरेचर मेरा प्रिय विषय रहा है..! लेकिन इधर कबीर राजनीति के क्षेत्र में उतर आए हैं, और व्यंग्यकारों ने इसे ताड़ लिया है ! तभी तो, बेचारे कबीर भी व्यंग्यियाए जा रहे हैं..बाप...

  • सरकार की आलोचना

    सरकार की आलोचना

    किसी भी सरकार के कामों नीतियों का विश्लेषण अपने निजी राजनैतिक दृष्टि से परे जाकर करना चाहिए। अभी पिछले दिनों वर्तमान सरकार की नीतियों से उपजे प्रभाव पर एक साथी से कुछ चर्चा हुई। इस चर्चा...

  • अरे इन दोऊ राह न पाई !

    अरे इन दोऊ राह न पाई !

    आज मन कुछ उदास था..अन्यमनस्कता में मन काम के प्रति एकाग्र नहीं हो पा रहा था..मन को कुरेदा..आखिर ऐसा क्यों? तो पता चला इधर कई दिन हो गए थे स्वजनों से मिले हुए..! मुझे अपनी मन:स्थिति...

  • गठबंधन की गाँठ

    गठबंधन की गाँठ

    गठबंधन के बिना यह दुनियाँ नहीं चल सकती, ऐसा मैं नहीं दुनियादारी कहती है..यहाँ कहाँ नहीं है गठबंधन! कोई बताए..? यह गठबंधन बिलावजह नहीं होता..हर कोई, या तो अपने फायदे के लिए, या किसी को जलाने...

  • जीवन की सहजवृत्तियाँ

    जीवन की सहजवृत्तियाँ

    अभी-अभी पौधे और घास सींचकर बरामदे के तखत पर मैं बैठा हूँ…जानता हूँ, इन्हें छोड़कर अब जाने वाला हूँ…लेकिन इन्हें कुम्हलाते…मुरझाते…नहीं देख सकता..एक अजीब सा लगाव हो आया है..इन पौधों और इस वातावरण से…!! खैर…यह भी...


  • ये बचाने वाले लोग !

    ये बचाने वाले लोग !

    …कुछ लोग “बचाओ-बचाओ” के शोर के साथ मेरी ओर बढ़े आ रहे थे…उत्सुकतावश मैं अपने आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ देखने लगता हूँ ..!! लेकिन संकटापन्न की कोई स्थिति दिखाई नहीं देती …फिर भी किसी को बचाने के आपद्...