हास्य व्यंग्य

लोकतांत्रिक ढेले

आजकल देश को सही मायने में विशुद्ध लोकतांत्रिक बनाने के लिए ढेलेबाजी की जरूरत महसूस की जा रही है, ऐसा क्यों? क्योंकि यह एक प्रकार की सेक्युलरिज्म की भी अभिव्यक्ति है। वैसे तो इसके अभिव्यक्ति के कई तरीके हैं, लेकिन अन्य तरीके पुराने पड़ने के साथ अप्रभावित टाइप के हो रहे थे। कोई भी लोकतांत्रिक […]

हास्य व्यंग्य

आरे में आरा

टहल-वहल कर आया और झाड़ू-वाड़ू भी लगाया क्योंकि बाहर की खर-पतवार पर क‌ई बार निगाह-सिगाह पड़ चुकी थी। अब चाय-वाय पी लेने के बाद इत्मीनान से बैठ गया हूं। फेसबुक पर कुछ पोस्ट करने के लिए मन कुलबुलाने लगा, जैसे अखाड़े को देख पहलवानी सूझे! तो सोचा आओ इस पर कुछ लिखें-फिखें ही। क्या लिखना […]

हास्य व्यंग्य

मीडिया के जुलाहे

गजब है भाई इस देश की मीडिया ! हाँ ‘मीडिया’ को लेकर कन्फ्यूजियाइए मत, आज के जमाने में इसका दो ही मतलब निकलता है; एक न्यूज चैनल और दूसरा सोशल मीडिया, बस। अगर यह चैनल वाला मीडिया किसी बात पर जोश में है तो समझिए पूरा देश जोश में है और अगर शोक में है […]

हास्य व्यंग्य

भोले बाबा के साथ राजनीति

वैसे मैं खोने-पाने का तो नहीं, लेकिन अपने द्वारा किए वादे का हिसाब जरूर रखता हूँ, आखिर हम त्रेता से कलियुग तक “प्राण जाय पर वचन न जाए” या फिर “वादा किया है, तो निभाना पड़ेगा” जैसी मान्यताओं को कांटिन्युअसली लेकर चलने वाले देश से जो हैं!! तो, अकसर साल बीतते-बीतते, मैं मूंड़ी घुमाकर पीछे […]

हास्य व्यंग्य

अभिभूतीकरण

घिसई अकसर नेताओं के भाषणों को “आरत के मन रहई न चेतू” टाइप से आब्जर्व करता है और उसी में अपना भाग्य तलाशता है। कभी-कभार मिलने पर जब वह इन भाषणों का जिक्र मुझसे करता है, तो मैं भी इनमें कहाँ-कहाँ पप्पू-गप्पू पन छिपा होता है, इस बात से उसे परिचित कराता हूँ। असल में […]

हास्य व्यंग्य

विपरीत कोण भी आपस में बराबर होते हैं !

मैंने चौराहे पर आज एक राजनीतिक दल का जुलूस देखा। जिसकी अगुवाई एक सज्जननुमा नेताजी के हाथ में था, जो बीच-बीच में अपने भाषण की दाल को नारे का तड़का देकर जुलूस में शामिल कामन-मैनों को परोस रहे थे। हाँ यही नारा था उनका “मिले पहले हमको रोटी-दाल, रखो तुम अपना मेवा-पकवान।” इस नारे का […]

हास्य व्यंग्य

बोरियतनामा

मैं बैठे-बैठे बोर हो रहा हूँ..बोरियत भगाने के लिए कुछ लिखने की सूझ रही है..लेकिन यहाँ का दृश्यमान वातावरण बोरियत भरा होने के कारण विषय-विहीन प्रतीत हो रहा है, फिर भी लिख रहा हूँ…एक ओर कुछ बड़े-बूढ़े और बच्चे ताजिए का जुलूस उठने के इंतजार में बोर हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सब्जी […]

हास्य व्यंग्य

तेल का दाम और बैलेंसिंग पावर !

पेट्रोल पंप का कर्मचारी कार की टंकी में पाइप का नोजल डालकर इत्मीनान से नोट गिनने लगा और मैं पंप के डिजिटल मानीटर पर लीटर और रूपए पर निगाह जमाए सन् चौरासी-पिचासी में अपने विजय सुपर स्कूटर को याद कर रहा था। वो भी क्या दिन थे, सात रूपए में एक लीटर पेट्रोल! लेकिन तब […]

हास्य व्यंग्य

रूपए का गिरना

पेट्रोल पंप की ओर कार मोड़ते ही मुझे घिसई दिखाई पड़ गया। देखते ही मैंने उसे जोर से पुकारा, “का हो घिसई का हालचाल बा?” हालचाल पूँछने से खुश हुआ घिसई मेरे पास आकर बोला, “सब गुरू का आशीर्वाद हौवे..” वैसे मैं कोई गुरूवाई नहीं करता और न ही इसे कोई “गुरु-मंन्त्र” दिया है लेकिन […]

हास्य व्यंग्य

क्यों न हम शरीर को ही आत्मा मानें ?

क्यों न हम शरीर को ही आत्मा माने..! आखिर, आत्मा मानने से अनेकानेक लफड़े जो खड़े हो जाते हैं..! फिर तो, परमात्मा मतलब एक ऊपरवाले का कांसेप्ट भी मानना पड़ता है, और..द्यूलोक वासी परमात्मा की ओर यह शरीरधारी आत्मा निहारती रहती है। ऊपरवाला-ऊपरवाला कहते-निहारते शरीर की भी ऐसी की तैसी हुई रहती है तथा परमात्मा […]